-चुनाव से पहले अतुल गर्ग का विरोध शुरू, प्रतिनिधि पर लगाया जमीन कब्जाने का आरोप
गाजियाबाद। भाजपा ने बेशक जनपद गाजियाबाद में सिटिंग विधायकों को दोबारा मैदान में उतारने का निर्णय लिया है, मगर इनका विरोध शुरू हो गया है। गाजियाबाद शहर में रविवार को भाजपा विधायक अतुल गर्ग के खिलाफ पर्चे वितरित किए गए। इन पर्चों के जरिए गर्ग को पुन: टिकट देने का पुरजोर विरोध किया गया है। विधायक अतुल गर्ग, सुनील शर्मा, नंदकिशोर गुर्जर, अजीत पाल त्यागी और डॉ. मंजू सिवाच का टिकट कंफर्म होने के बाद समर्थकों में एक ओर जहां खुशी की लहर है तो वहीं शहर विधान सभा क्षेत्र के प्रत्याशी अतुल गर्ग का विरोध शुरू हो गया है। ऐसे में गर्ग की मुश्किलें बढऩा तय हंै। क्योंकि मतदान को सिर्फ 25 दिन रह गए हैं। राज्यमंत्री अतुल गर्ग के विरोध के नाम पर तो लाइनपार क्षेत्र में पर्चे भी बंटने शुरू हो गये हैं। जिनका शीर्षक है योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं।
बता दें कि विधान सभा चुनाव की घोषणा से पहले ही लोगों में अतुल गर्ग को लेकर जो विरोध सामने आ रहा है, उससे लग रहा है कि कहीं इस बार लाइनपार क्षेत्र के लोग अतुल गर्ग का समीकरण न बिगाड़ दें।
पूर्व में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या के डासना आगमन के दौरान विजयनगर में स्वागत के समय भी अतुल गर्ग के विरोध में पर्चे फैंके गये थे। लाइनपर उत्थान मोर्चा के नाम से वितरित हो रहे पर्चों के माध्यम से अतुल गर्ग से पूछा गया है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब लोग उपचार के लिए तड़प रहे थे, तब आप अपने कमरे में कोरेंटाइन होकर आराम से नींद फरमा रहे थे। लोगों का मानना है कि जब स्वास्थ्य मंत्री को खुद जनता की फिक्र नही है तो वह किसी हक से लाइनपार क्षेत्र के लोगों से वोट मांग रहे है। सरकार में आने के बाद बच्चों की शिक्षा के लिए घोषणा के कॉलेज का इंतजार अभी भी किया जा रहा है।
शहर में मूलभूल सुविधाओं का आज तक अभाव है। कोरोना काल में स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में एक ओर जहां लोगों से उपचार के नाम पर ठगा जा रहा था और रेमडिसीवर इंजेक्शन ब्लैक हो रहा था। सड़कों पर ही कितने अपनों ने उपचार के अभाव में दम तोड़ दिया। न तो उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने किसी की कोई मदद की न ही वह घर से बाहर निकले। जब धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा तब सरकार की उपलब्धियों का बखान करने और झूठे कार्यो का श्रेय लेने के लिए अपने दरबे से बाहर आए। इसके साथ लाइनपार राज्यमंत्री प्रतिनिधि ने गरीब लोगों की जमीन पर कब्जा किया, तब भी कोई मदद नही की गई। अपने कार्यकतार्ओं का तिरस्कार कर उन्हें बंधुआ मजदूर समझा। मगर इस बार लोगों ने मन बना लिया है कि भाजपा को वोट नही दिया जाएगा, चाहे नोटा पर ही क्यों न बटन दबाया जाए। लाइनपर उत्थान मोर्चा का कहना है कि हमारा विधायक हमारे क्षेत्र का हो, कोई पूंजीवादी और परिवारवादी नहीं चाहिये।
















