आवंटियों को मिलेगा लाभ, 4 माह में 12 हजार फाइलों का किया निस्तारण: अतुल वत्स

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने और प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अब बेहतर तरीके से काम किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि 4 महीने में करीब 12 हजार फाइलों का निस्तारण करते हुए उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया हैं। इसके साथ ही अन्य फाइलों को अपलोड करने की प्रक्रिया भी चल रही है। ताकि भविष्य में आवंटियों को अपने भवन-भूूखंड संबंधित सभी जानकारी ऑनलाइन मिल सकें। जीडीए के प्रशासनिक कार्यों को आसान बनाने के लिए प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके तहत जीडीए के सभी अनुभागों की फाइलें स्कैनिंग कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स का कहना है कि जीडीए में पीएमएस सिस्टम लागू होने से इस व्यवस्था से सभी प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने के साथ पारदर्शिता भी आएगी। उन्होंने कहा कि इससे आवंटियों को फायदा होगा। उन्हें अपनी संपत्ति के बारे में जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसके लिए उन्हें जीडीए कार्यालय में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

इस व्यवस्था के लागू होने से जीडीए के कार्यों में पारदर्शिता आने के साथ-साथ आवंटियों को भी प्रत्येक कार्य के लिए जीडीए आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से डिजिटल परिवर्तन के तहत आवंटियों को सेवाएं प्रदान हो सकेंगी। इस दिशा में जीडीए ने एक सितंबर से लेकर जनवरी में अभी तक 12,205 फाइलों का निस्तारण करते हुए उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। इसके लिए फाइलों के प्रत्येक दस्तावेज की स्कैनिंग की जा रही हैं। आवंटियों की जो नई फाइल खुल रही है। उन्हें भी पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत ही खोला जा रहा है। इस व्यवस्था को इस साल लागू करने की योजना है। इस प्रक्रिया के तहत इंजीनियरिंग विभाग की सबसे ज्यादा 2199 फाइलों को संंभालते हुए ऑनलाइन अपलोड कर दिया है। यह सभी फाइलें 60 दिन के भीतर अपलोड की गई हैं। संपत्ति अनुभाग की 1325 फाइल शामिल है। जबकि प्रशासनिक विभाग की करीब 1046 फाइल ऑनलाइन अपलोड कर रहे हैं।

इसके अलावा भूमि अधिग्रहण,योजना और निर्माण विभागों की फाइल भी अपलोड की गई है7 इस व्यवस्था के लागू होने से मूल आवंटी समेत सभी क्रेताओं का विवरण,भुगतान का विवरण, रजिस्ट्री, कब्जे की तारीख से लेकर बकाया आदि की जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए आवंटियों को जीडीए में व्यक्तिगत रूप से नहीं आना पड़ेगा। इसमें ऑटोमेटिक माध्यम से पेमेंट शैड्यूल तय हो सकेगा। जीडीए अधिकारी बताते हैं कि जीडीए की किसी भी संपत्ति का जब म्यूटेशन होगा तो संपत्ति आईडी में बदलाव नहीं होगा। नए व्यक्ति के नाम संपत्ति दर्ज होने के बाद ही जीडीए की तरफ से इस सिस्टम के माध्यम से नए मालिक के मोबाइल नंबर पर संपत्ति आईडी के लिए नया पासवर्ड बनाना होगा। इसके माध्यम से आवंटी संपत्ति की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।