नववर्ष 2026 में बन रहे दुर्लभ धार्मिक संयोग, व्रत-पूजन से खुलेगा सौभाग्य का द्वार

-पुत्रदा एकादशी, कूर्म-नारायण द्वादशी और गुरु प्रदोष व्रत से वर्षांत और नववर्ष होंगे विशेष

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। वर्ष 2025 का समापन और नववर्ष 2026 का आगमन इस बार विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय संयोगों के साथ हो रहा है। श्री शिव हनुमत धाम कष्ट निवारण धाम के अध्यक्ष आचार्य पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री महाराज के अनुसार वर्ष के अंतिम और नए वर्ष के प्रारंभिक दिन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी सिद्ध होंगे। आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि 30 दिसंबर को पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी का व्रत पड़ेगा। इस दिन साधु-सन्यासी, वैष्णव समाज के लोग और गृहस्थजन एक साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करेंगे। पुत्रदा एकादशी संतान सुख, परिवार की समृद्धि और वंश वृद्धि के लिए विशेष मानी जाती है। इसके अगले दिन 31 दिसंबर को एकादशी का पारण किया जाएगा। इसी दिन कूर्म द्वादशी और नारायण द्वादशी का भी शुभ योग रहेगा, जिससे वर्ष 2025 का अंतिम दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाएगा।

आचार्य ने आगे बताया कि नववर्ष 2026 का पहला दिन भी अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है। एक जनवरी 2026, गुरुवार के दिन पौष शुक्ल त्रयोदशी तिथि में प्रदोष व्रत का उत्तम योग बन रहा है, जिसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि नववर्ष के पहले दिन गुरु प्रदोष व्रत में विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की बड़ी-से-बड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

गुरु दोष की शांति से व्यक्ति के ज्ञान, विवेक और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही धन लाभ, विवाह, संतान सुख और करियर में उन्नति के योग मजबूत होते हैं। आचार्य पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री महाराज के अनुसार प्रदोष व्रत के प्रभाव से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं, संतान प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं, आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है और नौकरी-व्यवसाय में आ रही रुकावटों का निवारण संभव होता है। ऐसे में वर्षांत और नववर्ष की यह दुर्लभ तिथियां श्रद्धालुओं के लिए आस्था, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का विशेष अवसर प्रदान करेंगी।