निजीकरण के विरोध में हाथ में काला फीता बांध कर अधिकारियों व कर्मचारियों ने जताया विरोध

गाजियाबाद। बिजली के दो डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में सभी ऊर्जा निगमों के बिजली कर्मी और अभियंता मंगलवार को काला फीता बांधकर काम किया और साथ ही निजीकरण के विरोध में जागरुकता अभियान भी चलाया। जिला गाजियाबाद के पदाधिकारियों ने हर सबस्टेशन, खंड कार्यालयों व विद्युत शिकायत केन्द्रों पर जाकर विभाग के निजीकरण से होने वाली हानियों के बारे में संविदा कर्मियों व अधिकारियों के साथ बैठकर चर्चा की व निजीकरण के खिलाफ एकजुटता के साथ लड़ने के लिए लोगों को जागरूक करते हुए आह्वान भी किया। साथ ही साथ अपने कार्य के दौरान गाजियाबाद के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों के साथ मिलकर अपनी बांहों में काला फीता बांधकर निजीकरण का विरोध करते हुए अपना आक्रोश प्रकट किया। संगठन द्वारा निजीकरण के खिलाफ यह जागरूकता अभियान 23 दिसम्बर तक चलाया जाएगा।

जागरूकता अभियान कार्यक्रम में केन्द्रीय पदाधिकारी आशीष कुमार ने बताया बिजली के निजीकरण की आड़ में कंपनियां उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने में जुटी हैं। निजीकरण के चलते इस तरफ किसी का ध्यान ही नहीं है। पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने अनावश्यक तौर पर निजीकरण का निर्णय लेकर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। बिजली कर्मी शांतिपूर्वक बिजली व्यवस्था बेहतर बनाने में लगे थे, लेकिन अब प्रबंधन इसे पटरी से उतारने पर तुला है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का घाटा कम हुआ है और राजस्व में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, फिर भी निजीकरण क्यों किया जा रहा है।

इस दौरान संगठन के सदस्य और पदाधिकारी जनप्रतिनिधियों से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। आम जन को निजीकरण के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेंगे। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने चेतावनी दी है कि उप्र में निजीकरण के बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी होते ही देश भर में लाखों बिजली कर्मी सड़क पर उतरने को विवश होंगे। इस दौरान शमशाद अली, क्षेत्रीय अध्यक्ष फईम उल्वारी, जिलाध्यक्ष राजू सिंह, महामंत्री जितेन्द्र सिंह राणा, जिला सचिव साजिद अली, मीडिया प्रभारी पूरण सिंह, जीतू सिंह, राहुल कुमार, कपिल देव, दीपक कुमार, सतीश कुमार व अन्य पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।