ठाकुरद्वारा मंदिर में सायं तीन दिवसीय सुंदरकांड कथा का आयोजन
गाजियाबाद। श्री ठाकुरद्वारा मंदिर में रूद्रमहायज्ञ का आयोजन सोमवार को मंत्रोच्चारण के बीच किया गया। यज्ञ की विशेषता यह रही कि लकड़ी के बने यंत्र से आग उत्पन्न की जिसका यज्ञ में इस्तेमाल किया गया। इस यंत्र को अरणी कहा जाता है। इसके बाद विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विश्व कल्याण के लिए यज्ञ में आहुति दी गई। मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता में पंडित विष्णु दत्त मिश्र सरस ने सांसद प्रतिनिधि देवेंद्र हितकारी, मीडिया प्रभारी सौरभ जायसवाल, पंडित रमेश लक्ष्मी वेदाचार्य ,पंडित संदीप निलेश पंडित किशोर अवस्थी, पंडित ब्रिज गोपाल की मौजूदगी में बताया कि वेदों में समूचे ब्रहमांड को 27 भागों में बांटा गया है। इन्हें नक्षत्र कहते हैं। जबकि पूरा आकाश 12 सेक्टरों में विभाजित है। इन्हें हम 12 राशियों के नाम से जानते है। 8 फरवरी यानि सोमवार को आकाश में एक विशेष खगोलीय घटना हो रही है। इस घटना में मकर राशि में राहु केतू और मंगल को छोड़कर शेष ग्रह शनि, बृहस्पति, सूर्य, बुध, शुक्र एवं चंद्रमा एक साथ मिल जा रहे है। इसे षडग्रही योग कहते है। चूकिं सभी ग्रह चंद्रमा के नक्षत्र श्रवण में एक साथ आ रहे हैं। इसलिए इसका पूरे विश्व पर नकारात्मक प्रभाव होगा। इस योग के नकारात्मक प्रभाव को रोकने और विश्व कल्याण को ध्यान में रखकर इसके लिए रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सवा लाख महामृत्युजय मंत्रों की आहुति दी जाएगी। यज्ञ में अग्निसूत्र द्वारा उत्पन्न की गई है। इसलिए इसकी महत्ता बढ़ जाती है। आठ फरवरी को शाम इस संयोग का प्रभा शुरू होकर 11 फरवरी को सुबह तक रहेगी। इस दौरान ठाकुरद्वारा मंदिर में सुबह यज्ञ और शाम को दो घंटे के लिए 7 बजे से 9 बजे तक सुंदरकांड कथा का आयोजन किया जाएगा। हनुमानजी को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। संकटमोचन हनुमान को याद करने के लिए सुंदरकांड कथा लोगों के कल्याण के लिए आयोजित की जा रही है। 11 फरवरी को मंदिर में दोपहर भंडारे के साथ आयोजन का समापन होगा।
















