कोरोना के उपचार में निर्धारित रेट से अधिक वसूली पर होगी कार्रवाई: : डॉ. मिथलेश कुमार

-आरोप सत्य मिलने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ होगी एफआईआर

गाजियाबाद। प्रदेश शासन ने कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए निर्धारित किए गए रेट के बाद भी निजी अस्पताल प्रबंधन ज्यादा रुपए वसूल रहे है। ऐसे अस्पतालों पर अब जिला प्रशासन शिकंजा कसेगा। इलाज के लिए पूरा पैकेज होने के बाद भी कुछ अस्पतालों में शासनादेश का पालन नहीं किया जा रहा है। मरीजों के उपचार के नाम पर पैकेज से ज्यादा रकम वसूली जा रही है। जिला प्रशासन के पास ऐसी बहुत शिकायतें पहुंची हैं। इनकी जांच शुरू कराई जा रही है। अगर जांच में आरोप सत्य पाए गए तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मिथलेश कुमार ने बताया कि शासन से मरीज के उपचार के पैकेज निर्धारित किया गया है। अगर निजी अस्पताल प्रबंधन इससे ज्यादा पैसे वसूल रहे है तो उनके खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं,लोगों से अपील की गई है कि अगर मरीज से उपचार के लिए ज्यादा खर्च लिया जा रहा है,तो वह कोविड एंड कमांड कंट्रोल रूम में फोन कर शिकायत दर्ज कराएं। उपचार के लिए प्रदेश में शहरों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा गया है। गाजियाबाद ए श्रेणी में आता है। यहां उपचार के लिए नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड फॉर अस्पताल (एनएबीएच) से संबद्ध अस्पताल और एनएबीएच संबद्ध न होने वाले अस्पताल हैं। कोरोना संक्रमण के चलते मोडरेट सिकनेस वाले मरीजों के एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में इलाज के लिए प्रतिदिन के हिसाब से पीपीई किट के चार्ज समेत 10 हजा रुपए लेने और नान एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में इलाज के लिए पीपीई किट के चार्ज समेत 8 हजार रुपए रेट निर्धारित किया गया है। गंभीर(सीवियर सिकनेस)मरीज को बिना वेंटिलेटर वाले आईसीयू की आवश्यकता है,इसके लिए एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में इलाज के लिए पीपीई किट समेत 15 हजार रुपए चार्ज और नान एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में पीपीई किट समेत 13 हजार रुपए चार्च रखा गया हैं। अत्यंत गंभीर (वेरी सीवियर सिकनेस) वाले ऐसे मरीज, जिन्हें वेंटिलेटर वाले आईसीयू की आवश्यकता है, उनके लिए एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में इलाज के लिए पीपीई किट समेत 18 हजार रुपए चार्ज और नान एनएबीएच एक्रिडेटेड अस्पताल में पीपीई किट समेत 15 हजार रुपए चार्ज निर्धारित किया गया है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश कुमार ने बताया कि इस पैकेज में मरीज के लिए अस्पताल में बेड,भोजन,नर्सिंग केयर, मॉनिटरिंग,इमेजिग,जांच,चिकित्सक द्वारा देखे जाने का खर्च शामिल है। रेमडेसिविर इंजेक्शन का खर्च और आरटीपीसीआर जांच,दवाओं का खर्च इसमें शामिल नहीं किया गया है। शासन द्वारा तय किए गए पैकेज से अधिक निजी अस्पतालों में मरीजों से रुपए लेने की शिकायतें मिल रही हैं। इन शिकायतों की जांच कराई जा रही है। अगर जांच में आरोप सत्य पाए गए तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।