तुलसी निकेतन योजना का नया युग: जीडीए और एनबीसीसी के समझौते से शुरू होगा आधुनिक पुनर्विकास

-तुलसी निकेतन योजना का पुनर्विकास होगा पारदर्शी और आधुनिक, निवासियों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं: नंद किशोर कलाल
-जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के नेतृत्व में एमओयू पर हस्ताक्षर, परियोजना में तेजी
-दो चरणों में होगा पुनर्विकास: फैसेबिलिटी स्टडी के बाद तीन साल का निर्माण कार्य
-पीपीपी मॉडल के तहत आर्थिक बोझ से मुक्त होगा प्रोजेक्ट
-2,292 फ्लैट और 60 दुकानें आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षित संरचना के साथ होंगी पुनर्निर्मित
-16 एकड़ क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतें, खेल, हरा-भरा परिसर और सामुदायिक सुविधाएँ
-यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद को नागरिक-केंद्रित शहर के रूप में उभारेगा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की तुलसी निकेतन योजना के भवनों के पुनर्विकास को गति देने के लिए जीडीए और एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड कंपनी के बीच सोमवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम शहर के पुराने और जर्जर भवनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और निवासियों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल, जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह, प्रभारी चीफ इंजीनियर आलोक रंजन और एनबीसीसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने बताया कि तुलसी निकेतन योजना के पुनर्विकास का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण आठ सप्ताह का व्यवहार्यता अध्ययन (फैसेबिलिटी स्टडी) होगा, जिसमें भू-भागों की संरचना, तकनीकी आवश्यकताएँ और निर्माण संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद चयनित क्षेत्रों में तीन वर्षों की विकास अवधि के तहत निर्माण कार्य पूर्ण किया जाएगा। परियोजना में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम एनबीसीसी के साथ-साथ परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करेगा।

उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने स्पष्ट किया कि इस पुनर्विकास परियोजना के लिए जीडीए पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही योजना में रहने वाले आवंटियों पर भी किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं डाला जाएगा। यह पूरी परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित की जाएगी, जिसमें निजी विकासकर्ता नई बहुमंजिला बिल्डिंगों का निर्माण करेंगे और आधुनिक सुविधाओं से लैस करेंगे। तुलसी निकेतन योजना वर्ष 1990 में विकसित की गई थी। इसमें वर्तमान में 2,292 फ्लैट और 60 दुकानें हैं, जिसमें लगभग 20 हजार लोग निवासरत हैं। जीडीए ने सर्वेक्षण में पाया कि योजना के अधिकांश भवन जर्जर और असुरक्षित हैं। इसके चलते योजना में 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी मकानों को आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षित निर्माण मानकों के अनुसार पुनर्विकसित किया जाएगा।

जीडीए निजी विकासकर्ताओं के सहयोग से 16 एकड़ क्षेत्र में नई बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कराएगा। यह परियोजना न केवल तुलसी निकेतन में रहने वालों के जीवन स्तर में अभूतपूर्व सुधार लाएगी, बल्कि शहर में आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास के लिए मार्ग भी प्रशस्त करेगी। नए भवनों में हर तरह की नागरिक सुविधाएँ, हरे-भरे परिसर, खेल और सामुदायिक क्षेत्र शामिल होंगे।

जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने कहा कि तुलसी निकेतन योजना का पुनर्विकास न केवल सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गाजियाबाद को आधुनिक, टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारा लक्ष्य है कि निवासियों को बेहतर जीवन स्तर मिले और शहर का शहरी परिदृश्य आकर्षक व व्यवस्थित बने। एनबीसीसी इंडिया के साथ इस समझौते से हम इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कर पाएंगे। जीडीए का यह कदम गाजियाबाद में सुरक्षित, आधुनिक और संरचित रहने योग्य वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। परियोजना के पूरा होने के बाद तुलसी निकेतन योजना न केवल निवासियों के लिए आधुनिक सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार का माध्यम बनेगी, बल्कि गाजियाबाद के शहरी विकास और शहर की नई पहचान के रूप में भी उभरकर सामने आएगी।