सेंट टेरेसा स्कूल में डिजिटल अनुशासन का संदेश, ‘मोबाइल से दूरी’ पर प्रेरक पहल

-साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की दी जानकारी
-विद्यार्थियों ने सवाल पूछकर जानी सफलता और समय प्रबंधन की कुंजी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सेंट टेरेसा स्कूल में विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और संतुलित जीवनशैली अपनाने के उद्देश्य से शनिवार को एक प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय  ‘मोबाइल से दूरी, जीवन में संतुलन’ रहा, जिसमें बच्चों को तकनीक के सही, सीमित और जिम्मेदार उपयोग का महत्व समझाया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के पूर्व पार्षद डॉ. मनोज गोयल, थाना प्रभारी अजय शर्मा, विप्रो के सीनियर मैनेजर शिव शंकर उपाध्याय तथा विद्यालय के चेयरपर्सन राजा रमन खन्ना विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को मोबाइल के अनियंत्रित उपयोग से होने वाली शारीरिक, मानसिक और सामाजिक समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. मनोज गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि मोबाइल आज के युग में एक उपयोगी साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक प्रयोग बच्चों के स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को खेलकूद, पुस्तक पठन, परिवार के साथ समय बिताने और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। थाना प्रभारी अजय शर्मा ने साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन सावधानियों पर विशेष जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करते समय व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देनी चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। शिव शंकर उपाध्याय ने विद्यार्थियों को तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, समय प्रबंधन सीखने और परीक्षाओं के दौरान मोबाइल से दूरी बनाकर अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए अनुशासन और संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और अतिथियों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यालय प्रशासन की ओर से चेयरपर्सन राजा रमन खन्ना ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं और भविष्य में भी समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि उन्हें संतुलित, सुरक्षित और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान कर गया।