मायलोमा मरीजों के लिए उम्मीद की नई पहल, यशोदा मेडिसिटी में ‘मायलोमा उत्सव’ आयोजित

-जागरूकता, सहयोग और समग्र देखभाल पर रहा विशेष फोकस
-मरीजों, परिजनों और विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
-मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संतुलन पर दिया गया जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद/दिल्ली-एनसीआर। कैंसर देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी स्वास्थ्य संस्थान यशोदा मेडिसिटी द्वारा शनिवार को ‘मायलोमा उत्सव – लिविंग स्ट्रॉन्गर विद मायलोमा’ का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम मल्टीपल मायलोमा से जूझ रहे मरीजों, उनके परिजनों और देखभालकर्ताओं के लिए एक सशक्त मंच के रूप में सामने आया, जहां न केवल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग पर भी विशेष बल दिया गया। यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को सही मार्गदर्शन, सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करना रहा। हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विभाग के विशेषज्ञों के नेतृत्व में आयोजित इस पहल ने मरीज-केंद्रित समग्र देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मल्टीपल मायलोमा मरीज, सर्वाइवर, उनके परिवारजन और स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए।

इस दौरान अनुभव साझा करने, परामर्श देने और नई जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए संवाद सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को बीमारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे उन्हें अपनी स्थिति को बेहतर समझने और उससे मुकाबला करने की प्रेरणा मिली।
विशेष सत्रों में आध्यात्मिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रमुखता दी गई। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने संबोधन में मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों से जूझते समय सकारात्मक सोच और आत्मबल अत्यंत आवश्यक होता है। वहीं, डॉ. रबिन्द्र मोहन आचार्य ने योग और नियमित दिनचर्या के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में सहायक है। मल्टीपल मायलोमा एक जटिल और दीर्घकालिक बीमारी है, जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी मरीजों और उनके परिवारों को प्रभावित करती है।

ऐसे में ‘मायलोमा उत्सव’ जैसे कार्यक्रम मरीजों को एक-दूसरे से जोडऩे, उनके अनुभव साझा करने और एक मजबूत सहयोग तंत्र विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने कहा कि संस्थान कैंसर उपचार को केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रखता, बल्कि मरीजों की संपूर्ण यात्रा में उनके साथ खड़ा रहता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम मरीजों को सशक्त बनाने, उन्हें सही जानकारी देने और उनके लिए सहयोगी वातावरण तैयार करने में सहायक होते हैं। प्रबंध निदेशक डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि ‘मायलोमा उत्सव’ मरीजों के लिए केंद्रित देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस तरह के संवाद और मार्गदर्शन सत्रों से मरीज और उनके परिजन अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं।

डॉ. निवेदिता धींगरा, निदेशक एवं विभागाध्यक्ष- हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ऑन्कोलॉजी और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण ने बताया कि मल्टीपल मायलोमा के उपचार में विशेषज्ञ टीम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रमों के माध्यम से मरीजों के मन में मौजूद शंकाओं को दूर किया जा सकता है और उन्हें अपने इलाज में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ संवेदनशील देखभाल, भावनात्मक सहयोग और जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। ‘मायलोमा उत्सव’ के माध्यम से यशोदा मेडिसिटी ने न केवल मरीजों को नई उम्मीद दी, बल्कि यह भी साबित किया कि सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच के जरिए गंभीर बीमारियों से लड़ाई को मजबूत बनाया जा सकता है।