-21 साल से कम उम्र वालों के लिए दरवाजे बंद, नियम तोड़ने पर संचालक पर होगी सख्त कार्रवाई
-लेडी डॉन के तेवरों से बार-रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप, सख्ती के आगे झुकी शौकीनों की मस्ती
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में अवैध शराब के खिलाफ चल रही लड़ाई अब केवल एक अभियान नहीं बल्कि मिशन क्लीन ऑपरेशन बन चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव की आहट ने जहां सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है, वहीं गाजियाबाद आबकारी विभाग ने अपने बेहतरीन तालमेल और अडिग रणनीति से शराब माफियाओं की कमर तोड़ दी है। दिल्ली बॉर्डर से लेकर दुहाई और डासना टोल तक 24 घंटे की चौकसी ने जिले की सीमाओं को शराब तस्करों के लिए अभेद किला बना दिया है। इस पूरे अभियान की कमान संभाले हुए हैं जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम। उनकी नीति और रणनीति ने जिले को नई पहचान दी है। संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व में टीमवर्क का ऐसा उदाहरण देखने को मिल रहा है कि शराब माफिया अब जिले की सीमा में दाखिल होने से पहले ही सौ बार सोचते हैं। टीम में शामिल जाबांज आबकारी इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, कीर्ति सिंह, डॉ. राकेश त्रिपाठी, चमन सिंह, अनुज वर्मा और चन्द्रजीत सिंह अपने-अपने तरीके से माफियाओं को नाकों चने चबवा रहे हैं।
उनकी कार्रवाइयां न केवल गाजियाबाद में बल्कि पूरे प्रदेश में नजीर बन रही हैं। जिले के मुखिया ने हाल ही में एक नया नियम लागू किया है। अब 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को किसी भी बार, होटल या रेस्टोरेंट में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि कोई संचालक इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो सबसे पहले कार्रवाई उसके खिलाफ होगी। इस मुहिम की शुरुआत निरीक्षक कीर्ति सिंह ने की है। उन्होंने कई बार और रेस्टोरेंट की चेकिंग कर चेतावनी दी है। इस नियम के लागू होते ही बार-रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप मच गया है। वहीं आमजन इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे युवा वर्ग को नशे से बचाने में मदद मिलेगी।
जिला आबकारी संजय कुमार प्रथम का कहना है कि जिले में अवैध शराब कारोबार और नियमों के उल्लंघन को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी प्राथमिकता जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था है। अंडर-21 युवाओं के लिए होटल, बार और रेस्टोरेंट में एंट्री पर सख्त प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यदि कोई संचालक इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। हमारी टीम 24 घंटे सतर्क है और शराब माफियाओं से लेकर छोटे तस्करों तक पर कड़ा शिकंजा कसा जा रहा है। महिला निरीक्षक की भूमिका बेहद सराहनीय है, उनकी कार्यशैली से न सिर्फ तस्करों में खौफ है बल्कि संचालकों में भी अनुशासन देखने को मिल रहा है। अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
लेडी डॉन का खौफ, बार-रेस्टोरेंट संचालकों में डर
जिले में आबकारी विभाग कि इस टीम में एक महिला इंस्पेक्टर भी हैं, जिनका अंदाज सबसे निराला है। भले ही उन्हें जिले में आए कुछ माह ही हुए है, मगर इतने कम समय में उन्होंने अपनी कार्रवाई से सभी मंशा साफ कर दी है। चेकिंग और छापेमारी के दौरान उनकी सख्ती और दबंगई ने शराब कारोबारियों और बार-रेस्टोरेंट संचालकों में खौफ का माहौल बना दिया है। यही कारण है कि अब पूरा जिला उन्हें लेडी डॉन के नाम से पहचानने लगा है। बार और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि इंस्पेक्टर का व्यवहार भले ही सौम्य है, लेकिन जब नियम और कानून की बात आती है तो उनका तेवर किसी फौलादी शिकंजे से कम नहीं। उनके दबंग अंदाज के चलते कई बार संचालक खुद लाइन में खड़े नजर आते हैं।
टोल और हाइवे पर 24 घंटे की चौकसी
आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल शहर की गलियों तक सीमित नहीं है। दिल्ली बॉर्डर, दुहाई और डासना टोल पर राउंड-द-क्लॉक चेकिंग चल रही है। यह चेकिंग दो-चार घंटे की औपचारिकता नहीं बल्कि लगातार 24 घंटे चल रही है। जिले की टीम के इंस्पेक्टर खुद मोर्चा संभाले हुए हैं और मेरठ प्रवर्तन टीम भी सहयोग कर रही है। इसके अलावा हाईवे, राष्ट्रीय मार्ग और गांव-गली तक विभाग की दबिश जारी है। रविवार को तो टीम ने जिले की लाइसेंसी शराब दुकानों का भी निरीक्षण कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि कानून तोडऩे वालों के लिए कोई ढील नहीं होगी।
शराब माफियाओं में खौफ, आमजन में राहत
लगातार हो रही कार्रवाइयों ने शराब माफियाओं की कमर तोड़ दी है। अब स्थिति यह है कि जिले की सीमा से गुजरने में भी तस्करों को डर लग रहा है। शराब कारोबार से जुड़े कई छोटे तस्कर अपने धंधे से किनारा कर चुके हैं। जहां एक ओर माफियाओं में खौफ है, वहीं दूसरी ओर आम जनता राहत की सांस ले रही है। लोग खुलेआम कह रहे हैं कि आबकारी विभाग की मुहिम ने न केवल माफियाओं पर शिकंजा कसा है बल्कि समाज को भी सुरक्षित बनाया है।
गाजियाबाद बन रहा आदर्श मॉडल
गाजियाबाद में चल रहा यह अभियान अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आदर्श मॉडल बन चुका है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की दूरदर्शिता और उनकी टीम की मेहनत ने गाजियाबाद को एक ऐसी पहचान दिला दी है, जहां शराब माफियाओं की एक नहीं चलती। आज गाजियाबाद गर्व से कह सकता है कि यहां माफिया नहीं, कानून की हुकूमत चलती है।



















