एफएटीएफ से फिर झटका, कंगाली में आटा गीला
नई दिल्ली। गलत करनी का कड़वा फल बार-बार चखने के बावजूद पाकिस्तान सुधर नहीं रहा है। दुनियाभर में आतंकवाद के मसीहा के तौर पर बदनाम पाक को एक बार जोर का झटका लगा है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर आने की पाक की उम्मीदें टूट गई हैं। विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा के बाद एफएटीएफ ने इस देश को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखने का निर्णय लिया है। कोविड-19 (कोरोना वायरस) की वजह से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पडऩे से पहले से बेहाल पाकिस्तान के लिए यह दोहरा झटका माना जा रहा है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की कार्य योजना के 27 लक्ष्यों में से 6 का अनुपालन करने में वह असफल रहा है। यह संस्था आतंकवाद के वित्त पोषण और धन शोधन को रोकने एवं निगरानी करने का काम करती है। संस्था का संचालन पेरिस से होता है। संस्था की डिजिटल माध्यम से आयोजित वार्षिक बैठक में 27 बिंदुओं की कार्य योजना की समीक्षा की गई। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था। संस्था ने इस्लामाबाद को धन शोधन और आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने की 27 बिंदुओं की कार्ययोजना को वर्ष 2019 के अंत तक लागू करने के आदेश दिए थे। कोरोना वायरस के कारण इस मियाद में वृद्धि कर दी गई। कर्ज से दबे पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की कोशिश के तहत अगस्त में 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके नेताओं पर वित्तीय पाबंदी लगाई थी। इनमें मुंबई हमले का सरगना और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद, जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी शामिल है। पाक के ग्रे लिस्ट से बाहर न आने के कारण उसके लिए विश्व मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और यूरोपीय संघ जैसे इंटरनेशन संस्थानों से वित्तीय मदद प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा।
















