नगर निगम कॉट्रैक्टर एसोसिएशन की कार्यशैली को लेकर उठने लगी है आवाज, पदाधिकारियों का रवैया नहीं सुधरा तो मुखर होगी विरोध की आवाज
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। जिस ठेकेदार एसोसिएशन का गठन ठेकेदारों के हितों की रक्षा के लिए हुआ उसी एसोसिएशन पर छोटे ठेकेदारों का भक्षक होने के आरोप लगने शुरू हो गये हैं। एसोसिएशन की कार्यशैली को लेकर आवाज उठने लगे हैं और यदि पदाधिकारियों ने रवैया नहीं सुधारा तो जल्द ही विरोध की आवाज मुखर होने लगेंगी। कई ठेकेदारों ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को इन तथ्यों से अवगत भी करा दिया है। दरअसल नगर निगम के ठेकेदारों के नवगठित एसोसिएशन पर स्वार्थी और संरक्षणवादी होने के आरोप लग रहे हैं। ताजा आरोप यह लगा है कि एसोसिएशन चुनिंदा बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए छोटे ठेकेदारों के हितों पर प्रहार कर रहे हैं। जबकि छोटे ठेकेदार ही एसोसिएशन की मजबूती हैं।
ज्ञात हो कि अजय त्यागी पूर्व में ठेकेदार एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। मुरादनगर हादसे के बाद अजय त्यागी जेल में हैं। ऐसे में गाजियाबाद नगर निगम कॉट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा हुआ था। ऐसे में ठेकेदारों द्वारा नये सिरे से एसोसिएशन का गठन और नया अध्यक्ष बनाने की मांग हो रही थी। इसी बीच सर्वसम्मति से अध्यक्ष का चुनाव करने पर जोर दिया गया। हालांकि सभी एकमत नहीं हुए लेकिन एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी को कमोबेश अधिकांश लोगों ने स्वीकार कर लिया। दरअसल बड़े ठेकेदार को अपने दम पर सभी काम करवा लेते हैं। लेकिन छोटे ठेकेदार अपनी बातों को अधिकारियों तक ठीक ढ़ंग से नहीं पहुंचा पाते। ऐसे में छोटे ठेकेदारों का ही इस बात पर अधिक जोर था कि एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी का गठन हो। बीते महीने निगम के ठेकेदारों ने नई एसोसिएशन गठित होने का एलान किया और उसमें प्रधान जयवीर गुर्जर को अध्यक्ष चुना गया। नवनियुक्त अध्यक्ष ने टेंडर में नया शेड्यूल रेट लागू करने, नगर निगम में पंजीकृत ठेकेदारों को हर बार सभी कागजात जमा कराने से छूट देने और लेखा विभाग के माध्यम से समय से भुगतान कराने की मांग को प्रमुखता से अधिकारियों के समक्ष रखा। जिससे उम्मीद जगी कि नवगठित एसोसिएशन ठेकेदारों के पक्ष में काम करेगा।

नवनियुक्त अध्यक्ष जयवीर प्रधान ने ऐलान किया था कि नवगठित एसोसिएशन सर्वसम्मति से ठेकेदारों के हितों के लिए संघर्ष करेगा और सभी ठेकेदारों के लिए सामुहिक रूप से आवाज बुलंद की जाएगी। अध्यक्ष के इन्हीं बातों को लेकर उन्हें घेरा भी जा रहा है। दरअसल मामला डेंस के कामों में प्लांट की शर्त लगाये जाने को लेकर है। विदित हो कि पूर्व में बोर्ड फंड से कराये जाने वाले छोटे कामों में प्लांट की शर्तें नहीं थी। इस कारण छोटे ठेकेदार भी काम में हिस्सेदारी करते थे और उन्हें भी कुछ काम मिल जाता था। लेकिन अब प्लांट की अनिवार्यता होने की वजह से छोटे ठेकेदार रेस से बाहर हो गये हैं। छोटे ठेकेदारों को इसी बात का मलाल है। छोटे ठेकेदार कह रहे हैं कि नवगठित एसोसिएशन बड़े ठेकेदारों के संरक्षक और छोटे ठेकेदारों के भक्षक की तरह काम करने लगी है। किस तरह छोटे ठेकेदारों को नगर निगम से बाहर का रास्ता दिखाया जाये और निगम पर चुनिंदा बड़े ठेकेदारों का आधिपत्य हो इसके लिए काम कर रही है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर सिर्फ व्यक्तिगत हितों के लिए काम करने के भी आरोप लग रहे हैं। ऐसे में यह भी संभव है कि छोटे ठेकेदार मुखर होकर एसोसिएशन का बहिष्कार कर दें। हालांकि एसोसिएशन के अध्यक्ष जयवीर प्रधान गुर्जर पूर्व में यह बात कह चुके हैं कि वह ठेकेदारों की पीड़ा को समझते हैं। ऐसोसिएशन का गठन ही ठेकेदारों की सामुहिक हितों की रक्षा के लिए हुआ है। लेकिन यह देखना होगा कि किस तरह से सभी ठेकेदारों को एकजुट रखने और छोटे ठेकेदारों के हितों की रक्षा करने में सफल होते हैं।
















