हरनंदीपुरम बनेगा गाजियाबाद का नया गौरव, जीडीए के नाम हुई 5 हेक्टेयर भूमि

-गांव की ज़मीन पर उगेंगे सपनों के मकान, शुरू हुआ भविष्य का निर्माण
-जीडीए के पक्ष में हुए 37 बैनामे, 32 करोड़ का भुगतान कर बनाई विकास की राह

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की महत्वाकांक्षी हरनंदीपुरम आवासीय योजना अब तेज रफ्तार पकड़ रही है। किसानों की सहमति और प्रशासन की सक्रियता के चलते जीडीए ने 5 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 37 बैनामे अपने पक्ष में करा लिए हैं। इन बैनामों के एवज में किसानों को लगभग 32 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस परियोजना की नींव विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए रखी जा रही है, जिसमें किसानों को भी भागीदार बनाकर उन्हें समृद्धि की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स की निगरानी और नेतृत्व में हरनंदीपुरम योजना को लेकर जो दृष्टिकोण अपनाया गया है, उसने प्रशासन और किसानों के बीच की दूरियों को खत्म किया है। अब किसान खुद आगे बढ़कर प्राधिकरण को भूमि दे रहे हैं। यह पारदर्शिता और विश्वास का परिणाम है।

योजना के तहत सिर्फ एक रिहायशी कॉलोनी नहीं बन रही, बल्कि गाजियाबाद के नक्शे पर एक नया शहर उभरने की तैयारी है। जीडीए इस योजना में आधुनिक सुविधाओं, हरियाली से युक्त वातावरण और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा कर रहा है, जिससे न केवल निवासियों को एक बेहतर जीवनशैली मिलेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में और भी कई किसानों से बैनामे कराए जाएंगे। जिला प्रशासन और जीडीए की संयुक्त बैठक के बाद यह तय किया गया कि किसानों की जमीन उनकी सहमति के आधार पर डीएम सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देकर खरीदी जाएगी। इससे किसानों को आर्थिक रूप से बेहतर लाभ मिलेगा और वे अपने भविष्य को लेकर निश्चिंत रह सकेंगे।

गौरतलब है कि गाजियाबाद में बढ़ते शहरीकरण और जनसंख्या के दबाव को देखते हुए ऐसी योजनाओं की सख्त आवश्यकता थी, जो शहर को संतुलित रूप से विस्तार देने में मदद कर सकें। हरनंदीपुरम योजना ठीक उसी दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की जमीन पर विकसित हो रही यह योजना न केवल जमीन का उचित मूल्य सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीणों को बेहतर जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के साधनों से भी जोड़ रही है। इससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर लाभ मिलने की उम्मीद है। गांव में रहने वाले कई किसानों ने भी अपने विचार साझा करते हुए बताया कि पहले जो ज़मीन खेती के लायक भी नहीं थी, वहां अब आधुनिक शहर बसने जा रहा है। यह उनके लिए भी बड़े अवसर की शुरुआत है। जीडीए की इस योजना से न केवल क्षेत्रीय विकास होगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। भू-अर्जन एवं अभियंत्रण विभाग के अधिकारी लगातार किसानों से संवाद बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या असमंजस की स्थिति न बने। जीडीए का फोकस केवल जमीन खरीदना नहीं, बल्कि किसानों की संतुष्टि और विश्वास हासिल करना भी है।

अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष (वीसी)

हमारी प्राथमिकता रही है कि किसानों की सहमति और विश्वास के साथ एक ऐसी योजना को आकार दिया जाए, जो न केवल गाजियाबाद की जरूरतों को पूरा करे, बल्कि स्थानीय ग्रामीण आबादी के लिए भी अवसरों के नए द्वार खोले। हरनंदीपुरम योजना इसी सोच का परिणाम है। अब तक 5 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किसानों की पूर्ण सहमति से हुआ है और उन्हें लगभग 32 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया जा चुका है। यह केवल भूमि का लेन-देन नहीं, बल्कि एक सामाजिक साझेदारी है जिसमें किसान, जीडीए और जिला प्रशासन मिलकर भविष्य का एक नया नक्शा तैयार कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य पारदर्शिता और संवाद के साथ आगे बढ़ना है। आने वाले समय में इस योजना के माध्यम से गाजियाबाद को एक संतुलित, टिकाऊ और स्मार्ट विस्तार मिलेगा। हम किसानों को केवल मुआवजा नहीं दे रहे, हम उन्हें उस विकास में भागीदार बना रहे हैं जो आने वाले वर्षों तक उनकी आने वाली पीढ़ियों को बेहतर जीवन देगा। यह योजना गाजियाबाद की सामाजिक और आर्थिक संरचना को मजबूती देगी और क्षेत्र को नई पहचान दिलाएगी।
अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष