नगर आयुक्त ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि कहीं भी नियम विपरीत तरीके से खोखे ना लगवाये जाये। खोखा प्रकरण में नगर आयुक्त ने एफआईआर दर्ज करवाने की भी बात कही है। बहरहाल इन घमासान के बीच शहरवासियों के बीच नगर निगम के खोखा व पेटी की खूब चर्चा हो रही है और लोग नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ के कड़े रूख की सराहना कर रहे हैं।
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। शहर में पिछले कुछ समय से खोखा और पेटी की चर्चा खूब हो रही है। यह दोनों शब्द मुंबई अंडरवर्ल्ड में काफी पॉपुलर हैं। अंडरवर्ल्ड में खोखा का अर्थ करोड़ रुपये और पेटी का अर्थ लाख रुपये है इन शब्दों का प्रयोग अवैध वसूली उगाही के लिए होता है। गाजियाबाद में खोखा का अर्थ सड़क किनारे रेहड़ी पटरी लगाने वाले दुकानदारों से है, लेकिन पेटी का अर्थ अंडरवर्ल्ड की ही तरह लाख रुपये से है। अब सवाल यह है कि गाजियाबाद में खोखा और पेटी की चर्चा क्यों हो रही है तो इसका जवाब है कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा खोखे आवंटन में हुआ भ्रष्टाचार का खेल। दरअसल खोखा आवंटन के नाम पर भी गरीब भोले भाले लोगों को लूटा गया। खोखा आवंटन के लिए निर्धारित रकम से तीन से चार गुणा अधिक रकम वसूल की गई। बात सिर्फ अवैध वसूली की नहीं है। हद तो यह है कि भोले भाले लोगों को खोखे का आवंटन ग्रीन बेल्ट में कर दिया गया। कई स्थानों पर सड़क किनारे खोखे लगा दिये गये हैं। ग्रीन बेल्ट में खोखा लगाने के मामले का एनजीटी ने संज्ञान लिया। एनजीटी के सख्त रूप को देखते हुए नगर निगम ने ग्रीन बेल्ट से खोखों को हटवा दिया। दरअसल खोखा के भ्रष्टाचार में राजनीतिक और प्रशासनिक गठजोड़ शामिल है। लेकिन इस गठजोड़ का शिकार बेबस और कमजोर लोग हुए हैं। जिन लोगों से खोखे आवंटन के बदले सरकारी खाते में पैसे जमा करवाये गये और अवैध उगाही भी हुई अब उन लोगों के पास ना तो खोखा हैं और ना ही उन्हें पैसे वापिस मिलने की आस दिखाई दे रही है। खोखा के भ्रष्टाचार का मामला संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ ने कड़ा रूख अख्तियार किया है। खोखा आवंटन का शिकार हुए गरीब लोगों के लिए जहां नगर आयुक्त की हमदर्दी है, वहीं भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के प्रति कड़ा रूख अख्तियार किया है। डॉ. नितिन गौड़ ने कहा कि वसुंधरा में खोखे हटाये जाने से प्रभावित 63 आवंटियों या तो जगह दी जाएगी या फिर उनके पैसे लौटेये जाएंगे। अवैध उगाही की शिकायत मिलते ही तत्काल इसमें जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विदित हो कि एक खोेखे के ऐवज में सरकारी खाते में 1,29,800 रुपये जमा कराये गये हैं लेकिन अवैध रूप से 3 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आ रही है।
नगर आयुक्त ने बताया कि खोखा आवंटन के मामले का निस्तारण करने के लिए 15 नवंबर को टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक बुलाई गर्ई है। बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी और समस्या का हल निकाला जाएगा। डॉ. नितिन गौड़ ने कहा कि वेंडिंग जोन बनाने को लेकर जो शासन के दिशा निर्देश हैं उसी के अनुसार सही स्थान पर खोखे लगाये जाएंगे और नियमानुसार पात्र लोगों को खोखे का आवंटन किया जाएगा। विदित हो कि खोखा आवंटन के भ्रष्टाचार का मुद्दा भाजपा के ही एक पार्षद द्वारा भी जोर शोर से उठाया जा रहा है। पार्षद हिमांशु मित्तल ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका भी दाखिल कर रखी है। पिछले दिनों वसुंधरा ग्रीन बेल्ट से हटवाये गये खोखे को नवयुग मार्केट में नगर निगम और जीडीए के बीच वाली सड़क पर रखवाने की भी कोशिश की गई। लेकिन नगर आयुक्त ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि कहीं भी नियम विपरीत तरीके से खोखे ना लगवाये जाये। खोखा प्रकरण में नगर आयुक्त ने एफआईआर दर्ज करवाने की भी बात कही है। बहरहाल इन घमासान के बीच शहरवासियों के बीच नगर निगम के खोखा व पेटी की खूब चर्चा हो रही है और लोग नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ के कड़े रूख की सराहना कर रहे हैं।
















