रेरा मामलों में अब जीडीए की होगी सटीक पैरवी

-गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में रेरा एक्ट 2016 से जुड़े प्रशिक्षण का आयोजन
-अधिकारियों को कानूनी जवाबदारी और कार्यप्रणाली की दी गई जानकारी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े वादों और रेरा अधिनियम के तहत दायर मुकदमों की प्रभावी पैरवी को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट, 2016) के अंतर्गत वादों की गहन समझ, उत्तर तैयार करने की तकनीक, और कानूनी प्रक्रिया की सूक्ष्मताओं पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई है। गुरुवार को जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व में जीडीए सभागार में कार्यशाला की शुरुआत हुई। सेंटर फॉर एक्सीलेंस एंड ट्रेनिंग, यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड लखनऊ के सेवानिवृत्त निदेशक राजेश मेहतानी ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया। उन्होंने जीडीए के इंजीनियरों, लिपिकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को रेरा अधिनियम की धाराओं, अधिकारों और दायित्वों पर गहराई से जानकारी दी। राजेश मेहतानी ने बताया कि रेरा में दायर वादों में सफलता के लिए जरूरी है कि उनका सटीक, समयबद्ध और कानूनी रूप से ठोस उत्तर तैयार किया जाए।

उन्होंने बताया कि किस प्रकार वाद पत्रों का विश्लेषण कर उच्च गुणवत्ता वाला उत्तर तैयार किया जाए, जिससे रेरा न्यायाधिकरण के समक्ष प्राधिकरण की स्थिति मजबूत हो। प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया गया कि रेरा के तहत कौन-कौन से अधिकार प्राधिकरण के पास हैं और उसकी सीमाएं क्या हैं। कानूनी दस्तावेजों की भाषा, समयसीमा का पालन और नियमों के अनुरूप तैयारी कैसे की जाए इन सभी विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में ओएसडी कनिका कौशिक, चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और समस्त लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारी उपस्थित रहे।

सभी ने गहन रुचि के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया। जीडीए अधिकारियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में रेरा से जुड़े मामलों में जीडीए की कानूनी स्थिति को मजबूत बनाएगा और आवासीय परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। आज यानि
शुक्रवार को भी जीडीए सभागार में कार्यशाला का दूसरा दिन आयोजित किया जाएगा, जिसमें अधिनियम से जुड़े और भी व्यवहारिक उदाहरणों और केस स्टडीज पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।