गाजियाबाद में नो हेल्मेट-नो फ्यूल: अमित तिवारी की मुहिम बनी सड़क सुरक्षा की नई ढाल

जिला पूर्ति विभाग की मुहिम, सुरक्षा पहले, पेट्रोल बाद में, अक्सर देखा जाता है कि लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने के लिए गाजियाबाद में नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान को सख्ती से लागू किया गया है।
अब तक यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से ट्रैफिक पुलिस की थी, लेकिन इस बार जिला पूर्ति विभाग ने इसे अपने हाथों में लेकर एक नई मिसाल कायम की है।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। “हेलमेट मजबूरी नहीं, सुरक्षा का कवच है”- इस सोच को व्यवहार में बदलने के लिए गाजियाबाद प्रशासन ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। सड़क हादसों में हर साल बड़ी संख्या में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह दोपहिया चालकों द्वारा हेलमेट न पहनना है। अक्सर देखा जाता है कि लोग ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने के लिए गाजियाबाद में नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान को सख्ती से लागू किया गया है।
अब तक यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से ट्रैफिक पुलिस की थी, लेकिन इस बार जिला पूर्ति विभाग ने इसे अपने हाथों में लेकर एक नई मिसाल कायम की है। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की कमान संभाली है और इसे जन-आंदोलन का रूप देने का बीड़ा उठाया है। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने न केवल इस अभियान का ऐलान किया, बल्कि खुद इसकी निगरानी के लिए मैदान में उतर आए। उन्होंने जिले के सभी 122 पेट्रोल पंप संचालकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना हेलमेट आने वाले किसी भी दोपहिया वाहन चालक को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आदेश दिया है कि बोतल, डिब्बे या किसी अन्य पात्र में पेट्रोल-डीजल बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने पर संबंधित पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अमित तिवारी की यह सख्ती सिर्फ आदेशों तक सीमित नहीं है। उन्होंने विभागीय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में औचक निरीक्षण करें, पंपों पर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करें और नियमों की अनदेखी पाए जाने पर तुरंत रिपोर्ट तैयार करें। गाजियाबाद के जिला पूर्ति विभाग की कार्यशैली इस अभियान में पूरी तरह झलक रही है। पहले पूर्ति विभाग का काम पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और माप-तौल तक ही सीमित माना जाता था। लेकिन इस बार विभाग ने अपनी सक्रिय और जनहितैषी कार्यशैली से सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पंप संचालकों से अपील की गई है कि यदि कोई ग्राहक बिना हेलमेट के पेट्रोल डलवाने आता है तो न केवल उसे तेल देने से मना किया जाए बल्कि उसकी गाड़ी और चालक की फोटो खींचकर संबंधित इंस्पेक्टर या ट्रैफिक पुलिस को भेजी जाए। इस व्यवस्था से न केवल लोगों में जागरूकता बढ़ेगी बल्कि पेट्रोल पंपों पर होने वाले विवाद और झगड़ों पर भी अंकुश लगेगा।

अक्सर देखने में आता है कि जब बिना हेलमेट आए ग्राहकों को पेट्रोल नहीं दिया जाता तो वे पंप कर्मचारियों से उलझ पड़ते हैं। इससे माहौल बिगड़ जाता है और कई बार झगड़े भी हो जाते हैं। लेकिन अब प्रशासन की इस सख्ती से पंप कर्मचारियों को सहारा मिलेगा और वे आत्मविश्वास के साथ नियमों को लागू कर सकेंगे। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सड़क सुरक्षा में हेलमेट सबसे अहम उपकरण है। हादसे के समय यह सिर और मस्तिष्क को गंभीर चोट से बचाता है और जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। ट्रैफिक विभाग लगातार यह संदेश देता रहा है कि हेलमेट पहनना केवल चालान से बचने का उपाय नहीं बल्कि जीवन रक्षा का सबसे मजबूत साधन है।

प्रशासन की दूरदृष्टि
जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने साफ शब्दों में कहा है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि हमारी कोशिश है कि गाजियाबाद में एक भी व्यक्ति केवल लापरवाही के कारण अपनी जान न गंवाए। हेलमेट पहनना सभी की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और अब इसे सख्ती से लागू कराया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान से न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे प्रदेश में जागरूकता का माहौल बनेगा। यदि लोग हेलमेट पहनने के महत्व को समझेंगे तो हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा काफी हद तक घट सकता है।

आने वाले समय की नजीर
गाजियाबाद में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है। सड़क पर नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मुहिम जहां आमजन को जागरूक करेगी, वहीं सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर भी साबित होगी। नो हेल्मेट-नो फ्यूल अभियान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हेलमेट अब मजबूरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। यह केवल नियम नहीं बल्कि जीवन की ढाल है, जिसे हर चालक को अपनाना ही होगा।

अमित तिवारी
जिला पूर्ति अधिकारी

नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान को गाजियाबाद में सख्ती से लागू किया जा रहा है। जिले के सभी 122 पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि बिना हेलमेट आने वाले किसी भी दोपहिया वाहन चालक को पेट्रोल-डीजल न दिया जाए। साथ ही बोतल, डिब्बे या किसी भी अन्य पात्र में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित पंप संचालक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह केवल आदेश भर नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन का रूप देने की पहल है। सभी पंप संचालकों से अपील है कि नियम तोड़ने वालों को न केवल पेट्रोल देने से मना करें बल्कि उनकी गाड़ी और चालक की फोटो लेकर संबंधित ट्रैफिक पुलिस या निरीक्षक को भेजें। इस अभियान का उद्देश्य जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि हेलमेट को मजबूरी नहीं बल्कि जीवन रक्षा का कवच समझा जाए।
अमित तिवारी
जिला पूर्ति अधिकारी