सीएम के आदेश पर जिला प्रशासन ने शुरू की तैयारी
गाजियाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राचीन हिंडन नदी के इतिहास को देखकर जिला प्रशासन को बाढ़ को लेकर कार्ययोजना तैयार करने के आदेश दिए हैं। गाजियाबाद भ्रमण के दरम्यान सीएम योगी ने जिलाधिकारी को इस बिंदुओं पर काम करने को कहा। इतिहास रहा है कि हिंडन नदी में हर 50 वर्ष बाद बाढ़ आती है। इससे पहले 1978 में हिंडन नदी में बाढ़ आई थी। उससे पहले वर्ष 1930 में हिंडन नदी में बाढ़ आई थी। गाजियाबाद पश्चिम उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जनपद है। जनपद के पश्चिम दिशा में दिल्ली एवं हरियाणा राज्य, पूर्व दिशा में हापुड़, उत्तर दिशा में मेरठ तथा दक्षिण दिशा में गौतमबुद्धनगर जनपद है। इसकी पश्चिम सीमा पर यमुना नदी बहती है। 
जनपद के मध्य भाग में हिंडन नदी गुजरती है। जनपद के कि.मी. 9.166 में यमुना व कि.मी. 40.00 क्षेत्र में हिंडन नदी की बाढ़ से प्रभावित होता है। यमुना नदी जनपद के लोनी तहसील से गुजरती है। नदी के बांये किनारे पर अलीपुर तटबंध निर्मित है। इस पर हिंडन तटबंध, गाजियाबाद तटबंध एवं नंदग्राम तटबंध निर्मित है। सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा गाजियाबाद में हिंडन व यमुना नदियों पर विकसित क्षेत्र की सुरक्षा हेतु 22.841 कि.मी. लम्बाई के तटबंध निर्मित हैं। हैड वक्र्स खंड आगरा नहर, ओखला के नियंत्रण में हिंडन नदी पर हिंडन बैराज निर्मित है। इस जनपद में मेरठ खंड गंगा नहर, मेरठ एवं बुलंदशहर खंड गंगा नहर, बुलंदशहर की शाखाएं व कई छोटे-बड़े 43 नाले (जिनकी कुल लम्बाई 219.26 कि.मी. है) गुजरते हैं। इन प्रणालियों एवं नालों के कारण जनपद की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में अवरोध पैदा होना स्वाभाविक है एवं वर्षा काल में जल प्लावन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जल प्लावन के कारण जनपद में 20 ग्राम प्रभावित होते हैं। तहसील लोनी में इसका प्रभाव अधिक होता है। गाजियाबाद में बाढ़ एव वर्षा का सर्वाधिक प्रकोप 1978 में हुआ था, जिससे जनपद की सभी नदियां यमुना व हिंडन में बाढ़ आ गयी थी। इस बाढ़ से तत्समय जनपद के 152 ग्रामों में से 15 ग्राम प्रभावित हुए। बाढ़ का सामना करने के लिए अनेक सहायता शिविर स्थापित किए गए थे। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने बताया कि 1978 के बाद गाजियाबाद में किसी प्रकार की कोई गंभीर बाढ़ की स्थिति नहीं आयी है, परंतु यदि हिंडन नदी में डिस्चार्ज लगभग 10.000 क्यूसेक से अधिक बढ़ता है, तो डूब क्षेत्र में बसी आबादी को अत्यधिक खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके मद्देनजर सभी संबंधित विभागों को बाढ़ से निपटने हेतु संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
















