स्मार्ट सिटी-2020 समिट कार्यक्रम में मेयर-म्युनिसिपल कमिश्रर ने किया प्रेजेंटेशन
गाजियाबाद। लखनऊ में बुधवार को स्मार्ट सिटी-2020 समिट कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गाजियाबाद की मेयर आशा शर्मा एवं म्युनिसिपल कमिश्रर महेंद्र सिंह तंवर भी शामिल हुए। समिट में शहर को स्मार्ट बनाने, काम की चुनौतियों और योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मेयर ने स्मार्ट सिटी पैनल एवं म्युनिसिपल कमिश्रर ने आईटी पैनल में भागीदारी की और अपने विचार रखे। मेयर आशा शर्मा ने अपने पैनल में बताया कि इंसान का शरीर 5 तत्वों से बना है। शरीर को दुरूस्त रखने के लिए इन 5 तत्वों का ठीक होना बेहद जरूरी है। 
स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लोगों को स्वच्छ आवास की आवश्कता है। गार्बेज फ्री और गंदगी रहित होना चाहिए। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पृथ्वी को साफ रखना, सुंदर रखना व हरियाली का होना बहुत जरूरी है।
शहर को स्मार्ट बनाने के लिए जल बचाना, स्वच्छ जल पीना, जल का रिसाइकिल करना, वाटर स्टोरेज करना, झोड़ को बचाना और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी जरूरी है। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए स्वच्छ हवा होना जरूरी है। आजकल प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। नई-नई बीमारियां हो रहीं हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की सभी को आवश्यकता है। इसके साथ अच्छे पर्यावरण, अच्छे विकास, अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर, अच्छी हरियाली की आवश्यकता है। मेयर आशा शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम ने वेस्ट प्लास्टिक से कीबोर्ड बनाया है, जिसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवं इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इसी प्रकार वेस्ट प्लास्टिक से बैंच, ट्री गार्ड, प्रवेश द्वार आदि वस्तुएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद इस बार स्मार्ट सिटी में शामिल जरूर होगा।
म्युनिसिपल कमिश्रर महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए नीड क्या है, चैलेंज क्या है और क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा सेंट्रलाइज कंट्रोल रूम बनवाया है, जिसमें समस्याओं का निस्तारण किया जाता है। निर्धारित समय अवधि में लोगों की शिकायतों का निस्तारण किया जाता है और उन्हें जवाब देकर संतुष्ट भी दिया जाता है। म्युनिसिपल कमिश्नर ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए सॉलिड वेस्ट पर कार्य होना चाहिए। स्मार्ट सिटी के लिए एंटरप्राइजेज, रिसोर्सेस और प्लांनिंग की जरुरत है। उन्होंने बताया कि चैलेंज बहुत हैं। टेक्नोलॉजी के साथ टेक्नोलॉजी प्रयोग करने वाले भी टेक्नीकल होने चाहिए। लोग भी टेक्नॉलॉजी का प्रयोग करने की आदत डालें। स्मार्ट सिटी की परिकल्पना तभी साकार होगी जब शहर के नागरिक भी स्मार्ट यानी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों। नागरिक के तौर पर अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करें। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में युवा अहम योगदान दे सकते हैं। यह वर्ग नई तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल समाज की तस्वीर बदलने में कर सकता है। आजकल बच्चे ज्यादा सजग और संवेदनशील हैं। कई बार अभिभावक गलती कर जाते हैं लेकिन बच्चे उनको सिविक सेंस का अहसास करा देते हैं। इसलिए नागरिक दायित्व का भाव बचपन से ही विकसित किया जाए तो व्यवस्था बदलाव कठिन नहीं होगा।
















