तालाब बना बदलाव का आईना, सदरपुर में जल संरक्षण और पर्यावरण चेतना का अनूठा संगम

-गाजियाबाद नगर निगम का अभिनव अभियान-तालाबों से लौट रही जीवनधारा, जुड़ रहा जनविश्वास
-नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने किया सदरपुर स्थित तालाब का निरीक्षण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जहां शहरी क्षेत्रों में जल निकासी की चुनौतियों से निपटना प्राथमिकता बनी हुई है, वहीं गाजियाबाद नगर निगम अब ग्रामीण सीमा में जल संचयन के पारंपरिक साधनों तालाबों को पुनर्जीवित कर स्थायी जल प्रबंधन की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। सदरपुर गांव का तालाब अब सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि पर्यावरण चेतना, सामुदायिक सहभागिता और सौंदर्यबोध का जीवंत प्रतीक बन चुका है। नगर निगम द्वारा जलकल विभाग के सहयोग से सदरपुर समेत कई अन्य गांवों में वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की देखरेख में इन जलस्रोतों की सफाई, गाद निकालना, जलकुंभी हटाना, और जल शोधन जैसे तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने मंगलवार को सदरपुर स्थित तालाब का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जल बचाओ अभियान के लिए प्रेरित किया। लगभग 5 एकड़ में फैला यह तालाब अब स्थानीय लोगों के लिए स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति का केंद्र बन चुका है।

यहां सुबह मॉर्निंग वॉक, योग अभ्यास, और संध्या भ्रमण की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों और बच्चों तक, हर वर्ग के लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। नेचररूट्स इनोवेशंस द्वारा तालाब की परिधि पर वॉकिंग ट्रैक का निर्माण, पौधारोपण, जल शोधन संयंत्र की स्थापना और चारों ओर हरियाली का विस्तार, तालाब को सौंदर्य और संरक्षण दोनों दृष्टि से विशेष बना रहा है। कार्यक्रम में वीना वर्मानी और मोहित वर्मानी (आस्था वेलफेयर सोसाइटी) की उपस्थिति रही। नगर आयुक्त मलिक ने मौके पर मौजूद स्थानीय निवासियों से संवाद करते हुए तालाब की स्वच्छता बनाए रखने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि तालाब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, यह हमारी संस्कृति, प्रकृति और भविष्य का संरक्षक है। इसे संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि तालाब सिर्फ जल संचयन का माध्यम नहीं, यह समाज और प्रकृति के बीच एक सेतु है। सदरपुर तालाब का पुनर्जीवन गाजियाबाद नगर निगम की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें हर नागरिक को पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि हर वार्ड, हर गांव, हर मोहल्ला जल स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़े।

तालाब पर पौधारोपण-प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक
कार्यक्रम के अंतर्गत सभी निगम अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर तालाब की परिधि में पौधारोपण किया। ‘पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ’ का संदेश हर तरफ गूंजा।

ग्रामवासियों की आवाज-नगर निगम ने हमें एक नया जीवन दिया
स्थानीय निवासी भावुक होकर हुए बताया कि पहले यह तालाब गंदगी और उपेक्षा का शिकार था। अब यह गांव की पहचान और जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सभी अब यहां समय बिताते हैं। यह बदलाव उम्मीदों से कहीं बड़ा है।

गाजियाबाद का जल आंदोलन-तालाबों से लौटता विश्वास
गाजियाबाद नगर निगम की यह पहल सिर्फ एक सफाई या सौंदर्यकरण अभियान नहीं, बल्कि जल संकट के समाधान की दिशा में सामूहिक सोच और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का जीवंत उदाहरण है। महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद आनंद ने बताया कि महापौर और नगर आयुक्त के नेतृत्व में गाजियाबाद के अनेकों तालाबों को पुनर्जीवित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। यह अभियान आने वाले वर्षों में गाजियाबाद को जल संरक्षण का मॉडल शहर बना सकता है। सदरपुर तालाब की यह कहानी न सिर्फ गाजियाबाद बल्कि पूरे उत्तर भारत में स्थानीय संसाधनों से सतत विकास की मिसाल बन सकती है। यह बदलाव यह सिखाता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो हर गांव के तालाब में प्रकृति फिर से सांस ले सकती है।