सावन के दूसरे सोमवार को दूधेश्वरधाम में भक्ति का महासागर उमड़ा, हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा गाजियाबाद

-अभूतपूर्व भीड़, अद्वितीय व्यवस्था और आस्था की अपार ऊर्जा का साक्षी बना सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर
-दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा दूधेश्वर के दर्शन, भक्तों की आस्था के समंदर में डूबा पूरा शहर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सोमवार को सावन मास की धार्मिक आभा ने गाजियाबाद को पूरी तरह शिवमय कर दिया। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वरनाथ मठ महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार को आस्था का अभूतपूर्व ज्वार देखने को मिला। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु भगवान दूधेश्वर के दर्शनों और जलाभिषेक हेतु मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर से लेकर घंटाघर तक श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखीं गईं, जिनमें भक्त बड़ी श्रद्धा से “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। मंदिर परिसर पूरी रात और दिनभर भक्ति की ऊर्जा से गुंजायमान रहा। भक्तों ने भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक और दर्शन के बाद मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से भेंटकर उनका आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट रात्रि 12 बजे ही खोल दिए गए थे। इससे पूर्व स्वयं श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने भगवान दूधेश्वर का विधिपूर्वक पूजन और अभिषेक किया। मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों की रेखाएं आगे बढऩे लगीं और रात्रि से ही भक्तों का तांता ऐसा लगा कि सोमवार प्रात: तक मंदिर की कतार घंटाघर तक पहुंच चुकी थी। पूरे मार्ग में शिवभक्तों का उत्साह, अनुशासन और आस्था देखते ही बनती थी।

मंदिर के गर्भगृह में हर घंटे जलाभिषेक हो रहा था, तो वहीं बाहर भक्तों के स्वर गूंजते जा रहे थे। इस विशेष अवसर को और भी पावन बना दिया उस दिन बन रहे शुभ योगों ने। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि सावन के दूसरे सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग एक साथ बन रहे थे, जिससे इस सोमवार का पुण्यफल और आध्यात्मिक महत्व कई गुना अधिक हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव को जलाभिषेक विशेष प्रिय है और सावन के सोमवार को ऐसा करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं, सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भोर में भगवान दूधेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया और दिल्ली द्वारका पुरी स्थित प्राचीन देवी मंदिर के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज द्वारा धूप व दीप आरती की गई। इसके बाद भगवान को 56 व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में पूजा, मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और अनुष्ठानों की दिव्य छटा देखते ही बन रही थी। भक्तों का समर्पण और भगवान के प्रति श्रद्धा इतनी गहरी थी कि घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद किसी के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि आनंद और आस्था का तेज दिखाई दे रहा था।

इस अपार भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं रविवार को मंदिर पहुंचकर भगवान दूधेश्वर का पूजन-अभिषेक किया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मंदिर में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और नगर निगम ने समर्पण भाव से मिलकर इतनी व्यवस्थित, सुव्यवस्थित और अनुशासित व्यवस्था की कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के जलाभिषेक कर सके। श्रद्धालुओं ने मंदिर की व्यवस्था की मुक्त कंठ से सराहना की। देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने एक स्वर में कहा कि इतने विशाल आयोजन में जो अनुशासन, सफाई और सुरक्षा मिली, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। भगवान शिव के इस पावन धाम में आकर सभी को आत्मिक संतोष मिला।

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने अंत में बताया कि मंगलवार को त्रयोदशी है, जिस दिन विशेष ‘हाजरी जल’ अर्पित किया जाएगा। वहीं बुधवार को प्रात: 4 बजे से लेकर रात्रि 2 बजे तक श्रावण की शिवरात्रि का विशेष जलाभिषेक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि वे इस दिव्य अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारें और भगवान दूधेश्वर महादेव की कृपा प्राप्त करें। इस प्रकार सावन के दूसरे सोमवार को गाजियाबाद का दूधेश्वरनाथ मंदिर न केवल भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था, संतों के आशीर्वाद और जनभागीदारी की त्रिवेणी का ऐसा सुंदर उदाहरण बना, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के आदेश पर जिला प्रशासन, पुलिस और निगम ने रचा बेहतरीन व्यवस्था का इतिहास
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि भक्त निश्चित भाव से बाबा के दर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और नगर निगम ने मॉडल व्यवस्था प्रस्तुत की हाईटेक बैरिकेडिंग, महिला व पुरुषों के लिए अलग लाइन, पीने का पानी, मोबाइल शौचालय व मेडिकल सहायता, सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन से निगरानी, 24 घंटे सुरक्षा बल की तैनाती है। मंदिर के मीडिया प्रभारी एस.आर. सुथार ने बताया कि इतनी विशाल भीड़ के बावजूद किसी को कोई असुविधा नहीं हुई। पूरी व्यवस्था अनुशासित, शांतिपूर्ण और भक्तिपूर्ण रही, जो स्वयं मुख्यमंत्री के निर्देशों का परिणाम है। इस वर्ष की भीड़ पिछले सभी वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक रही, लेकिन इसके बावजूद भक्तों को दर्शन व अभिषेक के लिए कहीं भी बाधा नहीं आई। नगर निगम द्वारा सफाई, पेयजल और शौचालय की उत्तम व्यवस्था की गई थी, वहीं पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा, लाइनिंग, आपात सहायता और भीड़ नियंत्रण में अनुकरणीय कार्य हुआ। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से पूरे परिसर की निगरानी की गई जिससे हर गतिविधि पर पैनी नजर बनी रही।

श्रद्धा, सुरक्षा और सेवा का आदर्श उदाहरण बना दूधेश्वरनाथ मंदिर
श्रद्धालुओं ने भी मंदिर की व्यवस्था की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कहा कि इतनी भीड़ में भी ऐसी व्यवस्था मिलना दुर्लभ है। यह सिर्फ प्रशासन की संवेदनशीलता और मंदिर समिति की निष्ठा का प्रमाण है। भक्तों ने मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, दुर्गा सप्तशती पाठ, और भण्डारे में भाग लिया। कई भक्तों ने भगवान से मनोकामना पूर्ण होने पर रुद्राभिषेक और विशेष पूजन भी कराया।