जगह-जगह लंबे समय से हो रहे आंदोलन
गाजियाबाद। देश के अन्नदाता यानी किसानों की आय दोगुनी करने को केंद्र सरकार ने बेशक तीन कृषि विधेयक लागू कर दिए हैं, मगर जिले में किसानों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। जीडीए, सीपीडब्ल्यूडी, वेब सिटी, एनएचएआई, यूपीसीडा समेत कई विभागों ने किसानों की भूमि अधिग्रहित कर ली, मगर बदले में बढ़ा मुआवजा से लेकर संपर्क मार्ग का निर्माण समेत अन्य मांगों को पूरा नहीं किया गया है। जिले में 7 मामलों में क्षेत्र के किसान आंदोलनरत हंै। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी राजवीर सिंह की मानें तो किसानों की बात सभी राजनीतिक दल और प्रशासनिक अधिकारी करते हैं, मगर उनकी समस्याएं ज्यों की त्यों है। जिले में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से प्रभावित 19 गांवों के किसानों की समस्या है। सर्विस रोड समेत समान मुआवजा की मांग है। मोदीनगर तहसील में किसानों का दिन-रात धरना चल रहा है। वहीं, जीडीए द्वारा मधुबन-बापूधाम योजना के 281 एकड़ जमीन अधिग्रहण का मामला है। किसान एक समान मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। बम्हैटा और डासना में उप्पल चड्ढा गु्रप बिल्डर द्वारा वेब सिटी के लिए खरीदी गई किसानों की जमीन का मामला है। गांव रईसपुर, हरसांव, रजापुर, सिहानी समेत पांच गांवों की जमीन कौडिय़ों के भाव अधिग्रहण कर ली गई, मगर 65 साल बाद भी किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया जा रहा। पिछले चार साल से किसान आंदोलनरत है। लोनी में यूपीसीडा और आवास एवं विकास परिषद द्वारा गांव मंडौला, मीरपुर हिंदू गांव की जमीन का मामला, डासना आकाश नगर में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के बीच में मकानों को तोडऩे के बाद पुर्नवास के लिए जमीन का मामला है। उधर, डीएम अजय शंकर पांडेय का कहना है कि जिले में किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जीडीए समेत अन्य विभागों को किसानों की समस्या हल करने के निर्देश दिए गए है। किसानों की जायज मांगों को पूरा किया जाएगा।
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