गाजियाबाद में अब कागजों पर नहीं चलेंगी दवा दुकानें, लाइसेंस से पहले होगा स्थल सत्यापन

-औषधि विभाग सख्त, बिना भौतिक निरीक्षण के न नया लाइसेंस मिलेगा और न नवीनीकरण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में दवा दुकानों की मनमानी और कागजों में संचालित हो रही फर्मों पर अब पूरी तरह से लगाम कसने की तैयारी है। औषधि विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए दवा दुकान का नया लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण से पहले भौतिक सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। अब बिना स्थल निरीक्षण के किसी भी दवा दुकान को लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। इस कदम से कागजों में चल रही दुकानों पर रोक लगेगी और अवैध दवा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा। दवाओं की कालाबाजारी और बिना पर्चे के प्रतिबंधित व नशीली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए औषधि विभाग पहले से ही विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में अब लाइसेंस प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है। विभाग का मानना है कि भौतिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दुकान वास्तव में संचालित है या केवल दस्तावेजों में ही मौजूद है।

जिले में वर्तमान में करीब छह हजार छोटी-बड़ी दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्र ने बताया कि कोडीन और अन्य नारकोटिक्स दवाओं की अवैध खरीद-फरोख्त करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कोई भी नया लाइसेंस औषधि निरीक्षक द्वारा दुकान का स्थल निरीक्षण किए बिना जारी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पहले से संचालित दुकानों की भी नियमित जांच की जा रही है और जो दुकानें केवल कागजों में चल रही हैं, उनके खिलाफ औषधि नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। भौतिक सत्यापन व्यवस्था लागू होने से अवैध दवाओं की बिक्री पर भी लगाम लगेगी। अक्सर देखने में आता है कि कुछ दुकानदार बिना चिकित्सक के पर्चे के एंटीबायोटिक, नशीली और प्रतिबंधित दवाएं बेच देते हैं। अब निरीक्षण की सख्ती से ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

हालांकि जिले में औषधि निरीक्षकों की भारी कमी भी विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिले में जहां करीब छह हजार दवा दुकानें और दवाओं की फैक्ट्रियां संचालित हैं, वहीं इनकी निगरानी के लिए औषधि विभाग के पास केवल दो औषधि निरीक्षक ही तैनात हैं। निरीक्षकों की कमी का फायदा उठाकर दवा माफिया लंबे समय से अवैध कारोबार को अंजाम देते रहे हैं। औषधि विभाग के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसी फर्म सामने आई हैं, जिनका पंजीकरण तो किया गया था, लेकिन मौके पर जाकर देखने पर न तो वहां कोई दवा दुकान मिली और न ही फार्मासिस्ट मौजूद था।

कुछ मामलों में दुकान का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए किया जा रहा था, जबकि दस्तावेजों में वहां दवा बिक्री दर्शाई जा रही थी। ऐसे मामलों में विभाग ने कार्रवाई की है और आगे भी अभियान जारी रहेगा। औषधि विभाग का मानना है कि लाइसेंस से पहले और नवीनीकरण के दौरान अनिवार्य भौतिक सत्यापन से जिले में दवा कारोबार अधिक पारदर्शी होगा और आम लोगों को सुरक्षित एवं वैध दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।