-सुरक्षा, अनुशासन और निगरानी व्यवस्था का लिया स्थलीय जायज
-श्रद्धालुओं की सुरक्षा ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: निमिष पाटील
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। श्रावण मास में शिवभक्तों की आस्था का महापर्व कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है, और गाजियाबाद पुलिस प्रशासन इसे सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में पूरी तरह मुस्तैद है। इसी क्रम में गुरुवार को डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने मेरठ तिराहा स्थित कांवड़ कंट्रोल रूम का निरीक्षण करते हुए यात्रा मार्ग की सुरक्षा, निगरानी और यातायात प्रबंधन को लेकर गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कांवड़ मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड के माध्यम से निगरानी प्रणाली की कार्यक्षमता को परखा गया। डीसीपी ने जी.टी. रोड से लेकर यूपी-दिल्ली सीमा बॉर्डर तक पूरे यात्रा मार्ग का स्थलीय दौरा किया, जहां सुरक्षा प्रबंधों की व्यापक समीक्षा कर जवाबदेह और संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल पेश की। निरीक्षण के पश्चात डीसीपी निमिष पाटील ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा की सहजता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा आयोजन है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। हर अधिकारी अपने क्षेत्र में पूरी जिम्मेदारी से ड्यूटी निभाए। उन्होंने यातायात विभाग, बीट प्रभारी और कंट्रोल रूम स्टाफ को निर्देशित किया कि सभी सीसीटीवी कैमरे हर क्षण क्रियाशील रहें। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि की लाइव निगरानी हो। संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएं। किसी भी आपात स्थिति के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सतर्क रहें। भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक डायवर्जन की योजना पूरी पारदर्शिता और पूर्व तैयारी के साथ लागू की जाए।
निरीक्षण में सहायक पुलिस आयुक्त इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्वत, साहिबाबाद एवं शालीमार गार्डन भी उनके साथ उपस्थित रहे। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों की जानकारी दी और कहा कि निर्देशानुसार फोर्स की तैनाती, मेडिकल सहायता, शीतल जल की उपलब्धता और यातायात नियंत्रण के लिए सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।
डीसीपी निमिष पाटील का यह निरीक्षण न केवल प्रशासनिक तत्परता का प्रमाण है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि गाजियाबाद पुलिस धार्मिक आयोजनों के प्रति पूरी संवेदनशीलता और रणनीतिक समझ के साथ काम कर रही है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि हर कांवडिय़ा खुद को सुरक्षित, सम्मानित और संरक्षित महसूस करे।

















