गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक चलेगी मेट्रो और रैपिड रेल, जीडीए भी बनेगा खर्च में भागीदार

मेरठ से नई दिल्ली तक चलने वाले नमो भारत ट्रेन गाजियाबाद और नोएडा एयरपोर्ट को भी कनेक्ट करेगा, जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पूरे दिल्ली-एनसीआर से सुनिश्चित की जा रही है। नोएडा मेट्रो का लिंक सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क-5 तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके साथ ही मेरठ से गाजियाबाद होते हुए दिल्ली जाने वाली रैपिड रेल का ट्रैक भी जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई-अड्डे तक जाएगा, जिससे यात्रियों के लिए और अधिक सुविधाजनक आवागमन होगा। रैपिड रेल के ट्रैक पर ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की मेट्रो सेवाएं भी चलेंगी और इन्हें जेवर एयरपोर्ट तक जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक डायरेक्ट मेट्रो और रैपिड रेल चलेगी। इस प्रोजेक्ट को रैपिडेक्स का संचालन करने वाली एनसीआरटीसी पूरा करेगा। प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से 20 प्रतिशत और राज्य सरकार से 20 प्रतिशत फंडिंग होगी। शेष रकम का इंतजाम एनसीआरटीसी को करना होगा। यदि एनसीआरटीसी इस प्रोजेक्ट के लिए फंड उपलब्ध नहीं कराती है तो यमुना प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की प्रोजेक्ट कॉस्ट में शेयरिंग होगी।

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
ग्रेटर नोएडा। गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों के लिए बड़ी खबर है। अब इन क्षेत्रों को सीधे जेवर में बन रहे नोएडा एयरपोर्ट से मेट्रो के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस नई कनेक्टिविटी से हवाई यात्रियों को बेहतर और सुगम यात्रा की सुविधा मिलेगी। यमुना प्राधिकरण यीडा की गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी गई है। सीईओ ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पूरे दिल्ली-एनसीआर से सुनिश्चित की जा रही है। नोएडा मेट्रो का लिंक सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क-5 तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके साथ ही मेरठ से गाजियाबाद होते हुए दिल्ली जाने वाली रैपिड रेल का ट्रैक भी जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई-अड्डे तक जाएगा, जिससे यात्रियों के लिए और अधिक सुविधाजनक आवागमन होगा। रैपिड रेल के ट्रैक पर ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की मेट्रो सेवाएं भी चलेंगी और इन्हें जेवर एयरपोर्ट तक जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक डायरेक्ट मेट्रो और रैपिड रेल चलेगी। इस प्रोजेक्ट को रैपिडेक्स का संचालन करने वाली एनसीआरटीसी पूरा करेगा। प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से 20 प्रतिशत और राज्य सरकार से 20 प्रतिशत फंडिंग होगी। शेष रकम का इंतजाम एनसीआरटीसी को करना होगा। यदि एनसीआरटीसी इस प्रोजेक्ट के लिए फंड उपलब्ध नहीं कराती है तो यमुना प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की प्रोजेक्ट कॉस्ट में शेयरिंग होगी।

मेरठ से नई दिल्ली तक चलने वाले नमो भारत ट्रेन गाजियाबाद और नोएडा एयरपोर्ट को भी कनेक्ट करेगा। गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक नमो भारत ट्रेन चलाने के लिए रैपिडेक्स (रैपिड रेल) परियोजना के विस्तार को मंजूरी दे दी गई है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और प्राधिकरण के सहयोग से बनने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में विकास की रफ्तार को और गति मिलेगी। गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक जो नया रूट (कॉरिडोर) बनाया जाएगा जो कि मेरठ दिल्ली रूट (कॉरिडोर) से कनेक्टेड रहेगा। गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट तक का रूट लगभग 72 किलोमीटर लंबा होगा। इस रूट से गाजियाबाद, ग्रेनो वेस्ट, ग्रेटर नोएडा ईस्ट और यमुना प्राधिकरण के सभी सेक्टर जुड़ा रहेगा। कॉरिडोर के बन जाने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट मेरठ से डॉयरेक्ट कनेक्ट हो जाएगा। इस कॉरिडोर में एक ट्रैक पर ही रैपिड रेल और मेट्रो ट्रेन चलेंगी। एयरपोर्ट से फिल्म सिटी तक रैपिड रेल और मेट्रो के साथ-साथ एलआरटी भी चलेगी। यानी यह रूट ऐसा होगा जिस पर एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनों का परिचालन होगा।

यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में जेवर एयरपोर्ट के पास 100 एकड़ जमीन पर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनाने की मंजूरी दी गई। यह सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क सेक्टर-28 में स्थापित किया जाएगा। इसमें 10,000 वर्ग मीटर के प्लॉट्स अलॉट किए जाएंगे। इस पहल से क्षेत्र में सॉफ्टवेयर उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि अब तक यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में आइटी और आईटीएस (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-संबंधित सेवाएं) उद्यमियों के लिए कोई विशेष सेक्टर नहीं था। इसे देखते हुए बोर्ड में 100 एकड़ जमीन पर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे मंजूरी दे दी गई है। इस पार्क में 10,000 वर्ग मीटर के प्लॉट अलॉट किए जाएंगे, जिससे आइटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों को व्यवसाय स्थापित करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और सुविधाएं मिलेंगी। विदेशी कंपनियों ने यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए जमीन की मांग पहले ही कर रखी है।