-सात सदस्यों समेत दर्जनों फर्जी दस्तावेज बरामद, हाईप्रोफाइल अपराधियों के भी जुड़े मामले उजागर
-क्राइम ब्रांच प्रभारी की टीम ने आरडीसी क्षेत्र में धांधली के स्रोत पर मारा छापा, करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले की क्राइम ब्रांच और थाना कविनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित और खतरनाक फर्जी जमानत गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो वर्षों से जेल में बंद आरोपियों को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से जमानत दिलाने का बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के सात सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में फर्जी आधार कार्ड, खतौनियां, बेल बॉन्ड, रसीदी टिकट, नकली मोहरें और अन्य आपराधिक दस्तावेज जब्त किए हैं। यह गिरोह न केवल स्थानीय अपराधियों बल्कि हाईप्रोफाइल मामलों के अपराधियों के लिए भी फर्जी जमानतें कराता रहा है। क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी और थाना कविनगर की संयुक्त टीम ने आरडीसी क्षेत्र में चल रहे इस गुप्त नेटवर्क पर छापा मार कर बड़ी सफलता हासिल की।
पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना अनोज यादव, जो पहले नोएडा में नौकरी करता था, कोविड महामारी के दौरान अपनी नौकरी खोने के बाद इस काला कारोबार में शामिल हो गया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर जेल में बंद आरोपियों से संपर्क साधा, जो स्वयं के लिए जमानतदार नहीं ढूंढ पा रहे थे। इसके बदले वे आरोपियों से 5 से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेकर 20 से 50 हजार रुपये की जमानत राशि के लिए फर्जी दस्तावेज बनाते थे। गिरोह की चालाकी इतनी थी कि वे ऑनलाइन भूलेख पोर्टल से खतौनी निकालते, फिर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर फोटो बदलकर फर्जी आधार कार्ड तैयार करते और नकली मोहरों के जरिए बेल बॉन्ड, रसीदी टिकट सहित सारे दस्तावेज न्यायालय में जमा कर देते थे। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह अब तक लगभग 600 से 700 फर्जी जमानतें करा चुका है, जिनमें कई ऐसे भी मामले शामिल हैं जो हाईप्रोफाइल अपराधियों से जुड़े हैं।
एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि इस गिरोह की गिरफ्तारी जिले में कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने क्राइम ब्रांच प्रभारी और उनकी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि गिरोह का यह नेटवर्क वर्षों से चल रहा था, जिसे खत्म करना हमारी प्राथमिकता थी। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य आरोपितों की भी शीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी। क्राइम ब्रांच प्रभारी अभिद्र सिद्दीकी ने बताया कि इस गिरोह ने न केवल फर्जी ज़मानत कराकर न्याय व्यवस्था को चोट पहुंचाई है, बल्कि अपराधियों को बचाने में भी सहायता की है, जिससे अपराध की दर बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब पुलिस इस तरह के काले कारोबार पर कड़ी नजर रखेगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई जिले में न्यायपालिका और पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एक मिसाल साबित होगी। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि वे किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या फर्जी दस्तावेजों के बारे में जानकारी रखते हों तो तत्काल पुलिस को सूचित करें ताकि इस तरह के काले धंधे को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। अनोज यादव (मेरठ), इसरार (डासना), बबलू व लोकेन्द्र (मोदीनगर), राहुल शर्मा (घूकना), सुनील कुमार (मोदीनगर/बागपत) और विकास राजपूत उर्फ सम्राट (लखीमपुर खीरी/राजनगर)। इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद हुए हैं जो इस गिरोह की साजिशों को बयां करते हैं। क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई जिला पुलिस के समर्पित प्रयासों और तकनीकी जांच का परिणाम है, जिसने अपराधियों के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

















