पुलिसिंग जो दिखे, असर जो टिके: नगर जोन में लूट 52% और चेन स्नैचिंग 29.3% घटी, धवल जायसवाल की रणनीति लाई रंग

-बीएनएसएस की धारा-129 के सख्त इस्तेमाल से अपराधियों में खौफ, सक्रिय निगरानी और जनसहयोग से बदला अपराध का ग्राफ

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कमिश्नरेट पुलिस की निवारक रणनीति अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-129 के प्रभावी और व्यापक इस्तेमाल से नगर जोन क्षेत्र में संपत्ति संबंधी अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की अगुवाई में अपनाई गई सख्त, सुनियोजित और जन-केंद्रित पुलिसिंग का परिणाम है कि वर्ष 2025 में लूट की घटनाओं में 52 प्रतिशत और चेन स्नैचिंग की वारदातों में 29.3 प्रतिशत की कमी आई है। यह उपलब्धि न सिर्फ आंकड़ों में दर्ज हुई है, बल्कि आमजन के भरोसे और सुरक्षा की भावना में भी साफ दिखाई दे रही है।
पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ के निर्देशन में नगर जोन में जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच अपराध रोकथाम को प्राथमिकता बनाकर बीएनएसएस की धारा-129 के तहत अभूतपूर्व कार्रवाई की गई। जहां वर्ष 2024 में इस धारा के तहत मात्र पांच व्यक्तियों पर कार्रवाई हुई थी, वहीं वर्ष 2025 में एक जनवरी से सात दिसंबर तक 1367 अपराधियों और संदिग्धों को पाबंद किया गया।

इस निवारक कदम ने अपराध होने से पहले ही उस पर अंकुश लगाने का काम किया। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल का मानना है कि संपत्ति से जुड़े अपराध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी, विश्वास और सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ निवारक कानूनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया। धारा-129 के तहत ऐसे आदतन अपराधियों की पहचान की गई, जिनका आपराधिक इतिहास रहा है या जिनसे भविष्य में अपराध की आशंका थी। उन्हें शांति और सदाचार बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया, जमानत और मुचलके भरवाए गए तथा लगातार निगरानी में रखा गया।

अपराध के आंकड़े इस रणनीति की सफलता की गवाही देते हैं। नगर जोन में वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में लूट की घटनाएं 25 से घटकर 12 रह गईं। चेन स्नैचिंग की 150 वारदातें घटकर 106 पर आ गईं। घरों में चोरी और लूट के मामलों में 34.74 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि अन्य चोरी की घटनाओं में 27.16 प्रतिशत की गिरावट आई। वाहन चोरी के मामलों में भी 2.82 प्रतिशत की कमी दर्ज होना यह दर्शाता है कि पुलिस की सक्रिय मौजूदगी और निगरानी का असर हर स्तर पर पड़ा है।

धवल जायसवाल की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पुलिसिंग को सिर्फ थानों तक सीमित नहीं रखा। बीट स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत किया गया, रात्रि गश्त और बीट पेट्रोलिंग बढ़ाई गई और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की दृश्यता सुनिश्चित की गई। बाजारों, आवासीय कॉलोनियों, परिवहन केंद्रों और अपराध प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती गई। इसके साथ ही आरडब्ल्यूए, बाजार समितियों और स्थानीय नागरिकों के साथ निरंतर संवाद कायम किया गया, जिससे पुलिस और जनता के बीच भरोसे की दीवार और मजबूत हुई।

बीएनएसएस की धारा-129 को लेकर डीसीपी सिटी का दृष्टिकोण स्पष्ट है। उनका कहना है कि इस धारा का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि अपराध को जन्म लेने से पहले रोकना है। यह पुलिस और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को समय रहते हस्तक्षेप करने का अधिकार देती है, ताकि सार्वजनिक शांति और संपत्ति को खतरे में डालने वाले तत्वों पर नियंत्रण किया जा सके। इस धारा के तहत की गई कार्रवाई से अपराधियों में निरोधक प्रभाव पैदा हुआ और उन्होंने आपराधिक गतिविधियों से दूरी बनानी शुरू की।

धवल जायसवाल की कार्यशैली में सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन साफ नजर आता है। एक ओर जहां अपराधियों के खिलाफ कानून का कठोर इस्तेमाल किया गया, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को भरोसा दिलाया गया कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए हर समय तत्पर है। यही कारण है कि नगर जोन में सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है और लोग खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

धवल जायसवाल
डीसीपी सिटी

डीसीपी सिटी धवल जायसवाल का कहना है कि कमिश्नरेट पुलिस अपराध मुक्त और सुरक्षित वातावरण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। धारा-129 के तहत मिली सफलता इस बात का प्रमाण है कि सक्रिय, उत्तरदायी और जन-केंद्रित पुलिसिंग से अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। भविष्य में भी इस अभियान को लगातार जारी रखा जाएगा और समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी, ताकि अपराधों में स्थायी कमी लाई जा सके। पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना समय पर पुलिस को दें, ताकि कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।