जनसंवाद और जमीनी निरीक्षण से चमकी आईपीएस धवल जायसवाल की कार्यशैली

• शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद और कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर दिए अहम निर्देश
• जनता से सीधा संवाद और कांवड़ यात्रा को लेकर फील्ड में सख्त निगरानी, व्यवस्था और संवेदना का आदर्श बना नगर पुलिस उपायुक्त का नेतृत्व

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कमिश्नरेट गाजियाबाद में पुलिसिंग को संवेदनशीलता और तत्परता की नई पहचान देने वाले अधिकारियों में नगर क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (आईपीएस) धवल जायसवाल का नाम तेजी से सामने आ रहा है। पुलिस आयुक्त के निर्देशों के तहत डीसीपी धवल जायसवाल न केवल अपने कार्यालय में आमजन से सीधे संवाद कर रहे हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों को लेकर भी स्वयं फील्ड में उतर कर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। कमिश्नरेट गाजियाबाद के अंतर्गत पुलिस प्रशासन को जनोन्मुखी और सक्रिय बनाने की दिशा में नगर क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल की कार्यशैली एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है। एक ओर वह अपने कार्यालय में आमजन की शिकायतों को न केवल पूरी गंभीरता से सुन रहे हैं, बल्कि दूसरी ओर कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को लेकर स्वयं फील्ड में उतरकर व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा भी कर रहे हैं।

यह दोहरी सक्रियता गाजियाबाद पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को नई मजबूती दे रही है। पुलिस उपायुक्त (आईपीएस) धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस और जनता के बीच संवाद ही विश्वास की सबसे मजबूत नींव है। हमारी प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय और सुरक्षा समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से मिले। जन शिकायतों का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और नैतिक उत्तरदायित्व है। कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हमारी भूमिका केवल व्यवस्था बनाने तक सीमित नहीं रहती, यह हमारे लिए सेवा का अवसर होता है। श्रद्धालुओं को हरसंभव सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का अनुभव मिले इसके लिए हम पूरे फोर्स के साथ सतर्क और सक्रिय हैं। हमारा प्रयास है कि गाजियाबाद पुलिस आमजन की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतरे और जन-विश्वास की मिसाल बने।

जन संवाद से बना भरोसे का रिश्ता
पुलिस आयुक्त के निर्देश पर नगर डीसीपी धवल जायसवाल ने अपने कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आम लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। शिकायतकर्ताओं की बातों को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए उन्होंने प्रत्येक मामले की गहनता से जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मामलों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह पहल केवल संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर शिकायत के निवारण की निगरानी स्वयं डीसीपी स्तर से की जा रही है। यही कारण है कि आम नागरिक अब पुलिस कार्यालय में अपनी बात खुलकर रखने में सहज महसूस कर रहे हैं।

दूधेश्वरनाथ मंदिर का स्थलीय निरीक्षण, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
कांवड़ यात्रा और श्रावण मास के अवसर पर शहर में लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए डीसीपी धवल जायसवाल ने कोतवाली नगर प्रभारी और पुलिस बल के साथ शुक्रवार को नगर कोतवाली टीम के साथ श्री दूधेश्वरनाथ मंदिर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मेडिकल सहायता, सीसीटीवी निगरानी, महिला सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था, प्रवेश और निकास मार्ग जैसी तमाम व्यवस्थाओं का बारीकी से जायज़ा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो यह प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे आयोजनों में प्रशासनिक व्यवस्था केवल एक ड्यूटी नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होनी चाहिए। इसी सोच के साथ गाजियाबाद पुलिस का पूरा अमला सक्रिय है।

जनता और पुलिस के बीच की दूरी कर रहे हैं कम
डीसीपी जायसवाल की यह दोहरी सक्रियता एक ओर जन संवाद और दूसरी ओर मैदानी उपस्थिति न केवल पुलिसिंग की पारंपरिक छवि को बदल रही है, बल्कि एक ऐसा भरोसेमंद प्रशासनिक मॉडल तैयार कर रही है जिसमें जनता और पुलिस के बीच विश्वास की खाई धीरे-धीरे भरती नजर आ रही है। क्षेत्रीय नागरिकों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने भी डीसीपी की कार्यशैली की मुक्त कंठ से सराहना की है और आशा जताई है कि इसी तरह यदि अफसरशाही जमीन पर उतरती रही तो गाजियाबाद जल्द ही एक आदर्श कमिश्नरेट के रूप में स्थापित होगा।