गरते भू-जल स्तर पर सीडीओं ने जताई चिंता

-भू-गर्भ जल की संरक्षा व नियंत्रण करने के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश

गाजियाबाद। भू-गर्भ जल की संरक्षा और बारिश के पानी को नियंत्रित करने के लिए जल दोहन रोकने के साथ अधिकारी मिलकर ठोस कदम उठाएं। इसके अलावा सरकारी एवं गु्रप हाउसिंग सोसायटी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाकर बारिश के पानी को संयत्रित कराने के लिए कार्य कराए जाए। बुधवार को जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के निर्देशन में कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अस्मिता लाल ने अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए यह दिशा-निर्देश दिए। सीडीओ अस्मिता लाल ने परियोजना निदेशक पीएन दीक्षित, संयुक्त आयोग उद्योग, जीडीए के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार,सहायक अभियंता लघु सिंचाई हरिओम, उप प्रभागीय वन अधिकारी आशुतोष पांडेय, पर्यावरण विद आकाश वशिष्ठ, भू-गर्भ जल विभाग गौतमबुद्धनगर के अवर अभियंता राहुल देव शर्मा आदि की मौजूदगी में बैठक की। सीडीओ अस्मिता लाल ने जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की बैठक करते हुए कहा कि भू-गर्भ जल की संरक्षा व नियंत्रण करने के लिए समन्वय बनाकर अधिकारियों को ठोस कदम उठाने होंगे।

भू-गर्भ के जल स्तरों में आई गिरावट से अनेक समस्या उत्पन्न हो गई हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जल के स्रोतों में कमी आई है। घरेलू,कृषि व उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत नहीं होने के कारण खाद्य और जीविका का आधार है। जल प्रकृति का स्रोत है। ऐसे में भूमि में वनस्पति आदि उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि बारिश का पानी को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाकर एकत्र किया जाए। इसका उपयोग किया जा सकता है। प्राकृतिक रूप से जल स्तर बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं और जल दोहन रोका जाए।भू-गर्भ जल का दुरूपयोग रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आर्थिक दंड व सजा का प्राविधान किया है।

बैठक में पोर्टल पर नोटिफाइड क्षेत्र के एनओसी निर्गमन एवं नवीनीकरण के लिए प्राप्त 30 आवेदन और नॉन नोटिफाइड क्षेत्र के एनओसी के लिए प्राप्त 10 आवेदन एवं एमएसएमई श्रेणी के 27 एनओसी आवेदन और 2 कूप आवेदन,नॉन नोटिफाइड क्षेत्र के 1 कूप आवेदन समेत 70 आवेदनों पर विचार किया गया। सीडीओ ने जीडीए के अधिशासी अभियंता को 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल से कम क्षेत्र के आवासीय भवनों आदि पर रूफ टाूप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित स्थापित कराए जाने के निर्देश दिए। नामित सदस्य आकाश वशिष्ठ द्वारा पूर्व में स्वीकृत अनापत्ति प्रमाण पत्रों के सापेक्ष संस्थाओं द्वारा किए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना,आर्टिफिशियल रिचार्ज की व्यवस्था, पीजोमीटर की स्थापना,बोरवैल पर डिजिटल वाटर फ्लो मीटर स्थापना आदि के निरीक्षण के लिए परिषद से किए गए अनुरोध के क्रम में सीडीओ ने उपसमिति एवं टॉस्क फोर्स को इसका निरीक्षण करने के निर्देश दिए। एनजीओ संचालक सोनिया मुराडिया द्वारा आवासीय भवनों में उपयोग में लाए जा रहे भू-गर्भ जल को रिसाइकिल एवं दोबारा से इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।सीडीओ ने कहा कि नगर निगम को इस संबंध में कार्य किया जा रहा है।