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विकसित भारत-2047 को लेकर भव्य संगोष्ठी का हुआ आयोजन
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युवाओं और सरकार का सहयोग ही भविष्य की नींव
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भव्य संगोष्ठी में पूर्व आईएएस नरेंद्र भूषण ने साझा किया दृष्टिकोण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विकसित भारत 2047 की दिशा में प्रेरक पहल के तहत आयोजित भव्य संगोष्ठी में देश के भविष्य को आकार देने के लिए युवाओं और सरकार की भागीदारी को अहम बताया गया। मंगलवार को दिल्ली-मेरठ मार्ग मुरादनगर स्थित केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के सभागार में यह संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद और बीटेक व एमबीए के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस कार्यक्रम में लोहियानगर स्थित हिंदी भवन में भी समानांतर सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ आईएएस नरेंद्र भूषण और जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने किया। जिलाधिकारी ने छात्रों को भारत के भविष्य का ध्वजवाहक बताते हुए प्रेरित किया। पूर्व आईएएस नरेंद्र भूषण ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि यह जन-सरकार सहयोग से ही साकार हो सकता है। उन्होंने युवाओं के सामने ‘इननोवेशन व्हील की अवधारणा प्रस्तुत की और कहा कि मानव सभ्यता में तकनीकी आविष्कार जैसे पहिए और आग की खोज ने समाज को बदल दिया। उसी तरह आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों का प्रभाव दुनिया की दिशा तय कर रहा है।
भविष्य की दृष्टि से उन्होंने कहा कि यदि भारत और उत्तर प्रदेश इस तकनीकी क्रांति में अग्रणी बने, तो वर्ष 2047 तक हम वैश्विक नेतृत्व कर सकते हैं। एडवांस टेक्नोलॉजी, ऊर्जा स्रोतों में बदलाव और हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण आने वाले वर्षों में विकास के सबसे बड़े आधार होंगे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों पर कार्य करें, क्योंकि यही क्षेत्र विकसित उत्तर प्रदेश-2047 की दिशा तय करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है, जो पूरे भारत के विकसित भारत-2047 के सपने की मजबूत नींव बनेगा। कार्यक्रम का पहला मुख्य सत्र डॉ. आदेश पांडेय, निदेशक अकादमिक, केआईईटी द्वारा संचालित किया गया। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और विकसित भारत 2047 विषय पर विचार रखते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अवसर और चुनौतियों पर प्रकाश डाला और छात्रों को डिजिटल और ब्लेंडेड लर्निंग अपनाने, उद्योग-अकादमिक साझेदारी मजबूत करने और व्यावसायिक प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। डॉ. सौरव कुमार ने विकसित उत्तर प्रदेश 2047 विषय पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि उत्तर प्रदेश में 228 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिन्होंने अब तक 500 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व और 28 करोड़ रुपए से अधिक का निजी निवेश अर्जित किया है। विशेष अतिथि पूर्व निदेशक कृषि विभाग डॉ.जितेन्द्र कुमार तोमर ने शिक्षा, कृषि और खाद्य सुरक्षा को विकसित भारत 2047 के तीन अनिवार्य स्तंभ बताए। उन्होंने युवाओं को नई कृषि तकनीकों, ऑर्गेनिक खेती और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में शोध और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया। पूर्व मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने विकसित भारत 2047 की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2047 तक विश्व मंच पर अग्रणी स्थान प्राप्त करना है।
उन्होंने युवाओं की भूमिका को इस लक्ष्य की सबसे महत्वपूर्ण धुरी बताया और कहा कि नीतियां तभी सफल होंगी जब उनमें युवा वर्ग के विचार और सुझाव शामिल किए जाएं। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने नवाचारी और व्यवहारिक सुझाव समर्थ पोर्टल पर साझा करें और राष्ट्रीय पहल में सक्रिय रूप से भाग लें। आईएएस नरेंद्र भूषण ने युवाओं को ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों पर कार्य करने की सलाह दी और कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश को वैश्विक नेतृत्व देने के लिए युवाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होंगी जब युवा अपने नवाचारी और व्यवहारिक सुझावों के माध्यम से विकास में योगदान दें।
समापन सत्र में केआईईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. मनोज गोयल ने कहा कि संस्थान विकसित भारत 2047 की दृष्टि को साकार करने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया। सभागार राष्ट्र निर्माण के संकल्प से गूंज उठा और यह आयोजन छात्रों में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करने में सफल रहा।

















