गाजियाबाद। नगर निगम के भरसक प्रयासों के बाद आखिरकार श्वान शवदाह गृह की शुरूआत हो गई है। श्वान शवदाह गृह में पालतू कुत्तों के साथ निराश्रित कुत्तों का भी अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। खास बात यह है कि समूचे उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद इकलौता ऐसा शहर बन गया है, जहां श्वान शवदाह गृह की स्थापना की गई है। इस शवदाह गृह को जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर निरंतर प्रयासरत थे। गैस आधारित यह शवदाह गृह कई समस्याओं का एक साथ निदान कर सकेगा।
पशुप्रेमी पालतू पशु का अंतिम संस्कार इस स्थान पर करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। जबकि निराश्रित कुत्तों के शवों का नगर निगम द्वारा निशुल्क अंतिम संस्कार किया जाएगा। नंदग्राम के सामने नंदी पार्क स्थित श्वान केंद्र के पास श्वान शवदाह गृह की स्थापना की गई है। यह गैस आधारित शवदाह गृह है। इसके लिए सीएसआर फंड से 9.89 लाख की धनराशि नगर निगम को उपलब्ध कराई गई थी। शवदाह गृह में पैट क्रीमेटर मशीन के माध्यम से पालतू एवं निराश्रित कुत्तों का दाह संस्कार किया जा सकेगा।
नगर निगम के उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह ने बताया कि नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशन में यह शवदाह गृह आरंभ कराया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक सेंथिल पांडियन सी ने शवदाह गृह के लिए सीएसआर फंड से धनराशि की मंजूरी दिलाई थी। नगरायुक्त के अलावा सीडीओ अस्मिता लाल भी इस शवदाह गृह के कार्य की निगरानी कर रही थीं। शवदाह गृह की देख-रेख एवं संचालन का काम नगर निगम करेगा।
उन्होंने बताया कि शहर में मृत श्वानों को दफनाने या दाह संस्कार के लिए कोई स्थायी जगह नहीं थी। ऐसे में मृत श्वानों को लोग इधर-उधरर फेंक देते थे। इससे बीमारियां फैलने का खतरा रहता था। उन्होंने बताया कि पालतू श्वान के अंतिम संस्कार का शुल्क पांच सौ रुपए निर्धारित किया गया है। इस शुल्क से शवदाह गृह पर तैनात कर्मचारियों के वेतन की भरपाई की जाएगी। जबकि निराश्रित कुत्तों के शवों का अंतिम संस्कार निशुल्क होगा।
















