निगम के साथ सरकार का भी भरेगा खजाना

– पहली बार सरकार को नगर निगम में विज्ञापन करने वाली कंपनियों से मिलेगा करोड़ों रुपए का स्टांप शुल्क
– नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर की पहल, नई विज्ञापन नीति से कराया टेंडर, रजिस्ट्री विभाग को स्टांप शुल्क वसूली के बाबत दी जानकारी
– विज्ञापन और पार्किंग माफिया के खिलाफ नगरायुक्त ने की कड़ी कार्रवाई, नगर निगम हो रहा मालामाल, टूट रही माफिया की कमर

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। जो नगर निगम अभी तक खुद विज्ञापन से कमाई नहीं कर पाता था वही अब अपने साथ-साथ सरकार का भी खजाना भरेगा। गाजियाबाद नगर निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब एक वर्ष के लिए विज्ञापन शुल्क के रूप में लगभग 15 करोड़ रुपये मिलेंगे। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार को भी स्टांप शुल्क के रूप में लगभग 5 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी। विज्ञापन कंपनियों द्वारा अभी तक रजिस्ट्री विभाग को कोई भुगतान नहीं किया जाता रहा है। यह पहला ऐसा मौका होगा जब नगर निगम के साथ सरकार को भी राजस्व मिलेगा। रजिस्ट्री विभाग को होने वाली इस कमाई का श्रेय गाजियाबाद के नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर को जाता है। महेंद्र सिंह तंवर ने ना सिर्फ नई विज्ञापन नीति के हिसाब से टेंडर कराकर गाजियाबाद नगर निगम को मालामाल किया बल्कि विज्ञापन कंपनी के साथ एग्रीमेंट शर्त में भी इस बात का प्रावधान किया कि स्टांप शुल्क सहित अन्य समस्त करों का भुगतान विज्ञापन कंपनी द्वारा किया गया और इसकी जानकारी रजिस्ट्रार को दी गई। रजिस्ट्रार को स्टांप शुल्क की गणना एवं उसकी वसूली के बाबत पत्र लिखा गया। नगर निगम के पत्र के बाद रजिस्ट्री विभाग ने कंपनी को 5 करोड़ 7 लाख 3 हजार 50 रुपये जमा करने को कहा है।
सफल लोग कुछ अलग नहीं करते बल्कि वह उसी काम को अलग ढंग से करते हैं। यह बात आईएएस महेंद्र सिंह तंवर पर सटीक बैठती है। गाजियाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त का चार्ज लेने के बाद महेंद्र सिंह तंवर ने सबसे पहले बेसिक्स को ठीक किया और उन पहलुओं पर फोकस किया जो नगर निगम हित में हो। टैक्स वसूली के बाद विज्ञापन और पार्किंग नगर निगम की आमदनी का प्रमुख जरिया होता है। लेकिन इन दोनों पर ही माफिया तंत्र हावी रहा है। पार्किंग से जहां नगर निगम की कमाई सिर्फ लाखों में होती थी, वहीं विज्ञापन से भी बामुश्किल 2 से 3 करोड़ रुपये मिलते थे। इतना ही नहीं वसूली के लिए निगम अधिकारियों को नाकों चने चबाने पड़ते थे। लेकिन महेंद्र सिंह तंवर ने ऐसा हंटर चलाया कि पार्किंग से जहां निगम की आमदनी 5 करोड़ को पार कर जाएगी, वहीं विज्ञापन शुल्क से लगभग 15 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी।

रजिस्ट्री विभाग को मिलेगा करोड़ों
अभी तक गाजियाबाद नगर निगम में जितने भी विज्ञापन के कांट्रैक्ट हुए हैं, वह सभी कांट्रैक्ट 100 रुपये के स्टांप पेपर पर हुए हैं। विज्ञापन कंपनियों द्वारा रजिस्ट्री विभाग को कोई अतिरिक्त रकम का भुगतान नहीं किया जाता था। जबकि नियमानुसार स्टांप शुल्क का भुगतान होना चाहिये। रजिस्ट्री विभाग को इसकी जानकारी भी नहीं होती थी कि किसके साथ कितने का एग्रीमेंट हुआ है। लेकिन इस वर्ष विज्ञापन की टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर संपत्ति प्रभारी ने रजिस्ट्रार को निगम के विज्ञापन एग्रीमेंट की जानकारी दी और उनसे पूछा कि कितना स्टांप शुल्क लगेगा, जिससे कि विज्ञापन कंपनी से इसकी वसूली की जा सके। स्टांप ड्यूटी के भुगतान को लेकर कोई विवाद ना हो, इसके लिए एग्रीमेंट की शर्त में इसका उल्लेख किया गया कि स्टांप ड्यूटी का भुगतान विज्ञापन कंपनी द्वारा किया जाएगा।

मैसर्स मीडिया 24/7 एडवरटाइजिंग को मिला कांट्रैक्ट
डिजिटल होर्डिंग से विज्ञापन करने के लिए मैसर्स मीडिया 24/7 एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कांट्रैक्ट दिया गया है। नगर निगम द्वारा लिखी गई चिट्ठी के बाद रजिस्ट्री विभाग द्वारा एग्रीमेंट की कॉपी मांगी गई जिसे रजिस्ट्री विभाग को उपलब्ध करा दिया गया। इसके बाद उप निबंधक सेकेंड द्वारा किए गए परीक्षण के बाद स्टांप ड्यूटी के मद में 4 करोड़ 5 लाख 62 हजार 420 रुपए और निबंधन शुल्क के रूप में 1 करोड़ 1 लाख 40 हजार 630 रुपए जमा कराने को कहा गया है। इस तरह से विज्ञापन कंपनी से रजिस्ट्री विभाग को 5 करोड़ 7 लाख 3 हजार 50 रुपए मिलेंगे।