शराब माफिया सावधान! अब गौतमबुद्ध नगर में नहीं चलेगा गंदा खेल

• नोएडा में शराब माफियाओं पर कहर बनकर टूटा आबकारी विभाग
• ‘ऑपरेशन पब्लिक प्लेस’ से खुले में शराब पीने वालों की अब खैर नहीं, आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव के नेतृत्व में जिले की पहचान बदलने की पहल

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी नोएडा की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर अब न नशे की बदबू बचेगी, न अराजकता का माहौल। अवैध शराब कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आबकारी विभाग ने कमर कस ली है। सरकारी आदेशों की अवहेलना कर सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वाले हों या फिर रेहड़ी-पटरी से बिना लाइसेंस शराब परोसने वाले – अब कोई नहीं बचेगा। जनपद गौतमबुद्ध नगर में अवैध शराब और खुले में शराबखोरी पर कड़ा शिकंजा कसते हुए जिला आबकारी विभाग ने ऐसा अभियान छेड़ा है, जिसने शराब माफियाओं और नियम तोडऩे वालों के होश उड़ा दिए हैं। अभियान की अगुवाई कर रहे हैं जिले के आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव, जिन्होंने न केवल अवैध शराब के अड्डों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीने वालों के खिलाफ ऑपरेशन पब्लिक प्लेस नाम से विशेष कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस अभियान का मकसद है जनमानस को भयमुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना। शराब का कारोबार अब तक ‘छुपे धंधों’ से निकलकर अब सड़कों, पार्कों, और मार्केट की गलियों तक पहुंच गया था। नशे की बोतलों के साथ अपराध, अभद्रता और अशांति का जहर भी समाज में घुलता जा रहा था। ऐसे में आबकारी विभाग ने अब कमर कस ली है और यह अभियान सिर्फ प्रतीक नहीं, बल्कि नीतिगत क्रांति है। ऑपरेशन पब्लिक प्लेस के तहत जिले के हर शराब ठेके, बार, रेस्टोरेंट और सार्वजनिक स्थल की गहन निगरानी हो रही है। किसी भी व्यक्ति को दुकानों के बाहर या सड़क पर शराब पीते पकड़ा गया, तो मौके पर ही एफआईआर, चालान या हिरासत—सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। आबकारी निरीक्षकों की संयुक्त टीमें लगातार रेड, गश्त, और गुप्त जांच कर रही हैं। शनिवार को आबकारी निरीक्षकों गौरव चन्द, आशीष पाण्डेय, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही, रवि जायसवाल, चन्द्रशेखर सिंह और नामवर सिंह की टीम ने कई अड्डों पर छापेमारी की। जिन स्थानों पर पहले खुलेआम शराब परोसी जाती थी, अब वहां सन्नाटा और सख्ती ने कब्जा जमा लिया है।

तस्करों के लिए ‘नो एंट्री; राज्य सीमा पर 24×7 गश्त
गौतमबुद्ध नगर अब शराब तस्करों के लिए मुफीद ज़मीन नहीं रहा। दिल्ली, हरियाणा और अन्य सीमाओं से आने वाली अवैध शराब की खेपों को रोकने के लिए 24 घंटे निगरानी और स्पॉट चेकिंग की जा रही है। हर वाहन, संदिग्ध व्यक्ति और गोदाम आबकारी विभाग की टीम की रडार पर है।

आबकारी की नई पहचान- कानून, अनुशासन और जवाबदेही
गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग अब सिर्फ लाइसेंस और टैक्स तक सीमित नहीं। सुबोध श्रीवास्तव ने इसे एक सशक्त निगरानी और सुधार व्यवस्था में बदल दिया है। उनके नेतृत्व में विभाग न केवल तस्करों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से ग्राहक फीडबैक लेकर भी शराब व्यापार में पारदर्शिता और जवाबदेही ला रहा है। शराब दुकानदारों को भी चेतावनी दी गई है कि यदि एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला गया या कोई ग्राहक शिकायत करता है, तो लाइसेंस तक रद्द हो सकता है।

हर रोज बन रहा है विश्वास, हर कदम पर मिल रहा है जनता का साथ
सुबोध श्रीवास्तव की कार्यशैली को लेकर स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और व्यापारियों में भी प्रशंसा का माहौल है। वे अब केवल एक अफसर नहीं, बल्कि जिले की छवि बदलने वाले प्रेरणास्त्रोत बनते जा रहे हैं। उनकी सोच साफ है कि जनहित सर्वोपरि, अपराध शून्य सहनशीलता, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही इन सबको लेकर जिले में हर दिन नई मुहिम चलाई जा रही है। गौतमबुद्ध नगर को अब सिर्फ आईटी हब या इंफ्रास्ट्रक्चर जोन नहीं, बल्कि कानून के राज और सशक्त प्रशासन के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इस नजीर को कायम रखने के लिए आबकारी विभाग पूरी तरह चौकन्ना है।

आबकारी निरीक्षकों की टीमवर्क कार्यशैली तस्करों के हौसलों को दे रही मुंहतोड़ जवाब
गौतमबुद्ध नगर में आबकारी निरीक्षकों की चुस्त-दुरुस्त टीम ने अवैध शराब कारोबारियों की नींदें उड़ा दी हैं। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में गठित यह टीम न केवल विभागीय दक्षता का प्रतीक बन चुकी है, बल्कि अपराध के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक संदेश भी दे रही है। गौरव चन्द, आशीष पाण्डेय, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही, रवि जायसवाल, चन्द्रशेखर सिंह और नामवर सिंह जैसे तेजतर्रार निरीक्षक अब जिले में कानून की पहली पंक्ति बन चुके हैं। यह टीम रोज़ सुबह अभियान की रणनीति बनाती है, क्षेत्रवार जिम्मेदारी तय होती है, और फिर अलग-अलग इलाकों में सघन छापेमारी और निगरानी होती है। तस्करों के ठिकानों पर दबिश, गुप्त सूचनाओं पर तेज कार्रवाई और चौबीसों घंटे सीमाओं की चौकसी यह सब अब जिले की नई कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन चुका है। हर निरीक्षक ना केवल कार्रवाई करता है, बल्कि शराब की दुकानों पर ओवररेटिंग, गड़बड़ी और अव्यवस्था को भी सख्ती से रोक रहा है। आबकारी विभाग की टीमवर्क की सबसे बड़ी ताकत है संपर्क और समन्वय। ये न सिर्फ आपस में सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान करते हैं, बल्कि पुलिस व स्थानीय प्रशासन से भी मजबूत तालमेल रखते हैं।

अवैध शराब नहीं, उसकी संस्कृति भी होगी खत्म

सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी

शराब का सेवन यदि मर्यादा में न हो, तो वह समाज के लिए विष बन जाता है। हम अवैध व्यापार ही नहीं, बल्कि उस सोच को भी खत्म करना चाहते हैं, जो सार्वजनिक स्थानों पर पीने को सहज मानती है। अब चेतावनी का समय गया। अब सिर्फ कार्रवाई होगी। उनके नेतृत्व में विभाग सिर्फ कानून का पालन ही नहीं करा रहा, बल्कि समाज को जागरूक भी कर रहा है। प्रत्येक दुकान पर गुप्त रूप से टेस्ट परचेजिंग कराई जा रही है। शराब की ओवर रेटिंग, ग्राहकों से बदसलूकी या अवैध बिक्री की शिकायतें आने पर सीधे लाइसेंस निलंबन और जुर्माना लगाया जा रहा है। जिले में अवैध शराब का कारोबार के साथ नियम के विरुद्ध कोई भी कार्य हो वह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी