-जनपद के सरकारी स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठकें बनी मिसाल
-100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने वाले बच्चों को मिला सम्मान, शिक्षा-समुदाय साझेदारी को मिला नया आयाम
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद के सरकारी विद्यालयों में सोमवार का दिन शिक्षा और सहभागिता की नई तस्वीर लेकर आया। जिले के 446 सरकारी स्कूलों में एक साथ मासिक मॉडल अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) आयोजित की गई। इस अवसर पर कुल 75,089 छात्रों के अभिभावकों को आमंत्रित किया गया और बड़ी संख्या में माताएँ-पिताएँ इन बैठकों में शामिल हुए। अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समुदाय के साझा प्रयास से ही सशक्त होती है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव गोपाल ने इस पहल का नेतृत्व करते हुए गाँधी नगर के कॉम्पोजि़ट विद्यालय में आयोजित बैठक में स्वयं प्रतिभाग किया। उन्होंने अभिभावकों से सीधे संवाद स्थापित करते हुए बच्चों की शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घर और विद्यालय के सामूहिक प्रयास से पूर्ण होती है। हर माह होने वाली इन बैठकों में अभिभावकों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अभिभावक ही वे साझेदार हैं, जो बच्चों की पढ़ाई को गहराई से समझते हैं और घर पर भी बेहतर माहौल उपलब्ध कराते हैं।
सीडीओ ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के शिक्षकों से बातचीत करें, उनकी शिक्षण योजनाओं को समझें और समय-समय पर सुझाव भी साझा करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालय और अभिभावक मिलकर बच्चों के लिए मजबूत आधार तैयार करें। बैठक में वार्ड पार्षद और जिला समन्वयक (सामुदायिक सहभागिता) भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस पहल को सराहते हुए इसे समुदाय को शिक्षा से जोडऩे की अनूठी पहल बताया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ. पी. यादव ने नासिरपुर विद्यालय में आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा राष्ट्र और समाज की प्रगति की नींव है और इसमें अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को नियमित विद्यालय भेजें और घर पर भी उनके अध्ययन पर पूरा ध्यान दें। श्री यादव ने विद्यालय के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत से ही यह संभव हो रहा है कि पीटीएम जैसी बैठकों के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। इस बार की मॉडल पीटीएम का केंद्रीय विषय सहभागिता से निपुणता रखा गया, जो राज्य के स्कूल चलो अभियान से जुड़ा था।
इस विषय के तहत गाजियाबाद के सभी सरकारी विद्यालयों में यह संदेश दिया गया कि जब तक हर बच्चा, विशेष रूप से बेटियाँ, विद्यालय नहीं जाएंगी, तब तक शिक्षा की पूर्णता संभव नहीं है। बैठकों में जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया ताकि सामुदायिक भागीदारी और अधिक मज़बूत हो सके। यह प्रयास शिक्षा को केवल विद्यालय और छात्र तक सीमित न रखकर समाज के हर वर्ग को इससे जोडऩे का काम कर रहा है। बैठक के दौरान विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने पिछले महीनों में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की। यह सम्मान बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणा बना और अन्य विद्यार्थियों को भी विद्यालय में नियमित रूप से आने के लिए उत्साहित किया। साथ ही छात्रों ने अपनी सीखने की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण भी किया, जिसे अभिभावकों और शिक्षकों ने सराहा। इन बैठकों की सफलता का बड़ा कारण उनकी सुनियोजित तैयारी रही। बैठक का एजेंडा छह दिन पहले ही विद्यालयों के साथ साझा कर दिया गया था, जिससे स्कूलों को तैयारी का पर्याप्त समय मिला।
जिला और ब्लॉक टास्क फोर्स के अधिकारियों ने कई विद्यालयों का दौरा कर अभिभावकों से संवाद किया और गूगल फॉर्म के माध्यम से फीडबैक भी एकत्र किया। इस प्रक्रिया ने बैठक की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को और मजबूत किया। गाजियाबाद जनपद में आयोजित यह मॉडल पीटीएम पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इसने अभिभावकों और विद्यालयों के बीच एक मज़बूत सेतु भी निर्मित किया है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सक्रियता ने इस पहल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। निश्चित रूप से यह प्रयास भविष्य में शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता की एक ऐसी मिसाल बनेगा, जिससे न केवल बच्चों की शिक्षा यात्रा सशक्त होगी बल्कि पूरे समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण भी निर्मित होगा।

















