-वेंटिलेशन से आसान होती है नवजात बच्चों की देखभाल: डॉ. दीपिका रस्तोगी
गाजियाबाद। कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सोमवार को एबीजेड ऑफ वेंटिलेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम नवजात और बाल चिकित्सा के विभाग द्वारा आयोजित किया गया। इसमें एओपीजी आईएपी के ट्रांस हिंडन शाखा के सहयोग से शिक्षण प्रदान किया गया। अस्पताल के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर से 60 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन सभी ने नवजात और बाल चिकित्सा वेंटिलेशन में अपने ज्ञान और कौशल को सुधारने के लिए उत्सुक थे। विभिन्न संस्थानों से आए 20 से अधिक प्रतिष्ठित शिक्षकों ने अपनी विशेषज्ञता साझा की और प्रतिनिधियों के साथ संवाद और व्यावहारिक प्रदर्शन किए। यशोदा अस्पताल की नवजात विज्ञान की प्रमुख एवं वरिष्ठ सलाहकार डॉ. दीपिका रुस्तोगी ने कार्यशाला की परिकल्पना और समन्वय किया।
कार्यक्रम में यह सुनिश्चित हुआ कि वेंटिलेशन में नवीनतम प्रथाओं और नवाचारों पर प्रकाश डाला जाए। विशेष रूप से बुनियादी अवधारणाओं पर जोर दिया जाए। इस दौरान इकाई-विशिष्ट एक्सटुबेशन चेकलिस्ट और संक्रमण (वेंटिलेटर-संबंधित न्यूमोनिया-वीएपी) रोकथाम, देखभाल बंडलों पर विशेष जोर दिया गया। इसमें वेंटिलेशन के मूल सिद्धांत, उन्नत वेंटिलेशन रणनीतियां, गैर-आक्रामक वेंंटिलेशन तकनीके, उच्च-आवृत्ति वेंटिलेशन, वेंटिलेटर सेटिंग्स और समायोजन, समस्या निवारण और निगरानी के महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रतिनिधियों के बीच मजबूत किया गया, ताकि वे अपने-अपने यूनिट्स में सर्वोत्तम प्रथाओं को लागू कर सकें।
डॉ. दीपिका रस्तोगी ने बच्चों के उपचार में वेंटिलेशन के इस्तेमाल, इसके विभिन्न तरीके और बच्चों व नवजात शिशुओं में उनकी दिक्कतों एवं उनके लक्षणों की जानकारी दी। कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की एमडी डॉ. उपासना अरोड़ा ने कार्यक्रम की सफलता पर संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम स्वास्थ्य शिक्षा को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारे चिकित्सा पेशेवर नवीनतम ज्ञान और कौशल से सुसज्जित हैं। वेंटिलेशन पर कार्यशाला इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

















