-जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में श्रमिक कल्याण और बाल श्रम उन्मूलन पर विस्तृत समीक्षा बैठक
-गरीब और असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण और कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन
-निर्माण स्थलों और लेबर अड्डों में पंजीकरण शिविरों के माध्यम से श्रमिकों का संरक्षण
-बाल श्रम मुक्त जनपद और बंधुआ श्रमिक मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। महात्मा गांधी सभागार, कलेक्ट्रेट में बुधवार को जिला श्रम बन्धु समिति, बाल श्रम उन्मूलन जनपद समिति, जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं जिला स्तरीय बंधुआ श्रम सतर्कता समिति की संयुक्त बैठक जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में श्रमिकों के पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं के लाभ तथा बाल एवं बंधुआ श्रम उन्मूलन को लेकर व्यापक समीक्षा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि गरीब और असंगठित श्रमिकों को योजनाओं से जोड़कर सशक्त बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र श्रमिक का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराया जाए और उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। श्रमिकों से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, कोताही या उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा लक्ष्य के अनुरूप कार्य न होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने आगामी माह में श्रमिक पंजीकरण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने के निर्देश भी दिए।
उप श्रम आयुक्त श्री अनुराग मिश्र ने बैठक में श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि असंगठित क्षेत्र के वे सभी श्रमिक, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है, जो ईएसआई, ईपीएफ अथवा एनपीएस से आच्छादित नहीं हैं और आयकरदाता नहीं हैं, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के अंतर्गत लाभान्वित किए जा रहे हैं। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर श्रमिक को तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन तथा मृत्यु उपरांत उसके आश्रित को पेंशन का 50 प्रतिशत दिए जाने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत गृह आधारित कर्मकार, फेरी लगाने वाले, मध्यान्ह भोजन कर्मकार, ईंट भट्टा श्रमिक, सिर पर बोझा ढोने वाले, मोची सहित विभिन्न व्यवसायों से जुड़े श्रमिकों को आच्छादित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, जल निगम एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माणाधीन स्थलों पर ठेकेदारों के सहयोग से कार्यरत सभी निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड तथा ई-श्रम एवं प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक श्रमिकों को पंजीकृत किया जाए। श्रम विभाग को निर्देश दिए गए कि माइक्रो प्लान तैयार कर निर्माण स्थलों, लेबर अड्डों और मलिन बस्तियों में पंजीकरण शिविर आयोजित किए जाएं। बैठक में सहायक श्रम आयुक्त कृष्ण अवतार ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि कन्या विवाह सहायता योजना के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों की दो पुत्रियों के विवाह पर प्रति पुत्री 65 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना के तहत प्रथम दो संतानों पर पुत्री होने की दशा में 25 हजार रुपये एवं पुत्र होने पर 20 हजार रुपये का लाभ दिया जाता है। महिला निर्माण श्रमिकों को तीन माह का न्यूनतम वेतन एवं बोनस तथा पुरुष निर्माण श्रमिकों को एकमुश्त छह हजार रुपये का हितलाभ दिया जाता है। संत रविदास शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत कक्षा एक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति दी जाती है। दुर्घटना अथवा मृत्यु की स्थिति में पंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को लाखों रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। उप श्रम आयुक्त ने यह भी बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में जनपद में 6937 श्रमिकों का पंजीकरण, 5876 अधिष्ठानों का पंजीकरण किया गया है तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 12,301 लाभार्थियों को 6.42 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।
बैठक के दौरान बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. कौमुद चौधरी ने जनपद में 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए शेल्टर होम न होने का विषय उठाया, जिस पर जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को तत्काल प्रस्ताव प्रेषित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए सतत अभियान चलाने तथा बंधुआ श्रम से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। बैठक में जल निगम, लोक निर्माण विभाग, नगर निकायों, श्रम विभाग, श्रमिक संगठनों एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
















