-देशभर से 250 पुनर्वास कर्मियों ने लिया हिस्सा
-विशेषज्ञों ने नई तकनीकों और उपकरणों की उपयोगिता पर किया जोर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भागीरथ सेवा संस्थान द्वारा संचालित कैमकुस कॉलेज ऑफ़ स्पेशल एजुकेशन में सोमवार को एकदिवसीय राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय पुनर्वास परिषद से अनुमोदित था और इसका विषय था दिव्यांगों के लिए सुगमता उपकरण। इस वेबिनार ने दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं, तकनीकी नवाचारों और समाज में उनकी सहभागिता को लेकर नई दिशा प्रदान की।
वेबिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 250 व्यावसायिक पुनर्वास कर्मियों ने सहभागिता की। यह संख्या स्वयं इस बात का प्रमाण बनी कि समाज में दिव्यांगजनों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर जागरूकता कितनी तेजी से बढ़ रही है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नीरज मधुकर, निदेशक सीआरसी, जयपुर, डॉ. संतोष यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग, मैसूर (कर्नाटक), विकास मिश्रा, ओरियंटेशन एंड मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर, सीआरसी लखनऊ तथा नीतू त्यागी, साइकोलॉजिस्ट, कैमकुस कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन ने अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ताओं ने दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुगमता उपकरणों और सहायक तकनीकों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे नये उपकरण दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन को सरल बना सकते हैं और उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर सकते हैं। डॉ. संतोष यादव ने तकनीकी उपकरणों के वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डाला, वहीं श्री नीरज मधुकर ने संस्थागत समर्थन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। विकास मिश्रा ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ओरियंटेशन और मोबिलिटी के महत्व को रेखांकित किया और बताया कि प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ता है। मनोवैज्ञानिक नीतू त्यागी ने दिव्यांगजनों की मानसिक मजबूती और सामाजिक स्वीकृति पर विस्तार से बात की। भागीरथ सेवा संस्थान के निदेशक अमिताभ सुकुल ने कैमकुस कॉलेज की टीम को इस सार्थक आयोजन के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे वेबिनार न केवल दिव्यांगजन की पुनर्वास यात्रा को सरल बनाते हैं बल्कि समाज में सकारात्मक जागरूकता और संवेदनशीलता का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सुगमता केवल एक अधिकार नहीं बल्कि हर दिव्यांग व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की आधारशिला है। जागरूकता से ही समस्या का समाधान संभव है। कार्यक्रम का निष्कर्ष इस संदेश के साथ हुआ कि तकनीक और संवेदनशीलता के मेल से ही दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। कैमकुस कॉलेज द्वारा उठाया गया यह कदम निश्चित ही दिव्यांगजनों के जीवन को सशक्त और सुगम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

















