रेल मंत्रालय द्वारा अवैध दवा कारोबार को बढ़ावा दिए जाने पर एआईओसीडी हैरान

  • सामान्य और किराना स्टोर जैसे अनियंत्रित वातावरण में दवा उपलब्ध कराना समाज के लिए खतरा: राजदेव त्यागी

गाजियाबाद। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी), जो देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों का प्रतिनिधित्व करता है और देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र की रीढ़ के रूप में कार्य करता है। एआईओसीडी के 65 लाख से अधिक सदस्य परिवार और अधीनस्थ सामूहिक रूप से 5 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। हमारी संस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है, और हम इसके लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए अथक सेवा प्रदान कर रहे हैं। हमें यह जानकर गहरी निराशा हुई कि रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने उपभोक्ताओं के घर-घर दवाइयाँ पहुंचाने के लिए अवैध ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म से बोलियां (बिड्स) आमंत्रित करने का प्रस्ताव दिया है।

एआईओसीडी के अध्यक्ष जे एस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि देश में ई-फार्मेसियों का संचालन अवैध है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने डब्लू.पी (सी)11711/2018 – डॉ. जहीर अहमद बनाम भारत संघ और डब्लू.पी (सी) 10611/2018- साउथ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन बनाम भारत सरकार में 12.12.2018 के आदेश के तहत ऑनलाइन फार्मेसियों के संचालन पर निषेधाज्ञा लगाई है। यह आदेश आज भी लागू है। इसके अलावा, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अपने शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया है कि भारत में वर्तमान में ऑनलाइन फार्मेसियों के लिए किसी भी प्रकार का प्रावधान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 या उसके नियमों के तहत नहीं है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार, दवाओं का वितरण केवल लाइसेंस प्राप्त परिसर के भीतर ही किया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी के दौरान, सरकार ने असाधारण परिस्थितियों में कुछ शर्तों के तहत दवाओं की डोर-डिलीवरी की अनुमति दी थी, लेकिन यह अधिसूचना केवल स्थानीय और पंजीकृत $फार्मेसी पर लागू होती है, न कि किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संस्था ने सरकार से इसकी अधिसूचना निरस्त करने की भी मांग की हैं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 65 के तहत प्रिस्क्रिप्शन पर प्रिस्क्राइबर के हस्ताक्षर, विक्रेता का नाम और पते के साथ वितरण की तारीख का उल्लेख करना अनिवार्य है। यह शर्तें ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म के संचालन को स्पष्ट रूप से अवैध बनाती हैं। गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी का कहना है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के यह निर्देश बाध्यकारी हैं और संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार अनिवार्य हैं जो स्व-व्याख्यात्मक है। इसे ध्यान में रखते हुए जनरल स्टोर और किराने की दुकानों के माध्यम से ओटीसी दवाओं की बिक्री की अनुमति देना उक्त आदेश और ऐसे कई अन्य आदेशों का घोर उल्लंघन है। हाल के दिनों में कैंसर रोधी दवाओं सहित विभिन्न नियामकों द्वारा नकली दवाओं के कई मामलों का खुलासा किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि दवा, जनरल स्टोर और किराने की दुकानों में उपलब्ध होगी तो असामाजिक तत्वों के लिए दवा की आपूर्ति करने के खुले अवसर होंगे क्योंकि खरीदार फार्मा क्षेत्र के एक्सपर्ट नहीं हैं। यह स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के लिए एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक खतरा है।

इससे संपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18 (सी) के अनुसार, यदि जनरल और किराना दुकानों को ओटीसी दवाएं बेचने की अनुमति दी जाती है तो यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18 (सी) के प्रावधान का उल्लंघन होगा। औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 18 (सी) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति स्वयं या अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लाइसेंस के तहत और शर्तों के अनुसार किसी भी दवा को बेच, या स्टॉक या प्रदर्शन या बिक्री के लिए पेश नहीं करेगा, या वितरित नहीं करेगा। एआईओसीडी का मानना है कि रेलटेल कॉरपोरेशन द्वारा यह प्रस्ताव हमारे देश के कानूनों को दरकिनार करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भारी खतरे में डालने के बराबर है। हम उम्मीद करते हैं कि यह निर्णय जानबूझकर नहीं लिया गया होगा। एआईओसीडी देश की जनता और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हम रेलटेल कॉरपोरेशन से अपील करते हैं कि वह इस अवैध प्रस्ताव को तुरंत वापस ले।