महापौर व नगर आयुक्त ने की कंपनी के फाईलों की जांच, नगर निगम द्वारा वर्ष-2022 में कंपनी को 10 वर्ष के लिए ठेके को लेकर विवाद चला आ रहा है। इस मामले में नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा का कहना है कि कंपनी को बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद ही ठेका दिया गया। हालांकि जांच में मिनिट्स पर पूर्व महापौर के हस्ताक्षर मिले है। जबकि तत्कालीन कई पार्षदों का कहना है कि बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव कभी पेश तक नहीं किया गया। नगर निगम ने अपनी मर्जी से कंपनी को ठेका दिया गया। यूजर चार्ज कलेक्शन करने वाली स्पैरो कंपनी के खिलाफ फरवरी और अगस्त माह में पटना में नगर आयुक्त के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं। कंपनी पर पटना नगर निगम ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए पहले ही ब्लैक लिस्ट कर दिया है। ऐसे में ब्लैक लिस्ट कंपनी को कांट्रेक्ट देने पर भी अब सवाल उठ रहे है।
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने की एवज में यूजर चार्ज वसूलने का ठेका जिस स्पैरो सॉफ्ट टैक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया। वह कंपनी बिहार के पटना से ब्लैक लिस्ट है। स्पैरो सॉफ्ट टैक कंपनी के खिलाफ अब नगर निगम ने जांच शुरू कर दी है। जांच शुरू होने के बाद अब नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी (सीटीओ) डॉ. संजीव सिन्हा भी लपेटे में आ सकते हैं। क्योंकि कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित महापौर सुनीता दयाल के ऑफिस में उनकी उपस्थिति में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, जांच समिति में शामिल पार्षद प्रवीण चौधरी, पार्षद अजय शर्मा, पार्षद बिल्लू यादव, पार्षद राजीव भाटी एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक विवेक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा आदि की उपस्थिति में कंपनी की फाइलों की जांच की गई।
महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि निगम के एक जोन क्षेत्र का यूजर चार्ज कलेक्शन नगर निगम द्वारा स्वयं किया जाएगा। नगर आयुक्त ने कहा कि यूजर चार्ज से संबंधित अनुबंध की शर्तों का कंपनी को शत-प्रतिशत अनुपालन करना होगा।
महापौर कार्यालय में करीब 11 बजे शुरू हुई बैठक में जांच समिति ने करीब दो घंटे तक कंपनी के अनुबंध की शर्तों से लेकर यूजर चार्ज कलेक्शन की फाइल की जांच की। वहीं, एस्क्रो एकाउंट को खत्म कर निगम अब अपने एकाउंट से कंपनी को उसका प्रतिशत देने पर निर्णय लिया गया। दरअसल, नगर निगम की पिछले दिनों हुई बोर्ड बैठक में यूजर चार्ज वसूलने वाली स्पैरो कंपनी के खिलाफ पार्षदों ने हंगामा किया था। नगर निगम द्वारा वर्ष-2022 में कंपनी को 10 वर्ष के लिए ठेके को लेकर विवाद चला आ रहा है। इस मामले में नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा का कहना है कि कंपनी को बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होने के बाद ही ठेका दिया गया। हालांकि जांच में मिनिट्स पर पूर्व महापौर के हस्ताक्षर मिले है। जबकि तत्कालीन कई पार्षदों का कहना है कि बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव कभी पेश तक नहीं किया गया।
नगर निगम ने अपनी मर्जी से कंपनी को ठेका दिया गया। यूजर चार्ज कलेक्शन करने वाली स्पैरो कंपनी के खिलाफ फरवरी और अगस्त माह में पटना में नगर आयुक्त के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं। कंपनी पर पटना नगर निगम ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए पहले ही ब्लैक लिस्ट कर दिया है। ऐसे में ब्लैक लिस्ट कंपनी को कांट्रेक्ट देने पर भी अब सवाल उठ रहे है। हालांकि कंपनी को कांट्रेक्ट मार्च-2024 तक रहेगा। उसके बाद ही नगर निगम इस कंपनी का कांट्रेक्ट निरस्त कर पाएगा। उम्मीद है कि जल्दी ही जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। इस प्रकरण में अब मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
महापौर की अध्यक्षता में जांच कमेटी ने यूजर चार्ज कलेक्शन के अनुबंध की शर्तों का शत-प्रतिशत अनुपालन करने के लिए चर्चा हुई। यूजर चार्ज वसूली करने वाली कंपनी को नगर निगम द्वारा कलेक्शन करने पर 16 प्रतिशत कमीशन और 18 प्रतिशत जीएसटी का पैसा देना हैं। अनुबंध में लिखित शर्तोंं का सही प्रकार से अनुपालन हो। इसको लेकर जांच कमेटी ने मंथन किया। कूड़े से संबंधित किसी भी कार्य में जीएसटी नहीं लगती है। जबकि कंपनी को जीएसटी का पैसा अतिरिक्त दिया जा रहा हैं। इस पर कानूनी राय ली जाएगी। डेटा का स्वामित्व नगर निमम का होना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं है। इस जांच समिति सदस्यों द्वारा कंपनी द्वारा की जा रही गड़बड़ी पर नाराजगी जताई।
नगर निगम के सभी पांचों जोन में से एक जोन का नगर निगम खुद यूजर चार्ज की वसूली करेगा। कंपनी द्वारा यूजर चार्ज वसूलने की प्रोग्रेस को आंकलन करने पर ही यूजर चार्ज वसूलने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए बेहतर तरीके से कार्य करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया। कंपनी द्वारा की गई अनियमितताओं के लिए अधिकारियों को आदेश दिया कि भविष्य में इस प्रकार लापरवाही न हो। नगर निगम का कंपनी पर कंट्रोल होना चाहिए। कंपनी को नगर निगम के कर्मचारी यूजर चार्ज कलेक्शन के लिए नहीं दिए जाएंगे। सत्यापित बिलों के उपरांत ही कंपनी का निगम द्वारा भुगतान किया जाएगा। महापौर सुनीता दयाल एवंं नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक ने संयुक्त रूप से कमेटी के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को लापरवाही न करने और सूझबूझ से कार्य करने के लिए आदेश दिए। इसमें लापरवाही बरतने पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।

















