-नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने श्रमिकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, शेष पदों के सृजन हेतु शासन को भेजा गया प्रस्ताव
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम गाजियाबाद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। निगम ने उद्यान विभाग के 36 माली श्रमिकों का विनियमितिकरण करते हुए उन्हें स्थायी रूप से निगम सेवा में शामिल कर लिया है। गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने सभी विनियमित माली श्रमिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, प्रभारी उद्यान डॉ. अनुज कुमार सिंह, तथा नगर निगम कर्मचारी संघ अध्यक्ष अनुराग नगर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने मालियों को बधाई देते हुए कहा कि आप लोग शहर की सुंदरता और स्वच्छता के असली प्रहरी हैं। अब जब आपको स्थायी दर्जा प्राप्त हुआ है, तो निगम हित और नगर हित में और अधिक समर्पण से कार्य करें।
उन्होंने कहा कि नगर निगम सदैव अपने कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह विनियमितिकरण प्रक्रिया लंबे समय से प्रतीक्षित थी, जिसे अब साकार किया गया है। नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम के 73 माली श्रमिकों का मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें निगम के पक्ष में निर्णय आया। न्यायालय के आदेश के अनुसार वर्तमान में निगम में उपलब्ध 36 स्थायी पदों पर 36 माली श्रमिकों का विनियमितिकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि शेष माली श्रमिकों के लिए नए पद सृजन हेतु शासन को पत्र भेजा जा चुका है, और जैसे ही शासन से स्वीकृति प्राप्त होगी, अन्य श्रमिकों का भी विनियमितिकरण कर दिया जाएगा। नगर आयुक्त ने कहा कि 16 जुलाई 2005 से नियमितिकरण प्रक्रिया चल रही है, और शासन की स्वीकृति के पश्चात शेष कर्मचारियों को भी न्याय मिलेगा।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन माली श्रमिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं, उनकी वेतन भुगतान एवं अन्य सुविधाओं से संबंधित सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण की जाएं। इस अवसर पर नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले माली श्रमिकों के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। उन्होंने महापौर एवं नगर आयुक्त का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद हमें हमारा हक मिला है। अब हम निगम की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि शासन और प्रशासन दोनों ही स्तरों पर पारदर्शिता और न्याय की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि निगम का उद्देश्य केवल विकास कार्य कराना नहीं बल्कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना भी है।
कार्यक्रम के समापन पर नगर आयुक्त ने उद्यान विभाग को शहर में हरियाली बढ़ाने, सार्वजनिक पार्कों की सौंदर्यवृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर की सुंदरता मालियों की मेहनत से ही संभव है। इसलिए अब जब यह टीम स्थायी रूप से निगम का हिस्सा बन गई है, तो गाजियाबाद को हरा-भरा और आकर्षक बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाए जाएंगे। नगर निगम का यह निर्णय कर्मचारियों के हक में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल न्यायिक आदेश के अनुपालन का प्रतीक है बल्कि निगम की संवेदनशीलता और पारदर्शिता की मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
















