लापरवाही नहीं चलेगी, जनता को राहत देना ही प्रशासन की पहली जिम्मेदारी: अश्विनी त्यागी

-जाम, अतिक्रमण और भूमाफियाओं पर चला प्रशासनिक सख्ती का डंडा
-विनियमन समीक्षा समिति की बैठक में 67 बिंदुओं पर गहन समीक्षा
-शहर को जाम मुक्त बनाने और अवैध कब्जों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश
-स्मार्ट मीटर, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस नीति

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विनियमन समीक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को विकास भवन सभागार में आयोजित की गई, जिसमें जनपद से जुड़े प्रशासनिक, विकासात्मक और जनहित के मुद्दों पर विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति अश्विनी त्यागी ने की। बैठक में समिति के सदस्यगण, जनप्रतिनिधि तथा जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विभिन्न विभागों के कार्यों का मूल्यांकन किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक के दौरान प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता, नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता, यातायात व्यवस्था, अवैध कब्जों पर कार्रवाई, स्मार्ट मीटर समस्याएं तथा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति प्रमुख चर्चा का विषय रही। सभापति ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक कार्यों का अंतिम उद्देश्य आम जनता को राहत देना है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान विधायक संजीव शर्मा ने शहर में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या को प्रमुखता से उठाया और स्थायी समाधान की आवश्यकता बताई। इस पर सभापति अश्विनी त्यागी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जनपद को जाम मुक्त बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सड़कों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए तत्काल प्रभाव से ऐसे सभी अवरोध हटाए जाएं। सभापति ने कहा कि सड़कें आम नागरिकों की सुविधा के लिए होती हैं, न कि अवैध कब्जों के लिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस और विकास प्राधिकरण को संयुक्त अभियान चलाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में समिति के समक्ष प्रस्तुत 67 बिंदुओं की विभागवार समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के एक सहायक अभियंता की पहचान संख्या में तकनीकी त्रुटि के कारण मानव संपदा पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं हो सका था, जिसे सुधारने की प्रक्रिया जारी है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में एक अभियंता को निलंबित किए जाने तथा श्रम विभाग के एक आशुलिपिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूर्ण होने की जानकारी भी समिति को दी गई। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने तथा सभी विभागीय कार्यालयों में जनप्रतिनिधियों के लिए अलग रजिस्टर बनाए जाने की पुष्टि भी बैठक में की गई।

अधिकारियों ने सभी बिंदुओं पर विस्तृत और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किए। सभापति अश्विनी त्यागी के आगमन पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। जनपदीय अधिकारियों ने समिति सदस्यों को पौधा, शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। बैठक में विधान परिषद सदस्य वीरेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र भारद्वाज, श्रीचन्द शर्मा, पवन कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह, विधायक संजीव शर्मा तथा भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल उपस्थित रहे। समिति की ओर से अरुण प्रकाश शर्मा (अनुसचिव), मयंक यादव (समीक्षा अधिकारी), आशीष सिंह (प्रतिवेदक) और अभिनव तिवारी (सहायक समीक्षा अधिकारी) भी मौजूद रहे।

प्रशासनिक अधिकारियों में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़, एडिशनल सीपी केशव कुमार चौधरी, जीडीए उपाध्यक्ष नन्दकिशोर कलाल, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल और डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुन बिशेन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक के अंत में सभापति ने अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जवाबों को संतोषजनक बताते हुए अधिकांश विभागों के कार्यों की सराहना की। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने सभी अतिथियों और समिति सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई और जनहित से जुड़े मुद्दों पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का स्पष्ट संदेश प्रशासन को दिया गया।

भूमाफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश
बैठक में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया गया। सभापति अश्विनी त्यागी ने स्पष्ट कहा कि भूमाफिया आम नागरिकों को भ्रमित कर उनकी जीवनभर की कमाई को जोखिम में डालते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न होने दिया जाए और यदि कहीं कब्जा पाया जाए तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध कॉलोनियों के विकास को शुरुआती चरण में ही रोका जाए, ताकि भविष्य में आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। जनहित और राजस्वहित को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।

स्मार्ट मीटर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस
विद्युत विभाग की समीक्षा करते हुए सभापति ने स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपभोक्ताओं को बिलिंग त्रुटियों या तकनीकी समस्याओं के कारण परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप किया जाए तथा उपभोक्ता हित सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। इसके साथ ही स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभागों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि इन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभापति ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।