श्मशान घाट की घटना से प्रशासन ने नही लिया कोई सबक

जर्जर घोषित किए गये विद्यालयों पर नही किया कोई अमल

निवाड़ी में भरभराकर गिरी प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग, बड़ा हादसा टला

गाजियाबाद। प्रदेश सरकार भले ही बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर दिख रही है, लेकिन शिक्षा के जिस मंदिर में बच्चे पढ़ते हैं, उसकी मरम्मत के लिए न ही शासन गंभीर है और नही प्रशासन। नगर पंचायत निवाड़ी में प्राथमिक विद्यालय नंबर दो की बिल्डिंग अचानक गिरने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि जिस वक्त यह घटना हुई उस समय बिल्डिंग के नीचे कोई बच्चा नही था। हलांकि यह बिल्डिंग काफी पहले जर्जर घोषित की जा चुकी है। जल्द ही प्रशासन ने विद्यालयों को खोलने के निर्देश तो दे दिए, मगर जर्जर विद्यालयों की सूचना मिलने के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नही की गई। अब इसे शिक्षा विभाग, नगर पंचायत और प्रशासन की लापरवाही कहें। या फिर सब कुछ जानकर भी विभाग अनजान बना हुआ था। कुछ माह पूर्व ही हाल ही में मुरादनगर श्मशान का लेंटर गिरने के साथ तीन चार घटनाएं हो चुकी है। लेकिन प्रशासन इन घटनाओं से भी सबक लेने में अपनी कोई रूचि नही दिखा रहा है। शायद प्रशासन को एक बार फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार है। अगर यह स्थिति बरकरार रही तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते है।
गत माह तीन जनवरी को मुरादनगर श्मशाम की छत गिरने से दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी। डेढ़ महीने में ही मुरादनगर और उसके आसपास और लोनी में दीवार गिरने की घटनाएं घट चुकी है। मगर इन घटनाओं से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। शुक्रवार को निवाड़ी नगर पंचायत में सरकारी विद्यालय नंबर दो को जर्जर घोषित किए हुए महीनों बीत चुका है। विद्यालय की स्थिति के बारे में प्रधानाचार्य रजनी चौहान ने इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियो के साथ नगर पंचायत और प्रशासन को दे दी थी। लेकिन इसके बाद भी जर्जर बिल्डिंग गिराने पर अमल नहीं किया गया। हालांकि इन दिनों स्कूल बंद चल रहे है। लेकिन अक्सर वहां बच्चे स्कूल परिसर में खेलने पहुंच जाते हैं। ऐसे में वहां गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।