जज्बा और जुनून से शिखर पर पहुंचे जेपी कौशिक देश-विदेश में छाया आशीर्वाद ग्रुप, नौकरी छोड़कर शुरू किया कारोबार तो परेशानियों ने घेरा, पर सबको किया परास्त

पिता के साथ दो बेटों ने कंधे से कंधा मिलाया तो कारोबार नये मुकाम तक पहुंचा, जेपी कौशिक मूल रूप से गजरौला उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वह डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन मुरादाबाद में हुए दंगों के कारण इनकी पढ़ाई बाधित हुई। फिर वह इंजीनियरिंग की तरफ मुड़े। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद जेपी कौशिक ने कई बड़ी कंपनियों में काम किया। जेके टायर, मैक्स इंडिया, जुबिलेंट जैसी कंपनी में काम किया। हालांकि वह शुरू से ही अपना कारोबार करना चाहते थे, लेकिन पारिवारिक कारणों के चलते उन्हें नौकरी करनी पड़ी। नौकरी करते हुए मन में इच्छा थी कि एंटरप्रेन्योर बनना है। खुद का काम शुरू करना है और लोगों को नौकरी देना है। आशीर्वाद ग्रुप द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ो लोगों को रोजगार दे रहा है। आशीर्वाद ग्रुप द्वारा देश विदेश की कई बड़ी कंपनियां को सेवाएं दी जाती है। पेप्सीको, खेतान, वरुण बेवरेज, धामपुर शुगर मिल इनके क्लाइंट हैं। रेलवे, भेल, एनएचपीसी जैसी बड़े और महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के साथ आशीर्वाद ग्रुप का कारोबार है। किंग फिशर, विप्रो, कार्ल्सबर्ग सहित बीयर बनाने वाली कई कंपनियां आशीर्वाद ग्रुप के साथ कारोबार करती हैं। कंपनी गैस प्लांट बनाने की मशीन और टेक्नोलॉजी देती है।आशीर्वाद ग्रुप छोटी सी शुरुआत के बाद आज देश विदेश में भी काम करता है। आशीर्वाद ग्रुप द्वारा अपने उत्पादों का विदेश में निर्यात किया जा रहा है। कंपनी द्वारा मुख्य रूप से अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और सार्क देशों में अपने उत्पादों का निर्यात किया जाता है। संगठन शक्ति सर्वदे इस मूल मंत्र के साथ जेपी कौशिक कई संगठनों से जुड़े हुए हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के माध्यम से उद्यमियों की समस्याओं को दूर करने में भरपूर मदद करते हैं।

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और ईमानदारी व जुनून से काम किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसा ही कर दिखाया है आशीर्वाद ग्रुप के एमडी जगदीश प्रसाद (जेपी) कौशिक ने। अपनी मेहनत के बल पर तीन कंपनियों को खड़ा किया और ग्रुप का सालाना टर्नओवर 40 करोड़ पहुंच गया है। इस काम में उनके दो बेटों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। संघर्ष भरे अपने उद्यमिता के सफर में जेपी कौशिक ने अलग पहचान बनाई है। आज आशीर्वाद ग्रुप के उत्पाद देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में धमक बनाए हुए हैं।

जेपी कौशिक मूल रूप से गजरौला उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वह डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन मुरादाबाद में हुए दंगों के कारण इनकी पढ़ाई बाधित हुई। फिर वह इंजीनियरिंग की तरफ मुड़े। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद जेपी कौशिक ने कई बड़ी कंपनियों में काम किया। जेके टायर, मैक्स इंडिया, जुबिलेंट जैसी कंपनी में काम किया। हालांकि वह शुरू से ही अपना कारोबार करना चाहते थे, लेकिन पारिवारिक कारणों के चलते उन्हें नौकरी करनी पड़ी। उनकी सोच थी कि अपने लिए तो सब करते हैं, कुछ दूसरों के लिए भी किया जाए। यही कारण रहा कि नौकरी करते हुए मन में इच्छा थी कि एंटरप्रेन्योर बनना है। खुद का काम शुरू करना है और लोगों को नौकरी देना है। आखिर जेपी कौशिक के मन में जो था, उसके लिए उन्होंने 2006 में कदम बढ़ा दिए। नौकरी छोड़ी और प्रोपराइटरशिप फर्म बना लिया। कंपनी शुरू करने के साथ ही 2006 में एक्सपोर्ट का पहला आर्डर मिला। ऑर्डर के साथ एडवांस चेक भी मिला। लेकिन, आगे की राह आसान नहीं थी। पर वह पीछे नहीं हटे और अपने नेक इरादों के साथ वह आगे बढ़ते रहे।  उद्यमी किस तरह से परेशान होता है और उद्यमियों को कितनी परेशानी होती है, इसका एहसास जेपी कौशिक को तुरंत हो गया। शुरुआत में अकाउंट खोलने के लिए बैंक तैयार नहीं था। सरकारी विभागों में तरह-तरह के रजिस्ट्रेशन और कागजी कार्रवाई में उलझ कर रह गए। काफी परेशान होने के बाद बैंक में अकाउंट खुल पाया।

2014 ने विकास की राह प्रशस्त की
कौशिक बताते हैं कि एक समस्या दूर होती तो दूसरी मुंह खोलकर खड़ी हो जाती। समस्या आई की काम शुरू करने के लिए फैक्ट्री कहां लगाई जाए। पूंजी का अभाव था। ऐसे में खुद की फैक्ट्री खोलने संभव नहीं था। फिर किराये पर एक फैक्ट्री ली। शुरुआती 6-7 साल काफी संघर्षपूर्ण रहा। वर्ष 2011 में प्रोपराइटरशिप फर्म को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाया। इसके बाद भी जद्दोजहद जारी रही। बातचीत में जेपी कौशिक ने ऐसी बातें बताईं, जो हर उद्यमी के सामने आती हैं। ऐसे समय में धैर्य रखने की जरूरत है। वर्ष 2014 जेपी कौशिक के लिए महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान उन्हें बैंक से 70 लाख का कॉलेटरल फ्री ओवरड्राफ्ट की फैसिलिटी मिली। इससे वर्किंग कैपिटल की समस्या दूर हो गई। अब आशीर्वाद ग्रुप में तीन कंपनियां है। आशीर्वाद कार्बोनेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, आशीर्वाद कार्बोनेक्स इंडस्ट्रीज व आशीर्वाद ओवरसीज ट्रेडिंग कंपनी है। गाजियाबाद के धौलाना यूपीएसआईडीसी क्षेत्र स्थित मसूरी गुलावठी रोड पर कंपनी स्थित है।

सैकड़ो लोगों को रोजगार दे रहे
आशीर्वाद ग्रुप द्वारा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ो लोगों को रोजगार दे रहा है। वर्तमान में कंपनी का सालाना टर्नओवर 40 करोड़ है। आशीर्वाद ग्रुप द्वारा देश विदेश की कई बड़ी कंपनियां को सेवाएं दी जाती है। पेप्सीको, खेतान, वरुण बेवरेज, धामपुर शुगर मिल इनके क्लाइंट हैं। रेलवे, भेल, एनएचपीसी जैसी बड़े और महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के साथ आशीर्वाद ग्रुप का कारोबार है। किंग फिशर, विप्रो, कार्ल्सबर्ग सहित बीयर बनाने वाली कई कंपनियां आशीर्वाद ग्रुप के साथ कारोबार करती हैं। कंपनी गैस प्लांट बनाने की मशीन और टेक्नोलॉजी देती है। जेपी कौशिक बताते हैं की गुडविल बहुत जरूरी है। यदि आप अपने जीवन में या फिर कारोबार में सफल होना चाहते हैं तो आपको हमेशा अपनी साख का ख्याल रखना चाहिए। गुडविल यानी साख की बदौलत ही आप कठिन परिस्थितियों को पार कर पाते हैं। यदि आपकी अच्छी साख होगी तो आपको मार्केट में बेहतर रिस्पॉन्स मिलेगा। लोग आप पर भरोसा करेंगे और आपको काम देंगे। आपके पास पूंजी का अभाव होगा तब भी लोग आपके गुडविल को देखते हुए आपको उधार माल देंगे।

उद्यमियों के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी
जेपी कौशिक कहते हैं कि यदि हमें विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना है तो लोगों को सोचना होगा कि हमें रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनना है।
यदि आप छोटी से छोटी कंपनी शुरू करते हैं तो भी आप कई लोगों को रोजगार देते हैं। सरकार कहती तो है कि वह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दे रही है, लेकिन उद्यमियों विशेष कर लघु उद्योगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम अमल में नहीं आ पाया है। इस कारण कारोबार की शुरुआत में ही उद्यमी टूटने लगते हैं और कई यंग एंटरप्रेन्योर सरकारी सिस्टम से थक कर कारोबार बंद कर देते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकारी सिस्टम को मैंने झेला है। जब मैंने कारोबार शुरू किया तो बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए वैट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगा जाता था। जब वैट रजिस्ट्रेशन के लिए जाता था तो बैंक का अकाउंट नंबर मांगा जाता था। हालांकि पहले के मुकाबले चीजें अब थोड़ी आसान हुई हैं। लेकिन अभी भी नए उद्यमियों की सहूलियत के लिए सरकार को काफी कुछ करना होगा।

बेटों ने मिलाया कंधा तो धंधा पहुंचा ऊपर
जेपी कौशिक कंपनी के एमडी हैं। इनके दो बेटे मयंक कौशिक और मोहित कौशिक कारोबार में सहयोग दे रहे हैं। बड़े बेटे मयंक कौशिक सीईओ व छोटे बेटे मोहित कौशिक सीओओ के पद पर हैं। वह गाजियाबाद के उद्यमी हैं और फर्स्ट जेनरेशन एंटरप्रेन्योर है। ब्राह्मण परिवार में जन्मे जेपी कौशिक धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। हापुड़ में एक गौशाला का संचालन करते हैं और लोगों को गौ सेवा के लिए प्रेरित भी करते हैं। उनकी मेहनत का नतीजा है कि आशीर्वाद ग्रुप छोटी सी शुरुआत के बाद आज देश विदेश में भी काम करता है। आशीर्वाद ग्रुप द्वारा अपने उत्पादों का विदेश में निर्यात किया जा रहा है। कंपनी द्वारा मुख्य रूप से अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और सार्क देशों में अपने उत्पादों का निर्यात किया जाता है। कौशिक कहते हैं कि संगठन में शक्ति होती है। संगठन शक्ति सर्वदे इस मूल मंत्र के साथ जेपी कौशिक कई संगठनों से जुड़े हुए हैं। वह संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्य करते हैं और संगठन के माध्यम से लोगों की काफी मदद करते हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के माध्यम से उद्यमियों की समस्याओं को दूर करने में भरपूर मदद करते हैं।