समाजसेवी सोशल चौकीदार के संस्थापक एवं गाजियाबाद के मेयर के पति केके शर्मा का साक्षात्कार

– शिवसेना ने अपनी नीतियों को बेचा, कांग्रेस का वजूद खत्म
– विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर बोले सोशल चौकीदार के के शर्मा

गाजियाबाद। भगवान की प्राप्ति के लिए मंदिर जाने या कई-कई घंटे पूजा-पाठ करने की आवश्यकता नहीं है। भगवान तो गरीबों के ह्दय में रहते हैं। गरीब एवं दीन-दुखियों की सेवा करेंगे तो भगवान का आशीर्वाद जरूर मिलेगा, क्योंकि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। यह बातें गाजियाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी एवंं सोशल चौकीदार संस्था के संस्थापक केके शर्मा ने उदय भूमि संवाददाता से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि कर्म ही जीवन है। बिना कर्म के मानव नहीं रह सकता। यह कर्म ही जीव के पाप और पुण्य का निर्धारण करते हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा। इसलिए जीव को निष्काम भाव से अपना कर्म करना चाहिए, क्योंकि उसकी ओर से किए गए कर्म ही उसके भाग्य का निर्धारण करते हैं। कहा कि जैसा बीज हम बोते हैं, वैसा ही फल प्राप्त होता है। इसी तरह से जैसे संस्कार हम बच्चों को देते हैं, बच्चे भी वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 37 साल से अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों की सेवा में समर्पित करता आया हूूं और आगे भी करते रहूंगा।
बता दें कि गाजियाबाद की प्रतिष्ठित कंपनी श्रीराम पिस्टन कंपनी को केके शर्मा ने अपनी सेवाएं दी है। अपने कार्यकाल में उन्होंने कंपनी के मजदूरों की समस्याओं के साथ-साथ बाहरी नागरिकों की समस्याओं का भी निस्तारण कराते रहे हैं। केके शर्मा ने बताया कि अभी कुछ माह पूर्व ही कंपनी से रिटायरमेंट लिया है, जिससे जरूरतमंदों की मदद सही समय एवं पूर्ण रूप से कर सकूं। क्योंकि कंपनी में नौकरी के दौरान पूर्ण रूप से लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। इसलिए भ्रष्टाचार, दबंगों से पीडि़त एवं जिन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। उनकी मदद के लिए सोशल चौकीदार संस्था का गठन किया गया। गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की आवाज बनकर सोशल चौकीदार लड़ाई लड़ेगा। केके शर्मा ने राजनीति में आने की संभावनाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन वह राजनैतिक मामलों में अपने विचारों एवं लेख के माध्यम से दखल जरूर देते हैं। केके शर्मा विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक मुद्दों पर खुलकर बेबाकी से अपने विचार रखते हैं। वह इस बात की परवाह नहीं करते हैं कि उनके विचारों से कोई सहमत है या नहीं। केके शर्मा का कहना है कि विचार बाहर रखना बेहद जरूरी है भले ही आपके अपने ही इससे सहमत ना हो लेकिन आप अपने विचार को जरूर बाहर लायें। लोकतंत्र में विचारों की मत भिन्नता बनी रहती है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी मजबूती है। उदय भूमि संवादाता ने सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत, कंगना रनौत पर महाराष्ट्र सरकार का हमला और महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश:।

प्रश्न- सुशांत सिंह केस में आप महाराष्ट्र सरकार की कैसी भूमिका देखते हैं?
उत्तर- महाराष्ट्र सरकार अपने स्तर से गिरकर एक ब्लॉक लेवल तक की सरकार बनकर रह गई है। सरकार ने अभिनेत्री कंगना रनौत का ऑफिस तुड़वा कर अच्छा नहीं किया। आधी मुंबई में अवैध निर्माण है। जिस पर बीएमसी ने कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कंगना के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित ज्यादा है। कंगना पर दबाव बनाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। सुशांत सिंह केस की जांच में कई राज सामने आने बाकी हैं।

प्रश्न- मुंबई फिल्म इंडस्ट्रीज में कुछ कलाकारों और ड्रग्स माफिया का सिंडिकेट सक्रिय है। इस पर सरकार को क्या करना चाहिए?
उत्तर- मुंबई फिल्म इंडस्ट्रीज की हकीकत किसी से छुपी नहीं है। पूरी फिल्म इंडस्ट्रीज ड्रग्स से भरी हुई है। इसका विरोध करने पर शिवसेना ने कंगना रनौत के खिलाफ ओछी राजनीति शुरू कर दी। राष्ट्र के विरोध में बोलने वाले कलाकारों का एक एजेंडा होता है। वह यूं ही यह नहीं बोलते कि उन्हें भारत में डर लगता है और भारत में असहिष्णुता है। मुंबई में दाउद इब्राहिम का दखल आज भी है। मुंबई में आज भी यदि कोई बिजनेस शुरू करना होता है तो कारोबारी को सबसे पहले शिवसेना के दरबार में हाजिर लगानी पड़ती है। केंद्र सरकार द्वारा कंगना रनौत को सुरक्षा दिया जाना सराहनीय कार्य है।

प्रश्न- सुशांत सिंह केस पर क्या राजनीति हो रही है?
उत्तर- ऐसा नहीं है। सुशांत की मौत की सीबीआई जांच कराने के लिए बिहार सरकार ने जो तत्परता दिखाई थी, वह काबिले-तारीफ है। कंगना ने बॉलीवुड के कई काले कारनामों से पर्दा उठाया है। सुशांत केस में तीन केंद्रीय एजेंसियां लगी हैं। जिन्हें जांच में काफी अह्म सुराग मिले हैं। उम्मीद है कि सुशांत के परिवार को जल्द न्याय मिल सकेगा।

प्रश्न-क्या शिवसेना की छवि को धक्का लगा है?
उत्तर- शिवसेना के नेता बाल ठाकरे की कमाई को खा रहे हैं। उनकी नीतियों को अब बेच दिया है। बाल ठाकरे आज स्वर्ग में भी दुखी हो रहे होंगे। कांग्रेस का वजूद खत्म हो चुका है। उनका एक नेता पूरब में देखता है तो दूसरा पश्चिम में। कांग्रेस की दुर्गति जारी है। कांग्रेस का किसी की सुरक्षा से मतलब नहीं है। कांग्रेस की भाषा पाकिस्तान या चीन की भाषा से मिलती है। मुझे नहीं लगता कि शिवसेना सरकार ज्यादा दिन चल पाएगी। वह अपनी करतूतों से गिर जाएगी। शरद पंवार भले ही भाजपा विरोधी हैं, मगर वह अच्छे चरित्र के नेता हैं। उन्होंने कंगना के दफ्तर पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई का विरोध किया है।

प्रश्न- शिवसेना हिंदूवादी पार्टी मानी जाती रही है फिर वह हिंदू विरोधी क्यों हो रही है?
उत्तर-धर्म की राजनीति और राजनीति के लिए धर्म में अंतर है। बाला साहब ठाकरे धर्म के लिए राजनीति करते थे और उन्होंने मुंबई के माफियाओं को उसकी औकात बताई। लेकिन बाला साहब के निधन के बाद से शिवसेना बदल गई है। उद्धव ठाकरे ने साबित कर दिया है कि धर्म उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। पालघर में पुलिस के सामने हिंदू साधुओं की पीट-पीटकर हत्याकर दी गई। लेकिन सरकार ने इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की। सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने फिर से मुगल राज स्वीकार कर लिया है।