संस्कृति, मूल्य और समाज की एकता पर मोहन भागवत का जोर: डॉ पीएन अरोड़ा

•  भारतीय संस्कृति और मानवीय सेवा ही सशक्त भारत की नींव: डॉ. उपासना अरोड़ा
• तीन दिवसीय व्याख्यान माला ने समाज के हर वर्ग को जोडऩे का किया प्रयास
• यशोदा अस्पताल कौशाम्बी की भागीदारी रही विशेष आकर्षण

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली/गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष की तैयारियों के अंतर्गत समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और संवाद का नया आयाम देने के लिए आगे बढ़ा है। इसी क्रम में राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय 100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज शीर्षक वाली भव्य व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ, लेकिन तीन दिन तक देशभर से आए विचारकों, विद्वानों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और समाजसेवियों ने जिस गहनता से विमर्श किया, उसने समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नई सोच का संचार किया। इस आयोजन में गाजियाबाद का नाम भी प्रमुखता से जुड़ा, क्योंकि यशोदा अस्पताल कौशांबी के एमडी डॉ. पी.एन. अरोड़ा और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उपासना अरोड़ा ने इसमें विशेष भागीदारी की। दोनों ने न केवल व्याख्यान माला के विचारों का समर्थन किया बल्कि समाज और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संस्कृति, सेवा और सहयोग से ही राष्ट्र सशक्त बन सकता है।

व्याख्यान माला के दौरान आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत का राष्ट्र केवल सत्ता या राजनीतिक व्यवस्था पर आधारित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंग्रेजी का ‘नेशन’ शब्द स्टेट से जुड़ा है, लेकिन भारत की राष्ट्र की अवधारणा सत्ता पर आधारित नहीं है। हम गुलाम थे, तब भी राष्ट्र था। हमारी असली शक्ति हमारी संस्कृति, हमारी परिवार संस्था और हमारे मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, सहयोग की भावना और जीवन-दर्शन ही भारत को अनूठा बनाते हैं। आज सरकार भी इन्हीं मूल्यों को आधार बनाकर दक्षता और समर्पण के साथ विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही है।

गाजियाबाद यशोदा अस्पताल कौशांबी के एमडी डॉ. पी.एन. अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि हम साथ-साथ हैं। यह केवल एक नारा नहीं बल्कि समाज की जीवन-रेखा है। चुनौतियां चाहे स्वास्थ्य क्षेत्र की हों, शिक्षा की हों या सामाजिक बदलाव की, उनका समाधान तभी संभव है जब हम सब एकजुट होकर कार्य करें। यशोदा अस्पताल का उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि हम केवल बीमारियों का इलाज न करें, बल्कि समाज के बीच स्वास्थ्य जागरूकता, सहयोग और सेवा की भावना का विस्तार करें। उन्होंने कहा कि व्याख्यान माला में दिए गए संदेश आज के समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि एक मजबूत राष्ट्र वही है जहां शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं सबके लिए उपलब्ध हों।

यशोदा अस्पताल की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उपासना अरोड़ा ने व्याख्यान माला में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी संस्कृति और सेवा की परंपरा है। यदि हम इन मूल्यों को आत्मसात कर लें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आएगा। यशोदा अस्पताल में हमारी प्राथमिकता हर मरीज को परिवार जैसा मानकर सेवा करना है। यही भावना हमें आगे बढऩे और लोगों का विश्वास जीतने की ताकत देती है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ प्रमुख के संदेश ने उन्हें और उनकी संस्था को और अधिक प्रेरित किया है कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में सहयोग और मानवीयता के संदेश को भी फैलाए।

समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में मील का पत्थर
तीन दिन तक चले इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की। चर्चा में यह बात बार-बार सामने आई कि भारत की असली परिभाषा सत्ता या राजनीति से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक प्रयासों और सांस्कृतिक धरोहर से तय होती है। यशोदा अस्पताल की भागीदारी इस व्याख्यान माला में विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह साबित करता है कि चिकित्सा जैसे क्षेत्र से जुड़े लोग भी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उतने ही सक्रिय और सजग हैं। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल मरीजों तक सीमित नहीं, बल्कि यह समाज और राष्ट्र दोनों की उन्नति से जुड़ा एक अहम स्तंभ है।