नंदग्राम थाने में भू-माफिया के कारनामों की लिस्ट लंबी, सरकारी तंत्र नतमस्तक

-एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी नहीं, उठ रहे पुलिस पर सवाल

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के दावे से उलट गाजियाबाद में एक असरदार भू-माफिया पर नकेल कसने में सरकारी तंत्र नाकाम नजर आ रहा है। नगर निगम द्वारा साक्ष्य आधारित रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजने और पुलिस में एफआईआर होने के बावजूद भू-माफिया ओम त्यागी की अब तक गिरफ्तारी न होना सवालों के घेरे में है। आरोपी को आखिर कौन बचा रहा है? यह सवाल भी उठ रहा है। इस मामले में अब जिलाधिकारी और नगरायुक्त से शिकायत की गई है। शिकायत में भू-माफिया के काले कारनामों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है। उप्र सरकार ने भू-माफिया के खिलाफ हमेशा सख्त रूख अपनाया है। माफिया के कब्जे से बेशकीमती भूमि को मुक्त कराने के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की गई, मगर गाजियाबाद शहर में एक असरदार भू-माफिया पुलिस-प्रशासन को ठेंगा दिखा रहा है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी न करना चर्चाओं में है। विशेष बात यह भी है कि आरोपी के कारनामों की फेहरिस्त के संबंध में नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने काफी समय पहले डीएम को रिपोर्ट तक भेज दी थी।

मेरठ रोड के पास शांतिनगर में कई करोड़ की भूमि इस भू-माफिया ओम त्यागी ने बेच दी थी। संबंधित भूमि पर प्लॉटिंग कर करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे किए गए। इस कृत्य में आरोपी का साला और एक नौकर भी संलिप्त रहा। कुछ भूमि की रजिस्ट्री किसानों के नाम से कराई गई। बाकी की अपने नौकर के नाम से करा दी गई। खसरा नंबर-39, 40, 45, 48, 49, 50 व 51 आदि में यह घपलेबाजी की गई। सिहानी और नंदग्राम में यह भू-माफिया कई कॉलोनियां बेच चुका है। नगर निगम तक की भूमि इस व्यक्ति द्वारा खुर्द-बुर्द कर दी गई है। नंदग्राम निवासी रजनेश चौधरी ने अब भू-माफिया के खिलाफ जिलाधिकारी और नगरायुक्त से शिकायत की है। रजनेश का कहना है कि आरोपी ने 1998 से 2014 के बीच में शांति नगर कॉलोनी बसाई थी। उस समय रजनेश आरोपी के पास भूमि बिकवाने का काम करता था। रजनेश को बताया गया था कि किसानों से खरीदी गई भूमि को बेचना है। भूमि विक्रय का पूरा पैसा भू-माफिया ने अपने पास रखा। खरीदारों को मौके पर कब्जा देने का काम आरोपी व उसके साले ने किया था।

आरोप है कि कुछ रजिस्ट्री तो वास्तविक किसानों की थी और बाकी रजिस्ट्री आरोपी के नौकर एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा फर्जीवाड़ा कर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी करके कराई गई थी। रजनेश ने कई मामलों के साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। वह इस मामले में सरकारी गवाह तक बनने को तैयार है। वहीं 10 अक्टूबर 2020 को पीडि़तों के अलावा नगर निगम की ओर से नदंग्राम थाना में ओम त्यागी, सूरज पासवान, रजनीश चौधरी, ब्रजेश त्यागी, इन्दू त्यागी, बबिता शर्मा, महेश शर्मा एवं अजीत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी करने से बच रही है या फिर यह कहा जाए की उसे जानबूझ कर बचाया जा रहा है। वैसे तो पुलिस छोटे मामले में तत्परता दिखाते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजने का काम करती है। मगर ओमपाल त्यागी समेत 8 लोगों पर इतनेे मुकदमें दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तार क्यों नही कर रही है। उधर, आरोप है कि नंदग्राम थाना प्रभारी ने भू-माफिया पर काफी मेहरबानी बरत रखी है। थाना प्रभारी की मेहरबानी के चलते आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।