शराब तस्करी का बदला ट्रेंड, अब लाइसेंसी दुकान की शराब से हो रहा काला कारोबार

-दुकानें बंद, मुनाफा चालू, तस्कर बेच रहे लाइसेंसी शराब, एक गिरफ्तार

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। बाहरी राज्यों से आने वाली अवैध शराब पर प्रशासन की शिकंजा कसने के बाद अब शराब तस्करों ने नया तरीका खोज निकाला है। जिले में अब वैध रूप से लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों से शराब खरीदकर उसे अवैध तरीके से ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। यह एक नया और चिंताजनक ट्रेंड है, जिसमें शराब माफिया रात के अंधेरे में सक्रिय हो जाते हैं और बंद दुकानों की शराब को कालाबाजारी के जरिये बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं। इसी अवैध नेटवर्क का भंडाफोड़ रविवार को आबकारी विभाग ने किया। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक नामवर सिंह और थाना इकोटेक प्रथम की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपी राहुल शर्मा पुत्र धनीराम के पास से 110 पव्वे कैटरीना देशी शराब यूपी मार्का बरामद किए गए हैं। यह शराब स्थानीय लाइसेंसी दुकान से खरीदकर अवैध रूप से महंगे दामों में बेची जा रही थी।

गिरफ्तारी के बाद की गई पूछताछ में राहुल ने खुलासा किया कि वह रोजाना बंद दुकान से शराब खरीद कर उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों को ऊंचे दामों पर बेचता था। उसका नेटवर्क इलाके में धीरे-धीरे फैल रहा था और वह रात के समय एक्टिव होकर शराब की आपूर्ति करता था। उसके खिलाफ थाना इकोटेक प्रथम में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने जिले की आबकारी नीति और उसकी निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आबकारी विभाग ने लाइसेंसी दुकानों पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दुकानदारों की मिलीभगत से ही यह शराब तस्करों के हाथों में पहुंच रही है। आबकारी विभाग अब तस्करी में शामिल लोगों की कुंडली खंगालने में जुट गया है। जिन दुकानों से लगातार शराब गायब हो रही है या बिक्री का रिकॉर्ड गड़बड़ है, उन पर विशेष निगरानी की जा रही है।

साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इन दुकानों से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में कोई भ्रष्टाचार तो नहीं है। जिला आबकारी अधिकारी ने कहा कि जिले में किसी भी प्रकार की शराब तस्करी, चाहे वह बाहर से हो या भीतर से, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग अब जिलेभर में सघन अभियान चलाकर शराब तस्करों की कमर तोडऩे की रणनीति पर काम कर रहा है। यह घटना केवल एक तस्कर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस पूरे गुप्त नेटवर्क के उजागर होने की शुरुआत है जो लाइसेंसी दुकानों की आड़ में अवैध धंधा कर रहा था। अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह नया तस्करी मॉडल और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग इस काले कारोबार के जड़ तक कब तक पहुंचता है और ऐसे अवैध व्यापार में लिप्त बड़े मगरमच्छों को कब तक कानून के शिकंजे में लाया जाता है।