विदेशी सामान के बहिष्कार का बिगुल: 7 सितम्बर को गाजियाबाद में ऐतिहासिक रैली

  • सोशल चौकीदार संस्था के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत का शंखनाद, हजारों लोग सड़कों पर उतरेंगे
  • आर्थिक स्वाभिमान की पुकार, ‘वोकल फॉर लोकलà बनेगा आंदोलन, व्यापारी, समाज और युवा एकजुट

उदय भूमि संवाददाता

गाजियाबाद। आने वाली 7 सितम्बर को गाजियाबाद एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रहा है। शहर की सड़कों पर विदेशी सामान के बहिष्कार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के लिए हजारों लोग उतरेंगे। सोशल चौकीदार संस्था के नेतृत्व में यह रैली दोपहर 12 बजे रामलीला मैदान, कविनगर से शुरू होगी और सी-ब्लॉक मार्केट होते हुए हापुड़ रोड तक पहुंचेगी। संस्था का स्पष्ट संदेश है कि अब वक्त आ गया है जब भारत की जनता विदेशी टैरिफ की मार के खिलाफ आवाज बुलंद करे और अपने उद्योगों को ताकत दे। संस्था के अध्यक्ष के.के. शर्मा ने बताया कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ केवल आर्थिक आघात नहीं है बल्कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को रोकने की साजिश भी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है। यहां की जनता यदि विदेशी सामान का उपयोग बंद कर दे और भारतीय उत्पादों को अपनाए तो अमेरिका जैसे देशों को गहरा झटका लगेगा। यही कारण है कि यह रैली केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं बल्कि आर्थिक स्वाभिमान का बिगुल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार दिए गए आह्वान वोकल फॉर लोकल का स्वर अब जनता की जुबान पर है। संस्था का कहना है कि अगर जनता आत्मनिर्भर भारत की राह पर चलने का संकल्प ले, तो विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी और यही धनराशि देश के विकास कार्यों में लगेगी। छोटे व्यापारी, कुटीर उद्योग और स्थानीय कंपनियाँ मजबूत होंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह रैली जनता को यही संदेश देने के लिए आयोजित की जा रही है कि हमें अपने देशी सामान और सेवाओं पर गर्व करना चाहिए। के.के. शर्मा ने यह भी कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। सामरिक ताकत के मामले में भी भारत अमेरिका और चीन की बराबरी कर रहा है। हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने रख दिया।

अमेरिका और चीन ने यह शक्ति देखी और भारत को रोकने के लिए आर्थिक हथियार का इस्तेमाल किया। अमेरिका का यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन यह योजना तभी सफल हो सकती है जब भारत की जनता चुप रहे। रैली का उद्देश्य यही है कि जनता अब चुप नहीं बैठेगी। शर्मा ने यह भी कहा कि जब राजनीतिक दल सत्ता के लिए रैलियां और सभाएं कर सकते हैं, तो विदेशी टैरिफ जैसे मुद्दे पर उनकी चुप्पी बेहद दुखद है। किसी भी दल ने इस विषय पर जनता के बीच आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि जब राजनीति मौन हो जाती है, तब जनता जागती है। गाजियाबाद की यह रैली इस जागरण की शुरुआत है।

समाज, व्यापारी और प्रबुद्ध वर्ग मिलकर करेंगे आवाज बुलंद

इस रैली में केवल एक संस्था नहीं बल्कि पूरा समाज भाग लेगा। व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठन, प्रबुद्ध नागरिक, युवा, महिलाएँ और विद्यार्थी सब मिलकर यह संकल्प लेंगे कि विदेशी सामान का बहिष्कार होगा और भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। आयोजन समिति का कहना है कि जब गाजियाबाद की सड़कें इस स्वर से गूंजेंगी तो यह केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे देश को प्रभावित करेगा।

नारों से गूंजेगी गाजियाबाद की सड़कें

रैली में भाग लेने वाले लोग अपने हाथों में तख्तियाँ और झंडे लेकर चलेंगे। गाजियाबाद की सड़कों पर दमदार नारे गूंजेंगे- “विदेशी छोड़ो, देशी अपनाओ”, “भारत का पैसा भारत में”, “वोकल फॉर लोकल – यही भारत का असली मॉडल” और “आत्मनिर्भर भारत- राष्ट्र की शान”। इस जोश और ऊर्जा से वातावरण में एक नया संदेश जाएगा कि भारत अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुका है।

जनता की शक्ति से बदलेगा भविष्य

संस्था के अध्यक्ष ने कहा कि हमारी इस रैली का उद्देश्य किसी प्रकार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। हम तो समाज के चौकीदार हैं और जनता को सावधान करना हमारा कर्तव्य है। जिस दिन विदेशी कंपनियों को यह समझ आ जाएगा कि भारत की जनता जाग चुकी है, उसी दिन कोई भी देश भारत पर टैरिफ लगाने की हिम्मत नहीं करेगा। भारत में व्यापार करने के लिए उन्हें नतमस्तक होना पड़ेगा। 7 सितम्बर की यह रैली केवल विरोध का प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत का शंखनाद होगी। यह आयोजन यह साबित करेगा कि भारत की जनता अब विदेशी दबावों के आगे झुकने वाली नहीं है। जब जनता जागती है तो इतिहास बदल जाता है। गाजियाबाद की यह रैली उसी ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव रखेगी।