मंथन : बहुप्रतिक्षित वार्ता शुरू, विज्ञान भवन पर नजरें

5वीं बार आमने-सामने सरकार और किसान प्रतिनिधि

नई दिल्ली। दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसानों के बीच पांचवे दौर की बातचीत आरंभ हो गई है। किसान आंदोलन की दृष्टि से यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वार्ता के नतीजों पर निर्भर होगा कि किसान पीछे हटेंगे अथवा आंदोलन को जारी रखेंगे। वार्ता विफल होने की स्थिति में दिल्ली में शांति एवं कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया गया है। विज्ञान भवन में आयोजित वार्ता में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जा रही है। किसान प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से सरकार को भली-भांति अवगत करा दिया है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर अह्म बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पहुंचे थे। इस दरम्यान नए कृषि कानूनों और किसान आंदोलन पर चर्चा की गई। किसान आंदोलन का आज 10वां दिन है। अब तक सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच चार दौर की वार्ता हो चुकी है। पांचवें दौर की वार्ता आज चल रही है। उधर, पांचवें दौर की वार्ता से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि उम्मीद है कि किसान सकारात्मक रूप से सोचेंगे और आंदोलन को समाप्त कर देंगे। उधर, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी है। किसानों ने चेतावनी दी है कि सरकार से बातचीत का यदि कोई नतीजा नहीं निकला तो वह संसद का घेराव करेंगे। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने 8 दिसम्बर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है। भाकियू का कहना है कि सरकार को किसानों की मांगे मान लेनी चाहिए। एमएसपी को कृषि कानून में दर्ज करने सहित विभिन्न मांगों पर किसान अड़े हैं। सरकार भी जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।