कम जनशक्ति, सीमित संसाधन और कई चुनौतियों के बावजूद आबकारी विभाग ने ना केवल लक्ष्य को पीछे छोड़ा बल्कि माफिया तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर मिसाल कायम की। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर खड़ा लौह प्रहरी, गौतमबुद्ध नगर बना शराब माफियाओं की कब्रगाह है। प्रशासनिक दक्षता, रणनीतिक सोच और अनुशासित नेतृत्व की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने विभाग को नए आयामों तक पहुंचाया है। उनके कुशल नेतृत्व में ना केवल राजस्व में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर ऐसी चोट की गई है जिससे माफिया तंत्र पूरी तरह बिखर चुका है। गौतमबुद्ध नगर की भौगोलिक स्थिति इसे शराब तस्करों के लिए आकर्षण का केंद्र बना देती है। दिल्ली और हरियाणा से सटा यह जिला लंबे समय से शराब की तस्करी के लिए जाना जाता रहा है। हरियाणा की सस्ती शराब को गौतमबुद्ध नगर में खपाने की एक संगठित व्यवस्था वर्षों से सक्रिय थी, लेकिन इस काले कारोबार की कमर तोड़ दी गई है।
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जनपद में आबकारी विभाग के अधिकारियों ने एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज न केवल जिले में बल्कि पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। सीमित संसाधनों, कम जनशक्ति और ढेरों चुनौतियों के बीच आबकारी विभाग के अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने वह कर दिखाया है, जो अक्सर केवल आदर्श के रूप में किताबों में पढ़ा जाता है। प्रशासनिक दक्षता, रणनीतिक सोच और अनुशासित नेतृत्व की मिसाल पेश करते हुए उन्होंने विभाग को नए आयामों तक पहुंचाया है। उनके कुशल नेतृत्व में ना केवल राजस्व में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर ऐसी चोट की गई है जिससे माफिया तंत्र पूरी तरह बिखर चुका है। गौतमबुद्ध नगर की भौगोलिक स्थिति इसे शराब तस्करों के लिए आकर्षण का केंद्र बना देती है। दिल्ली और हरियाणा से सटा यह जिला लंबे समय से शराब की तस्करी के लिए जाना जाता रहा है। हरियाणा की सस्ती शराब को गौतमबुद्ध नगर में खपाने की एक संगठित व्यवस्था वर्षों से सक्रिय थी, लेकिन इस काले कारोबार की कमर तोड़ दी गई है।
आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने अपने तजुर्बे और योजनाबद्ध कार्यशैली से जिले को शराब माफिया के कब्जे से लगभग मुक्त कर दिया है। उनकी अगुवाई में जो ठोस और आक्रामक रणनीतियाँ अपनाई गईं, उसने माफिया तंत्र को कमजोर ही नहीं किया बल्कि पूरी तरह से हाशिये पर ला दिया। शराब माफिया के खिलाफ जिस सघनता से अभियान चलाया गया, उसने अवैध सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। होटल, बार, ढाबों और सीमावर्ती इलाकों में की गई छापेमारी ने न सिर्फ माफिया नेटवर्क को तोड़ा, बल्कि आम जनता में भी भरोसा पैदा किया कि कानून व्यवस्था मजबूत हाथों में है। आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव की रणनीति का सबसे सशक्त पहलू यह है कि वह सिर्फ कार्रवाई नहीं करते, बल्कि हर कार्रवाई के पीछे एक ठोस सूचना तंत्र, टीम वर्क और तकनीकी मदद होती है। उनकी टीम हर सूचना को गंभीरता से लेती है, उसका विश्लेषण करती है और फिर सटीक समय पर त्वरित प्रतिक्रिया देती है।
आबकारी अधिकारी के दो वर्षों का कमाल है कि जिले में अब सिर्फ राजस्व में बढोत्तरी हो रही है।
गौतमबुद्ध नगर जिले को अब ऐसा मॉडल बनाया जा चुका है जहां सीमित संसाधनों के बावजूद परिणाम असाधारण हैं। सिर्फ 35 लोगों की टीम के बल पर पूरे जिले को न सिर्फ संभालना बल्कि माफिया विरोधी अभियान को अंजाम तक पहुंचाना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं। शराब दुकानों के पुनर्गठन में भी सुबोध श्रीवास्तव की सोच साफ झलकती है। शासनादेश के अनुसार बीयर की दुकानों को अंग्रेजी शराब दुकानों से जोड़कर कम्पोजिट नाम दिया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और अवैध विक्रय पर लगाम लगी। गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की यह सफलता केवल एक विभागीय उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस प्रशासनिक सोच और ईमानदार नेतृत्व का परिणाम है जिसकी आज हर जिले को आवश्यकता है।
सुबोध श्रीवास्तव ने यह साबित किया है कि जब नेतृत्व में नीयत साफ हो, नीति सटीक हो और टीम समर्पित हो, तो सबसे मुश्किल लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं। उनकी कार्यशैली, निर्णय क्षमता और विजन ने गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक आदर्श मॉडल बना दिया है। यह केवल एक अधिकारी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस संकल्प और समर्पण की गाथा है जो एक बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखती है। सुबोध कुमार श्रीवास्तव और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और कर्तव्यनिष्ठा हो, तो कम संसाधनों में भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। राजस्व अर्जन में रिकॉर्ड, तस्करों पर शिकंजा और जनता की सुरक्षा यह ट्रिपल अटैक नीति गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश के बाकी जिलों से अलग पहचान दे रही है। और इसके केंद्र में हैं सुबोध श्रीवास्तव और उनकी ‘अनस्टॉपेबल टीम’।
2023-24 और 2024-25: दो वर्षों में बदला पूरा परिदृश्य
जहां अधिकतर विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में ही संघर्ष करते नजर आते हैं, वहीं सुबोध श्रीवास्तव की टीम ने लक्ष्य से कहीं अधिक प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि जब मंशा साफ हो और रणनीति सटीक हो, तो असंभव जैसा कुछ नहीं होता। वर्ष 2023-24 में विभाग ने जहां 1735 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, वहीं 2024-25 में 1933 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हैरान कर दिया। ये आंकड़े केवल धनराशि नहीं, बल्कि उस कर्मठता और दक्षता के प्रमाण हैं, जो विभाग के हर अधिकारी और सिपाही ने अपने पसीने से अर्जित की है।
तीन माह में ही हासिल कर लिया टारगेट से 20 करोड़ अधिक राजस्व
1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 तक के मात्र तीन माह में विभाग को 605 करोड़ प्रतिमाह के लक्ष्य के विरुद्ध 625 करोड़ प्रतिमाह की वसूली कर दिखाई गई। यानी तीन माह में 20 करोड़ अतिरिक्त, जो कि 28 प्रतिशत अतिरिक्त राजस्व वृद्धि है। यह उपलब्धि केवल आर्थिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रबंधन की भी विजयगाथा है।
जहां माफिया करते थे तांडव, वहां बना कानून का किला
गौतमबुद्ध नगर कभी शराब माफियाओं का गढ़ माना जाता था। हरियाणा व दिल्ली से आने वाली अवैध शराब की तस्करी इतनी सुनियोजित थी कि कभी रोक पाना असंभव प्रतीत होता था। लेकिन आज वह पूरा तंत्र बिखर चुका है। सुबोध श्रीवास्तव की रणनीति ‘घेरेबंदी, सूचना और सटीक कार्रवाई’ पर आधारित रही। उन्होंने जिले की सीमाओं को चक्रव्यूह की तरह सील कर दिया। हाईवे से लेकर गांवों तक, शहर से लेकर रेस्टोरेंट-बार तक, हर जगह सतर्क निगरानी और इंटेलिजेंस पर आधारित छापेमारी ने माफियाओं को खदेड़ दिया।
अधिकारी नहीं, ‘फील्ड कमांडर’ हैं सुबोध श्रीवास्तव
सुबोध श्रीवास्तव सिर्फ कुर्सी पर बैठने वाले अधिकारी नहीं हैं। वह एक फील्ड कमांडर की तरह हर ऑपरेशन की निगरानी करते हैं। टीम को मोटिवेट करना, हर सूचना पर खुद नजर रखना, जमीनी हकीकत को समझना और फिर सटीक रणनीति तैयार करना यह उनकी कार्यशैली का मूल है। उनकी टीम में कार्यरत सात प्रमुख आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही, अखिलेश बिहारी वर्मा, नामवर सिंह, सचिन त्रिपाठी और संजय चंद्र भी उनकी सोच को आगे बढ़ाते हुए दिन-रात कार्रवाई में जुटे रहते हैं।
ऑकेजनल बार लाइसेंस: जहां नियंत्रण के साथ राजस्व भी बढ़ा
आबकारी विभाग का ध्यान अवैध शराब के साथ-साथ उसके स्रोतों पर भी केंद्रित रहा है। ऑकेजनल बार लाइसेंस के माध्यम से न केवल अवैध शराब पार्टियों पर रोक लगी, बल्कि हर होटल, बार और रेस्टोरेंट से अधिक राजस्व की प्राप्ति भी हुई। इससे न केवल शराब के दुरुपयोग पर नियंत्रण हुआ, बल्कि विभाग को नई आय का स्रोत भी मिला।
तकनीक और टीम वर्क की मिसाल
आबकारी विभाग अब पुराने तौर-तरीकों पर नहीं चल रहा। सुबोध श्रीवास्तव के नेतृत्व में विभाग ने डिजिटल ट्रैकिंग, ड्रोन मॉनिटरिंग, व्हाट्सऐप इंटेलिजेंस ग्रुप और जीआईएस बेस्ड लोकेशन सिस्टम जैसे आधुनिक उपायों को अपनाकर पूरे जिले को नियंत्रण में लिया है। टीम वर्क, समर्पण और अनुशासन के त्रिकोण पर खड़ा यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए एक टेम्पलेट बन चुका है।
शराब की दीवानगी बनी राजस्व की सीढ़ी
गौतमबुद्ध नगर में शराब प्रेमियों की कोई कमी नहीं। विभाग ने इस मांग को अवसर में बदलते हुए जिले में 500 दुकानों से बिक्री को नियंत्रित और पारदर्शी बना दिया है। 234 देशी, 239 कम्पोजिट और 27 मॉडल शॉप्स मिलाकर यह संख्या पहले 570 थी, लेकिन अब इसे शासनादेश के तहत पुनर्गठित कर संतुलित किया गया है। बीयर दुकानों को अंग्रेजी शराब दुकानों से जोड़कर कम्पोजिट नाम दिया गया है, जिससे व्यावसायिक पारदर्शिता बनी है और अवैध बिक्री की संभावना कम हुई है। यही कारण है कि विभाग प्रतिमाह करीब 7 करोड़ की लक्ष्यबद्ध वसूली कर रहा है।
साल-दर-साल कार्रवाई का ग्राफ चढ़ता गया, माफिया भागते रहे
2023-24 की कार्रवाई:
374 तस्कर गिरफ्तार
58,915 लीटर शराब जब्त, जिसमें से 22,657 लीटर बाहरी राज्यों की थी।
27 वाहन सीज
कुल जब्त शराब की कीमत: 1.76 करोड़
2024-25 (अब तक):
295 तस्कर गिरफ्तार
48,360 लीटर शराब जब्त, जिनमें मात्र 3,725 लीटर ही बाहरी राज्यों की।
33 वाहन सीज
जब्त शराब की कीमत: 1.45 करोड़
हमारा लक्ष्य सिर्फ राजस्व नहीं, जनविश्वास और सुरक्षा भी है

जिला आबकारी अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
गौतमबुद्ध नगर एक संवेदनशील जिला है, जहां दिल्ली और हरियाणा की सीमाएं होने के कारण शराब की तस्करी की संभावनाएं अधिक रहती हैं। लेकिन हमने ठान लिया था कि इस जिले को अवैध शराब से मुक्त कराए बिना चैन से नहीं बैठेंगे। हमारी टीम ने सीमित संसाधनों और जनशक्ति के बावजूद रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है और अवैध कारोबार पर करारा प्रहार किया है। यह उपलब्धि मेरी नहीं, पूरी टीम की है जो दिन-रात बिना थके, बिना रुके, जनता और सरकार दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा रही है।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव,
जिला आबकारी अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर





















