-गांवों के सर्वागीण विकास के लिए विवादों का समाप्त होना जरूरी: डीएम
गाजियाबाद। जिला प्रशासन ने ग्राम सद्भावना योजना के अंतर्गत हारे व जीते प्रधानों को विकास के मुद्दे पर एक मंच पर लाने का अनूठा व नायाब प्रयास करने का निर्णय लिया है। यह प्रयास पूर्ण रूप से मौलिक एवं शोधात्मक विचारों का परिणाम है। ग्राम सद्भावना योजना का शुभारंभ सोमवार से किया गया। ग्रामों में विकास न होना पर किये गये शोध से पता चलता है कि पार्टीबंदी व सामाजिक रंजिश इसमें मुख्य बाधक है। इस अवधारणा को ध्यान में रखते रखकर ग्राम सद्भावना योजना की शुरूआत की जा रही है, जिससे गांव के विकास को गति प्रदान किया जा सके। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने बताया कि इस व्यवस्था के द्वारा हमें गांव का सर्वागीण विकास करना है, विकास के लिए विवादों को समाप्त करना है, शांति कायम कर ग्रामवासियों को एकजुट करना है, तो उसके लिए नव-निर्वाचित प्रधान और हारे प्रधान को एक साथ खड़ा करने का प्रयास करना है। ग्राम पंचायत का निर्वाचन समाप्त हो चुका है और नव-निर्वाचित ग्राम प्रधानों द्वारा ग्रामों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। इसलिए ग्राम सद्भावना योजना को लागू करने का उपयुक्त समय है। जहां नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान को हारे हुए ग्राम प्रधान एवं ग्रामवासियों को साथ लेकर विकास के रथ को आगे बढ़ाना है। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने नव-निर्वाचित ग्राम प्रधानों से वर्चुवल के माध्यम से सीधा संवाद किया था और उन्हें ग्राम सद्भावना योजना के बारे में बताया था। इस योजना से प्रभावित होकर ग्राम प्रधानों ने अपनी सहमति व्यक्त की थी। सोमवार को योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत जिलाधिकारी ने जनपद के सभी ब्लॉकों के 2-2 निर्वाचन में विजेता एवं हारे हुए पूर्व ग्राम प्रधानों की बैठक कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभाकक्ष में बुलाई, जिसमें जिलाधिकारी स्वयं नव-निर्वाचित एवं पूर्व ग्राम प्रधानों के साथ रूबरू हुए। बैठक में ग्राम मुरादनगर पुर्सी, कुम्हैड़ा, मुकीमपुर, मकरम्मतपुर खिखैड़ा, भोवापुर, शमशेर, इलायचीपुर व ग्राम खानपुर जप्ती के ग्राम प्रधान क्रमश: नीरपाल, बिजेंद्र, जोगिंद्र, सुनीता, रूमा, सुनील, मोहित, सुंदर, सुनील, सुनील कुमार, रविंद्र, प्रमोद, हरेंद्र, नरेंद्र, सुंदर खारी व अजय खारी उपस्थित रहे।
















